साहित्य चक्र

02 November 2019

सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती विशेष



सरदार वल्लभभाई पटेल जिनको लौह पुरुष के रूप में जाना जाता है।चूंकि भारत के एकीकरण में सरदार पटेल का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण था, इसलिए उन्हें भारत का लौह पुरूष कहा गया।इनका जन्म 31 अक्टूबर 1875 में हुआ।भारत के लौह पुरुष के साथ-साथ भारत का बिस्मार्क के रूप में भी जाना जाता हैं। इन्होंने आज़ादी के बाद विभिन्न रियासतों के एकीकरण में प्रमुख भूमिका निभाई और भारत के और टुकड़े होने से बचाया हैं। सरदार  वल्लभभाई  पटेल का विचार था  की,"शक्ति के अभाव में विश्वास व्यर्थ है। विश्वास और शक्ति, दोनों किसी महान काम को करने के लिए आवश्यक हैं।"

भारत की आजादी के बाद वे प्रथम गृह मंत्री और उप-प्रधानमंत्री बने।सरदार पटेल ने महात्मा गांधी से प्रेरित होकर स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया था।बारडोली सत्याग्रहका नेतृत्व कर रहे पटेल को सत्याग्रह की सफलता पर वहाँ की महिलाओं ने सरदार की उपाधि प्रदान की। भारतीय नागरिक सेवाओं (आई.सी.एस.) का भारतीयकरण कर इसे भारतीय प्रशासनिक सेवाएं (आई.ए.एस.) में परिवर्तित करना सरदार पटेल के प्रयासो का ही परिणाम है। उनके मन में किसानो एवं मजदूरों के लिये असीम श्रद्धा थी। उनका विचार था,"स्वतंत्र भारत में कोई भी भूख से नहीं मरेगा। अनाज निर्यात नहीं किया जायेगा। कपड़ों का आयात नहीं किया जाएगा। इसके नेता ना विदेशी भाषा का प्रयोग करेंगे ना किसी दूरस्थ स्थान, समुद्र स्तर से 7000 फुट ऊपर से शासन करेंगे। 

इसके सैन्य खर्च भारी नहीं होंगे। इसकी सेना अपने ही लोगों या किसी और की भूमि को अधीन नहीं करेगी। इसके सबसे अच्छे वेतन पाने वाले अधिकारी इसके सबसे कम वेतन पाने वाले सेवकों से बहुत ज्यादा नहीं कमाएंगे, और यहाँ न्याय पाना ना खर्चीला होगा ना कठिन होगा।" सरदार वल्लभभाई पटेल सिर्फ नाम के लौह पुरुष नहीं थे अपने विचारों के भी थे उन्होंने देश की रियासतों को इकट्ठा ही नहीं किया देश को उन्नति की तरफ अग्रसर भी किया है हमें उनकी जयंती के अवसर पर उनके सिर्फ याद ही नहीं करना हैं उनको विचारों को भी याद रखना हैं।वल्लभ भाई पटेल केवल आदर्श व्यक्तित्व नहीं बल्कि एक निडर, साहसी, प्रखर इंसान थे, जिन्होंने देश को एक धागे में पिरोने की भरपूर कोशिश की।वल्लभभाई भाई पटेल का विचार था।

"मेरी एक ही इच्छा है कि भारत एक अच्छा उत्पादक हो और इस देश में कोई अन्न के लिए आंसू बहाता हुआ भूखा ना रहे।" अंत में मैं उनकी जयंती पर अपनी भावांजली के साथ शत् शत् नमन करते हैं। और यही कहूंगा कि हमें उनकी जयंती के अवसर पर उनको सिर्फ याद ही नहीं करना है उनके विचारों को अपने जीवन में डालना है तभी हम एक आदर्श भारत समाज की स्थापना में अपना योगदान दे सकते हैं।


                                                            राजीव डोगरा


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