साहित्य चक्र

11 September 2026

आरक्षण कुमार और मेरिट ठाकुर की दोस्ती!






एक गांव में आरक्षण कुमार और मेरिट ठाकुर नाम के दो लड़के थे और दोनों ही आपस में बहुत अच्छे दोस्त थे। दोनों साथ में खेलते, पढ़ाई करते और स्कूल जाते थे। एक बार गांव में भागवत कथा का आयोजन होने वाला था। भागवत कथा की तैयारी को लेकर पूरे गांव में खुशी की लहर थी। मैरिड और आरक्षण दोनों दोस्त गांव वालों के साथ मिलकर भागवत कथा के आयोजन कार्य में जुट गए। पंडाल बनकर तैयार था और लोगों की बैठने की व्यवस्था भी पूरी हो चुकी थी। भागवत कथा का शुभारंभ हुआ और सभी गांव वाले कथा सुनने के लिए आने लगे। तभी कुछ लोगों ने गांव वालों को अलग-अलग स्थान पर बैठाना शुरू कर दिया। शुरुआत में आरक्षण और मेरिट को लगा कि यह व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया जा रहा है।

अचानक आरक्षण ने देखा और महसूस किया कि उसके समाज के लोगों को एक ही स्थान पर बैठाया जा रहा है। पहले तो उसे लगा कि यह गलती से हो गया होगा, मगर जब आरक्षण की माता कथा सुनने के लिए आई, तो उसको भी लोग ने वहीं पर बैठा दिया गया जहां पर आरक्षण के समाज के सभी लोग बैठे थे। जबकि दूसरे जगह पर काफी स्थान खाली था। आरक्षण ने यह बात मेरिट को बताई, मेरिट ने आरक्षण को समझने की कोशिश की। इसके बाद जब मेरिट ने इस विषय पर अपने समाज के लोगों से बात की, तब उसके समाज के लोगों ने मेरिट से कहा इन लोगों की जाति हमसे नीच है। इसलिए यह भागवत कथा हमारे लोगों के साथ बैठकर नहीं सुन सकते हैं।

मेरिट नहीं पलट कर जवाब दिया और कहा कि आरक्षण के समाज के लड़कों ने भी पंडाल बनाने और व्यवस्था को बेहतर करने में अपना सहयोग दिया है। फिर अंत में आप लोग इस तरह का भेदभाव क्यों कर रहे हैं ? 

मेरिट के तथाकथित ऊंच समाज के लोगों ने जवाब दिया- पंडाल बनने के बाद हमने पंडाल का शुद्धिकरण कर दिया था और उन सभी लड़कों को उसके बाद पंडाल के अंदर आने नहीं दिया। इसलिए तुम ज्यादा होशियार बनने की कोशिश मत करो, जो व्यवस्था सदियों से चली आ रही है, तुम उसको बदलने की कोशिश मत करो। अगर हमारे समाज में रहना है तो इन नियमों का पालन करना होगा। वे लोग चाहे कितना ही पैसा कमा ले, कितना ही शिक्षित क्यों ना हो जाए, मगर वे जाति के आधार पर हमसे बड़े और आगे नहीं हो सकते हैं।

मेरिट ठाकुर खामोशी से पंडाल से बाहर निकाल और आरक्षण कुमार के साथ पंडाल से दूर बैठकर भागवत कथा सुनने लगा। तभी मेरिट ने आरक्षण से कहा- दोस्त मैं तुमसे माफी चाहता हूं। मगर यह सत्य है कि हमारे समाज के लोगों ने तुम्हारे समाज के लोगों को जान बूझकर अलग बैठाया है। 

इस पर आरक्षण कुमार बोला- मित्र यह तुम्हारी गलती नहीं बल्कि हमारे समाज का दुर्भाग्य है। हमारे समाज ने यातनाएं झेली, भेदभाव झेला, अपमान सहा, मगर फिर भी कभी इस धर्म को छोड़ने के बारे में नहीं सोचा। मुझे अपने समाज की इस मूर्खता पर आज हंसी आ रही है। मित्र! बाकी आपने इस विषय को गंभीरता से लिया और अपने समाज के लोगों से बात की इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। कम से कम आप ने इस विषय को समझने की कोशिश तो की अन्यथा आपके समाज के लोग समझना तो दूर की बात, सुनना तक नहीं चाहते हैं।

