साहित्य चक्र

23 November 2019

मैं गर तारीफ करूँ तेरी

मैं गर तारीफ करूँ तेरी 



मैं गर तारीफ करूँ तेरी ।
चंद शब्द ही लिख पाऊ ।। 
सखी है मीत बड़ा चंचल ।
मैं इक गीत यही लिख पाऊ ।।


श्यामल चंचल चित मुखर है ।
वाणी मधुकर सी मधुर है ।।
नैन प्रीत की तीखी नज़र है ।
सुनी जीत की नई खबर है ।।


मैं गर तारीफ करूँ तेरी  ।
चंद शब्द ही लिख पाऊ ।।
सखी है मीत बड़ा चंचल ।
मैं इक गीत यही लिख पाऊ ।।


मृगनयनी से नयन तुम्हारे । 
हम चातक से उन्हे निहारे ।।
ईर्ष्या द्वेष नहीं किसी से ।
प्रेम से बाते की सभी से ।।


मैं गर तारीफ करूँ तेरी ।
चंद शब्द ही लिख पाऊ ।।
सखी है मीत बड़ा चंचल ।
मैं इक गीत यही लिख पाऊ ।।


तुम छोटी चंचल मतवाली सी हो ।
भोर की प्रातः ज्यो लाली सी हो ।।
तुम कदम्ब की डाली सी हो ।
मैं कोई गीत नया सुनाऊ ।।


मैं गर तारीफ करूँ तेरी ।
चंद शब्द ही लिख पाऊ ।।
सखी है मीत बड़ा चंचल ।
मैं इक गीत यही लिख पाऊ ।।


                                                             निहाल "नवल"


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