छोटे घरो मे बड़े दिलवाले रहते है,
उम्र गुजर रहीं इक लाठी के सहारे मग़र,
इन्ही घरों मे प्रकृति प्रेम के मतवाले रहते है।
- राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'
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घर छोड़ डोली पर यहां आई,
गुजरा जीवन,साथ सिर्फ यादें यहां।
आ गई सांझ की बेला,मिलूंगी फिर वहां अपनों से,
लेकर यहां अंतिम विदाई।
- रोशन कुमार झा
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रेत-हेत रो मेळ है,
घर कांई ओ हवामहळ है।
बडेरा मायता री संगत है,
अपणायत री रंगत है।
घर भला ही काच्चो है,
पण हेत घणों पाक्को है।
- डॉ. जितेन्द्र कुमार बोयल
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ये सिर्फ तस्वीर नहीं, एक कहानी है,
जिसमें मेहनत की अमिट निशानी है।
- सूरजमल AkS
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आशियाना अपना हो, भले वो जैसा हो,
महल हो या झोपड़ी हो, बस वो अपना हो।
- चुन्नू साहा
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यह घर मिट्टी का है,
मगर इसके भीतर एक पूरी ज़िंदगी दफ़्न है।
टूटी छत के नीचे न जाने कितने मौसम गुज़रे होंगे,
और यह बूढ़ी माँ-लाठी के सहारे-आज भी ज़िंदगी ढो रही है।
जिस उम्र में सिर पर सिर्फ़ सुकून की छाँव होनी चाहिए,
उस उम्र में अभाव अब भी उसका पीछा कर रहा है।
कुछ तस्वीरें गरीबी नहीं दिखातीं,
वे समाज की संवेदनहीनता का आईना बन जाती हैं।
- आरती कुशवाहा
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झोपड़ी छोटी है, मगर हौसले आसमान से ऊँचे हैं,
यही तो भारत के गाँवों के असली किस्से हैं।
मिट्टी का घर, हाथ में लाठी और आँखों में विश्वास,
यही सादगी तो है हमारे गाँव की सबसे बड़ी पहचान।
- बीना सेमवाल
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निशान
वक्त रुकता नहीं...
जाते जाते निशान छोड़ जाता है;
कभी चहरे पर, कभी दीवारों पर।
जिसकी चुप्पी साबित करतें हैं-
जिंदगी में सबसे बड़ा सहारा,
बूढ़ी मां और बूढ़ा घर।
- सुतपा घोष
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जर्जर बदन जर्जर आँगन।
जर्जर हुआ है आज ये मन।
कोई न साथी अंतिम सफर है,
बोझ लगने लगा है ये जीवन।
- कला भारद्वाज
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जरा जब जीवन में आए,
सहारा कोई नहीं।
घास फूस के अपनी झोपड़ी।
उसी में जीवन बिताएं।
जरा जब जीवन में आए।
- अनुरोध त्रिपाठी
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जीवन की हर तपिश को
सहकर जर्जर हुई है ये काया,
उस पर देखो ये कैसी है प्रभु की माया।
घास फूस का जर्जर सा घर,
और संग है हरे-भरे पेड़ों की छाया।
- रूचिका राय
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दादी मां मैं सबकी प्यारी,
छड़ी है मेरी सबसे न्यारी।
घर है मेरा घास-फूंस का,
सौंधी खुश्बू घर आंगन की।
- सुमन डोभाल काला
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