साहित्य चक्र

13 August 2016

मेरी जन्मभूमि

हम उस मिट्टी के है, जहां देवता निवास करते है।
मेरी मातृभूमि नहीं वो, पूरे विश्व की देवभूमि है।।


गंगा-यमुना बहते जिसमें, ऊँचा जहां हिमालय हो।
नमन करु इस भूमि को,केदार सा जहां शिवालय हो।।

जहां घर - घर में गाय माता को, आज भी पूजा जाता है।
वहीं घर- घर में तुलसी माता, आज भी लगी होती है।।


जहां हर पर्वत पे देवता बैठे हो, घर-घर में गोलू पूजा हो।
मिट्टी-पत्थरों से बने मकान हो, लकड़ियों से सजा शमशान हो।।




                                                                               कवि-  दीपक कोहली

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