साहित्य चक्र

25 March 2017

वाजपेयी का अंदाज....निराला




चाहे आज पूरे विश्व में मोदी की जय जयकार हो रही हो, लेकिन बीजेपी को फर्श से अर्श तक पहुंचाने वाले एक ही शख्स रहे है, वो है अटल बिहारी वाजपेयी जी जिन्होंने बीजेपी को उसकी साख दिलाई। वाजपेयी जी वो राजनेता थे, जो अपनी राजनीति के लिए देश को दांव पर नहीं लगाया करते थे। बिहारी जी उन राजनेताओं में गिने जाते है, जो अपने दम पर पार्टी को आगे ले जाया करते थे। आपको बता दूं कि बिहारी जी राजनीति में आने से पहले एक पत्रकार की भूमिका निभाया करते थे। वैसे अटल जी एक अच्छे कवि के साथ एक अच्छे वक्ता भी हुआ करते थे। विहरी जी अपनी ईमानदारी के लिए लोगों के दिलों में आज भी राज करते हैं। अटल जी अपने जमाने के लोकप्रसिद्ध राजनेता हुआ करते थे। उनके भाषणों के लोग आज भी दिवाने हैं। कभी-कभी में सोचता हूं, कि जब बीजेपी ने जनसंघ के लिए कमल का निशान चुना, तो शायद उसमें अटल जी की व्यक्तित्व की छाया छवि रही होगी। वैसे मोदी को गुजरात का सीएम अटल जी ने ही बनाया था। इतना ही नहीं अटल जी को भारत-पाक रिश्तों के लिए भी जाना जाता है। वो अटल जी ही थे जिन्होंने सीमा पर शहीद होने वाले हर सैनिक को सम्मान देने का फैसला किया। हर शहीद के शव को उनके गांव व घर तक पहुंचाने के साथ-साथ राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाने का फैसला किया। अटल जी के शासनकाल  में ही देश ने कारगिल जैसा युद्ध लड़ा। जिसमें देश को जीत हासिल हुई। अटल जी पूरे जीवनभर भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे। चाहे फिर भारतीय जनसंघ (भारतीय जनता पार्टी) की स्थापना करने वाले महापुरुषों की बात की क्यों ना हो। अटल जी ने लम्बे समय तक वीर अर्जुन, पांचजन्य, राष्ट्रधर्म जैसे राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत पत्रिकाओं का संपादन भी किया है। जो यह दर्शाता है, कि अटल जी एक राष्ट्र भक्त थे। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रचारक के रूप में अटल जी ने आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प किया। बिहारी जी ने अपने नेतृत्व में 24 दलों की गठबंधन की सरकार बनाई। जिसमें बिहारी जी प्रधानमंत्री और 81 मंत्रियों ने शपथ ली। जिसमें कभी भी किसी पार्टी ने विरोध नहीं किया। जिससे बिहारी जी के नेतृत्व का पता चलता है। 1968 से 1973 तक अटल जी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे। साल 2014 में अटल जी को देश का सबसे सर्वोच्च पुरस्कार भारत रत्न से नवाजा गया।  


                                                     संपादक- दीपक कोहली

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