मेरिट ठाकुर ने कहा- मित्र, हमारा समाज इतना संकीर्ण और मूर्ख होगा मुझे नहीं पता था। खैर! तुम मेरे मित्र हो‌‌ और हमेशा रहोगे। समाज की कोई भी बुरी ताकत हमारी इस मित्रता को खत्म नहीं कर सकती है। आज नहीं तो कल हमारे समाज को अपनी इन बुराइयों पर पछतावा होगा। इन्हीं बुराइयों की वजह से हमारा समाज कभी भी एकता के सूत्र में नहीं बंध सका है।

आरक्षण कुमार थोड़ी देर विचार करने के बाद बोला- दोस्त! मुझे नहीं पता तुम्हारे समाज की ये बुराइयां खत्म होगी या नहीं, मगर मैं इतना जरूर कह सकता हूं कि मैं इस व्यवस्था से खुद को बाहर कर लूंगा। और अपना लूंगा कोई ऐसा धर्म व व्यवस्था जहां मुझे और मेरे परिवार को सामाजिक और जातीय अपमान नहीं सहना पड़े।

मेरिट ठाकुर ने कहा- मित्र, हम सभी एक ही धर्म को मानने वाले लोग। फिर क्यों ना हम सभी को सामाजिक मंथन कर इन बुरी प्रथाओं का बहिष्कार कर बेहतर समाज की नींव डालकर आगे बढ़ना चाहिए।

आरक्षण कुमार ने मेरिट का जवाब देते हुए कहा- दोस्त यह काम मेरे समाज और जाति के लोगों का नहीं, बल्कि आपके तथाकथित ऊंची जाति के लोगों का है। बाकी हमारे समाज के लोग तो सदियों से कहते आ रहे हैं कि यह जातीय व्यवस्था मानव समाज के लिए सही नहीं है। इसी जाति व्यवस्था के कारण हमारा देश हजारों साल गुलाम रहा और तो और इसी व्यवस्था के कारण हमारे समाज के लोगों के पास ना जमीन थी, ना संपत्ति थी, ना शिक्षा थी और ना ही व्यापार था। फिर भी हमारे समाज ने विद्रोह नहीं किया और ना ही किसी बाहरी के साथ मिलकर अपने समाज के साथ गद्दारी की। 

मेरिट ठाकुर ने आरक्षण की बात सुनकर थोड़ी देर विचार किया और उसके बाद विनम्रता से कहा- मित्र तुम्हारी बातें शत-शत प्रतिशत सही है। यह हमारे समाज की मूर्खता ही है कि उसने हजारों सालों तक आपके समाज पर अत्याचार, भेदभाव और शोषण किया। मगर कभी पछतावा कर माफी मांगने के बारे में नहीं सोचा, बल्कि आज भी मौका मिलते ही शोषण, भेदभाव और अत्याचार करना शुरू कर देता है। 

मित्र! मैं मेरिट और तुम आरक्षण हो। मेरे पास सदियों से शिक्षा, संपत्ति और व्यापार पर एकाधिकार रहा है। तुम्हें तो आजादी के बाद संवैधानिक व्यवस्था कर तुम्हारी जनसंख्या के आधार पर अधिकार व हिस्सेदारी देने का एक छोटा सा प्रयास किया गया है। इस छोटे से संवैधानिक प्रयास से भी हमारा समाज घृणा और नफ़रत कर रहा है। मैं माफी के साथ कहता हूं कि भारतीय संविधान के तहत आपके समाज को मिले संवैधानिक अधिकार व हिस्सेदारी तब तक बनें रहने चाहिए, जब तक की हमारे समाज द्वारा आपके समाज के किसी भी एक व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार का जातीय उत्पीड़न, भेदभाव और शोषण किया जाता है।

आरक्षण कुमार बोला- दोस्त! काश तुम्हारी तरह तुम्हारे समाज के सभी लोग हमारी इस पीड़ा को समझ पाते और हमारे समाज की जाति व्यवस्था, उत्पीड़न और भेदभाव जैसी बुरी प्रथाओं का विरोध कर एक स्वस्थ समाज बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते। शायद! इसी जातीय व्यवस्था के कारण से हमारा देश आज भी एकता के सूत्र में नहीं बंध पाया है।


                                                         - दीपक कोहली


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