साहित्य चक्र

21 September 2026

जयदीप पत्रिका के 10 साल बेमिसाल!

जयदीप पत्रिका की साहित्य, संस्कृति और सभ्यता की खट्टी-मिठ्ठी यात्रा पर लोकप्रिय रचनाकारों की अनमोल टिप्पणियाँ-






जयदीप पत्रिका के दस वर्ष पूरे होने पर संपादक महोदय आदरणीय दीपक कोहली जी व जयदीप पत्रिका के सभी सम्मानित रचनाकारों को हार्दिक बधाई 💐

- मंजू सागर, उत्तरप्रदेश


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जयदीप पत्रिका के इस रूहानी कारवाँ के आदरणीय संस्थापक व संपादक , तमाम सरपरस्तों और सभी मु'अज़्ज़ज़ रचनाकार साथियों को पत्रिका की दसवीं सालगिरह या यूं कहे रचनाकारों की ख्वाबों की सालगिरह पर मोहब्बत-भरी मुबारकबाद।

हम सबकी यही कामना है कि यह कारवाँ यूँ ही महकता और चमकता रहे।
इस पत्रिका में महज़ रचनाओं का प्रकाशन नहीं बल्कि रूहों की सरगोशियाँ और दिलों की तर्जुमानी होती है।

और उससे भी बढ़कर मोहतरम संपादक साहब का हर रचनाकार का एहतिराम , मेरे जैसे तमाम नवरचनाकारों के हौसले को परवाज़ देता है।

पिछले कुछ साल से इस पत्रिका के साथ मेरा भी जुड़ाव रहा है इस आधार पर मैं ये कह सकता हूं कि बिना शोर-शराबे, बड़ी खामोशी से हर मौजू पर अपनी परिपक्वता हासिल की है। यह पत्रिका केवल रचनाओं का संगम नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने वाला वह घर है जहाँ हर नया सदस्य भी उतनी ही गरमी-ए-मोहब्बत पाता है जितने की पुराने ।

अफ़सोस बस इतना कि किसी वजह से मैं हमेशा उतना एक्टिव नहीं रह पाता, लेकिन जितना वक़्त मिलता है, उतना ही दिल से इस सफ़र का हिस्सा बनने की कोशिश करता हूँ, और सदा करता रहूंगा एक उम्मीद के साथ।
💐💐🙏🙏

- तौहिद अहमद, बिहार


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साहित्य का सजग दीप 'जयदीप पत्रिका'

समाज, सभ्यता, संस्कृति, शिक्षा और साहित्य के मार्ग को नवाचारों के साथ आमजन के लिए सर्वसुलभ बनाने वाली लोकप्रिय पत्रिका जयदीप पत्रिका अपने दस बसंत पूर्ण करने पर हृदय की गहराई से बधाई।

जयदीप पत्रिका अपने दशकीय यात्रा में मौलिकता एवं सृजनात्मकता रूपी प्राणों के साथ साहित्य साधना के प्रणपथ पर अविचल निरंतरता पत्रिका की गरिमा को श्रेष्ठता प्रदान करता है।🙏🙏🙏

- जितेंद्र बोयल, राजस्थान


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जयदीप पत्रिका परिवार को दस वर्ष पूर्ण होने पर हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ।

🥰🙏🥰

- राघवेंद्र प्रकाश, बिहार


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‘जयदीप’ पत्रिका के दस वर्ष पूर्ण होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।

एक दशक की यह यात्रा केवल दस वर्षों का सफर नहीं, बल्कि बदलते समय, समाज और विचारों के साथ निरंतर संवाद की यात्रा है। इस दौरान सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, भौगोलिक और तकनीकी क्षेत्रों में व्यापक एवं क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं, जिनसे हम सभी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं।

इन परिवर्तनों के बीच ‘जयदीप’ पत्रिका ने अपनी उल्लेखनीय और सराहनीय भूमिका निभाई है। इसने विभिन्न क्षेत्रों के बुद्धिजीवियों, साहित्यकारों और विचारशील लोगों के विचारों, आदर्शों एवं अनुभूतियों को एक साझा मंच प्रदान करते हुए स्वस्थ और सार्थक वैचारिक विमर्श को आगे बढ़ाया है।

समय के साथ पत्रिका ने अपने तेवर और कलेवर में बदलाव करते हुए साहित्यिक एवं वैचारिक जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।

दसवीं वर्षगाँठ पर ‘जयदीप’ को पुनः हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनाएँ।

- रोशन कुमार झा, बिहार


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जयदीप पत्रिका के दस वर्ष... एक आत्मीय शुभकामना!

जयदीप पत्रिका परिवार को दस वर्ष पूर्ण होने पर हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ।

किसी पत्रिका की यात्रा केवल वर्षों की गिनती नहीं होती, बल्कि वह उन विचारों, शब्दों और रिश्तों की यात्रा होती है, जो समय के साथ पाठकों के मन में अपनी जगह बनाते हैं।

मेरा जयदीप पत्रिका से जुड़ाव अभी लगभग 7–8 माह का ही है, लेकिन इस अल्प समय में ही मैंने इसे केवल एक पत्रिका नहीं, बल्कि समाज, साहित्य और सकारात्मक विचारों को जोड़ने वाले एक आत्मीय मंच के रूप में महसूस किया है।

यह मेरे लिए भी सुखद अनुभव है कि इस यात्रा का एक छोटा-सा हिस्सा बनने का अवसर मुझे मिला।

आभार!

