साहित्य चक्र

30 November 2019

ऊंची उड़ान भरी

मेरी माया नगरी


सुनहरे सपनो की मैंने 
एक ऊंची उड़ान भरी
जा पहुंची मैं उस लोक में
नाम है जिसका माया नगरी

शहर बसाया वहाँ पर मैंने  
सुंदर रुपहले सपनों का
रहते हो हम नील गगन में
साथ ज़मीं पर हो अपनों का

यथार्थ से करें डटकर मुकाबला
न हो कोई भी तन्हा
खुशननुमा हो प्रत्येक प्राणी के 
जीवन हर एक लम्हा

कभी न धुंधले हो 
ख्वाबों के चित्र प्यारे प्यारे
सतरंगी हो जाएं सपने
आलोकित हो मन के अंधियारे

कोई भी न फंसे कभी भी 
लोभ लालच के फेरे में
सारी कल्पनाएं साकार हो जाएं 
हर मन के चितेरे में

एक घाट पर पानी पीते
सिंह अजा बड़े प्यार से
मीठी वाणी हो मंत्र सभी का 
बैर रहे तीर तलवार से

सत्य बात कहने में न चूके 
क्या राजा क्या रानी
सबका हक हो एक बराबर 
नहीं चले किसी की मनमानी

राष्ट्र के सभी नेतागण
करें स्वच्छ स्वस्थ राजनीति 
ईमानदारी हो व्यक्तित्व में
कदापि न पनपे विष बेल रूपी अनीति

षडयंत्र खुराफाती तत्व 
सब जाएं कूड़ेदान में
रामराज्य का सपना सच हो 
हमारे देश हिंदुस्तान में 

ऐसी उज्ज्वल और मनभावन है 
मेरी माया नगरी
प्यार,सौहार्द ,भाईचारे 
और एकता की ये है गगरी

नर नारी,बड़े बुजुर्गो का 
हो समुचित मान सम्मान यहाँ
पावन वसुंधरा ही तब
बन जाए स्वर्ग समान जहां ।।

                                                    वंदना सोलंकी


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