साहित्य चक्र
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11 January 2025

हिंदी भाषा का विकास

इतिहास के पन्नों को पलटने से हमें हिंदी भाषा के विकास की एक स्पष्ट तस्वीर मिलती है। हमें अपनी मातृभाषा पर गर्व होना चाहिए। मातृभाषा हमारी संस्कृति, हमारी पहचान, और हमारे समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहाँ कुछ कारण हैं कि हमें अपनी मातृभाषा पर गर्व क्यों होना चाहिए?
मातृभाषा हमारी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। यह हमारे समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों और मूल्यों को दर्शाती है।





मातृभाषा हमारी पहचान का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। यह हमें हमारे समाज और संस्कृति से जोड़ती है। मातृभाषा हमारे समाज को एकजुट करने में मदद करती है। यह हमें एक दूसरे से जोड़ती है और हमारे समाज को मजबूत बनाती है।  मातृभाषा हमारी भाषाई विविधता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह हमें अपनी भाषा और संस्कृति की विविधता को समझने और सम्मान करने में मदद करती है।

मातृभाषा हमारे राष्ट्रीय गौरव का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह हमें हमारे देश और संस्कृति के प्रति गर्व और सम्मान की भावना को जगाती है। इसलिए, हमें अपनी मातृभाषा पर गर्व होना चाहिए और उसे सम्मान और प्यार के साथ संरक्षित करना चाहिए।हिंदी दिवस के अवसर पर हमें अपनी मातृभाषा के प्रति गर्व और सम्मान की भावना को जगाना चाहिए, लेकिन यह भी सच है कि हम अक्सर अपनी मातृभाषा को कम महत्व देते हैं और अंग्रेजी भाषा को अधिक महत्व देते हैं।

यह एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि हम अपनी मातृभाषा को अपने दैनिक जीवन में कम उपयोग करते हैं, यह हमारी संस्कृति और पहचान के लिए खतरनाक हो सकता है। सिर्फ एक दिन हिंदी दिवस मनाने से हम अपने कर्तव्य से मुक्त नहीं हो जाते हैं। हमें अपनी मातृभाषा के प्रति नियमित रूप से प्रयास करना चाहिए और उसे अपने दैनिक जीवन में अधिक महत्व देना चाहिए। इसलिए, हमें अपनी मातृभाषा के प्रति गर्व और सम्मान की भावना को जगाने के लिए नियमित रूप से प्रयास करना चाहिए।


हिंदी भाषा को बढ़ावा देने और उसके प्रति गर्व और सम्मान की भावना को जगाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति, समाज, और शासन-प्रशासन की भागीदारी आवश्यक है।

व्यक्तिगत स्तर पर-

अपने दैनिक जीवन में हिंदी भाषा का उपयोग करना।
हिंदी साहित्य का अध्ययन करना और उसे बढ़ावा देना।
हिंदी भाषा का प्रचार करना और उसके प्रति जागरूकता बढ़ाना।

समाजिक स्तर पर-

हिंदी भाषा के कार्यक्रम आयोजित करना।
हिंदी साहित्य के सेमिनार आयोजित करना।
हिंदी भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान चलाना।

शासन-प्रशासनिक स्तर पर-

हिंदी भाषा को आधिकारिक भाषा बनाना।
हिंदी भाषा के शिक्षण को बढ़ावा देना।
हिंदी भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान चलाना।

इन तरीकों से, हम हिंदी भाषा को बढ़ावा दे सकते हैं और उसके प्रति गर्व और सम्मान की भावना को जगा सकते हैं। इतिहास के पन्नों को पलटने से हमें हिंदी भाषा के विकास की एक स्पष्ट तस्वीर मिलती है। हिंदी भाषा का इतिहास लगभग एक हजार वर्ष पुराना माना जाता है, जो कि सामान्यतः,प्राकृत की अन्तिम अपभ्रंश अवस्था से शुरू होता है।

हिंदी भाषा के विकास को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है,आदिकाल, मध्यकाल और आधुनिक काल। आदिकाल में हिंदी भाषा अपने अपभ्रंश के निकट थी, लेकिन समय के साथ इसमें परिवर्तन आया और यह अपने स्वतंत्र और  सशक्त रूप में खड़ी हो गई।

मध्यकाल में हिंदी भाषा में फारसी और अरबी शब्दों का प्रयोग बढ़ गया, जो कि मुगल शासन के दौरान हुआ। आधुनिक काल में हिंदी भाषा में अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग बढ़ गया, जो कि अंग्रेजों के शासन के दौरान हुआ। इतिहास के पन्नों को पलटने से हमें यह भी पता चलता है कि हिंदी भाषा ने कैसे अपने आप को विकसित किया और कैसे यह भारत की राजभाषा बन गई।


                                    - डॉ. मुश्ताक अहमद शाह


27 November 2024

तुम बनो सौभाग्य मेरा


आतुरता तुम्हे मुझसे मिलने पर विवश कर देती थी।अक्सर दूर गगन में जब चिड़ियों के घर लौटने का समय होता ,जब रवि अपनी रश्मियों को अपनी बाहों में समेटे अश्व रथ पर सवार होकर अपने लोक के लिए प्रस्थान करते ,जब शशि हौले से बादलों की ओट से अटखेलियां करता तब उस काल में तुमसे भेंट होने की संभावनाएं बढ़ जाती।तुम्हे आमंत्रित कर आग्रह पूर्व बुलाना मानो जैसे तुम खुशियां साथ लाने वाले हो,मानो तुम्हारा आना किसी उत्सव के हो जाने जैसा हो।फिर प्रेम आसक्ति में डूबे दो हृदय इस लोक को भूलकर आलौकिक लोक में विचरण करने सरीखे भाव लिए खोए जा चुके हो।





लोग कहते है क्या मिला मुझे तुमसे प्रेम करके।उनकी नजरों में बौराई सी पगलाई सी मै क्या ही उत्तर देती और क्यों ही देती। मैं तो इतना ही जानती हूं प्रेम करके कुछ बचा ही नहीं पाने को,तुम खुद भी नहीं।तुम्हे चाहना था चाह लिया। तुम चाहिए ऐसा कभी नहीं चाहा।मैं नदी के समान बहती रही और अंत में तुम्ही में समा गई।अब मेरी धारा को मै पीछे कैसे मोड़ सकती हूं।

एक दिन जब मेरा अस्तित्व समाप्त हो जाएगा ।जब मैं इस लोक से उस लोक की यात्रा का आरम्भ करूंगी तब तुम्हारा प्रेम मेरे साथ रहेगा।तुम्हारा प्रेम ही मेरा सौभाग्य है। मैं सौभाग्यवती जाना चाहती हूं।इतना अधिकार तुमसे नहीं मांग रही हूं अपितु तुम्हे मेरे जीवन में सौभाग्य रूप में भेजने वाले ईश्वर से मांग रही हूं।

सुनो माना कि अंतिम समय में मेरी मांग सूनी रह जाएगी।लेकिन तुम आना, जरूर आना ।घर के मंदिर से रोली लेकर और कहना ये ईश्वर का प्रसाद है और इस स्त्री का सौभाग्य कि अंत समय में इसके माथे पर सज कर इसका सौभाग्य बढ़ाएगा। तो लगा दीजिए इसके सूने माथे पर सौभाग्य का टीका। और मैं मान लूंगी कि मेरा सौभाग्य तुम हो।

- पारुल अग्रवाल मित्तल

21 November 2024

जागो स्त्रियों जागो




स्त्रियों इक बार अपने अधिकारों की बात करके तो देखो, 
सारे रिश्ते ना बेनकाब हो जाए तो कहना।

स्त्रियों इक बार अपने लिए थोड़ा सा जी के तो देखो, 
सारे करीबी लोग साथ ना छोड़ दें तो कहना।

स्त्रियों इक बार गलत के खिलाफ आवाज उठा कर तो देखो, 
आपके अपने ही ना मुंह मोड़ ले तो कहना।

स्त्रियों इक बार ना कह कर के तो देखो, 
आप के जहन में इक सवाल ना उभरे तो कहना।

स्त्रियों इक बार स्वतंत्र हो कर के तो देखो ढकोसलों से, 
रीति रिवाजों से, रूढ़िवादिता से, संस्कारों से, 
सारा समाज आपके खिलाफ़ ना हो जाए तो कहना।

- रजनी उपाध्याय, हैदराबाद