- नरेंद्र मंघनानी, राजस्थान



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'जयदीप पत्रिका'
मेरे शब्दों का आत्मीय आकाश

साहित्य मेरे लिए केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि अपने भीतर की अनुभूतियों को शब्द देने की एक आत्मीय यात्रा है। जब मन में कोई भाव जन्म लेता है और वह शब्दों का रूप लेकर कागज़ पर उतरता है, तब मन को एक ऐसे मंच की तलाश होती है, जहाँ उन शब्दों को समझने और महसूस करने वाले पाठक मिल सकें। ‘जयदीप पत्रिका’ मेरे लिए ऐसा ही एक आत्मीय साहित्यिक मंच रहा है।

एक ऑनलाइन साहित्य पत्रिका के रूप में ‘जयदीप पत्रिका’ से मेरा जुड़ाव मेरे लिए विशेष अनुभव रहा है। समय-समय पर अपनी रचनाएँ इस पत्रिका को भेजना और फिर उन्हें प्रकाशित होते देखना मेरे लिए हमेशा प्रसन्नता और संतोष का क्षण रहा है। अपनी रचना को पाठकों तक पहुँचते देख ऐसा अनुभव होता है, जैसे मन का कोई अनकहा कोना दूसरों के हृदय से संवाद कर रहा हो।

‘जयदीप पत्रिका’ के दस वर्ष पूरे होना मेरे लिए भी व्यक्तिगत खुशी का अवसर है, क्योंकि इस यात्रा में मेरी रचनात्मक स्मृतियों का एक छोटा-सा हिस्सा भी जुड़ा हुआ है। इस पत्रिका ने केवल रचनाओं को स्थान नहीं दिया, बल्कि लेखकों के शब्दों को सम्मान और पाठकों तक पहुँचने का अवसर भी दिया है।

दस वर्षों की यह साहित्यिक यात्रा यूँ ही निरंतर प्रकाशमान रहे। ‘जयदीप पत्रिका’ वास्तव में साहित्य का वह दीप है, जिसकी लौ में अनेक रचनाकारों के सपने और संवेदनाएँ प्रकाशित हुई हैं।

'जयदीप पत्रिका' को दस वर्ष पूरे होने के शुभ अवसर पर असंख्य धन्यवाद ज्ञापन करती हूं एवं मेरी आंतरिक शुभकामनाएं 'जयदीप पत्रिका' की साहित्य यात्रा निरंतर चलती रहे।

- सुतपा घोष, दुर्गापुर, पश्चिम बंगाल


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नमस्ते आप सभी को 🙏

जयदीप पत्रिका का आरंभ करने वाले विद्वान दीपक जी को समर्पित हमारे अनुभव... हमारे शब्दों के माध्यम से मैं "जयदीप पत्रिका" के 10 वर्ष पूर्ण करने 10 वीं वर्षगांठ पर दीपक जी को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई देती हूं।

मुझे तो लिखना ही "जयदीप पत्रिका" ने सिखाया है, मैं करीब 4 या 5 साल से "जयदीप पत्रिका" से जुड़ी हूं और संपादक महोदय दीपक जी ने हमारा हौसला बढ़ाया। लिखने के लिए प्रेरित करना और उनका व्यवहार सारे रचनाकारों को बहुत ही उम्दा प्रस्तुति करने को प्रेरित करता है l

पत्रिका दिन प्रतिदिन अपनी प्रतिष्ठा पा रही है और एक से बढ़कर एक विद्वानों और विदुषी इस पत्रिका से जुड़ रहे हैं। ये बहुत ही खुशी की बात है क्योंकि पत्रिका तभी सम्मान पाती है, जब अच्छे-अच्छे इंसान अच्छे-अच्छे लेख पत्रिका के माध्यम से साहित्य प्रेमियों को पढ़ने को मिलते हैl

जयदीप पत्रिका दस वर्षों से लगातार निरंतर प्रकाशित हो रही है और इसी तरह प्रकाशमान हो यही कामना है और "जयदीप पत्रिका" की ये यात्रा निरंतर चलती रहे और इस पत्रिका को अपार सफलता मिलेl

मेरा व्यक्तिगत अनुभव तो बहुत ही खूबसूरत रहा क्योंकि मुझे पत्रिका के माध्यम से ही लिखना आया है संपादक महोदय जी ने हमें छोटे-छोटे टॉपिक दिए और फ़ोटो दिए जिसके माध्यम से ही लिखना आया इन्हीं अच्छी कामनाओं के साथ एक बार पुनः बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं देती हूं 🙏

- सुमन डोभाल, देहरादून


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जयदीप पत्रिका के दस वर्ष पूर्ण होने पर बधाई सभी को।

मैं तो शायद जयदीप पत्रिका से आरम्भ से ही जुड़ी हूं। इनकी निष्पक्षता की मैं कायल हूं। हर एक कवि को सम्मान देना, उनकी कविता को छापना बिना भेदभाव के तथा यू ट्यूब में समय-समय पर साक्षात्कार करवाना आदि की जिम्मेदारी जयदीप पत्रिका ने बखूबी निभाया है।

भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए मुझे बस इतना ही कहना है कि-

"मेरा इतना नाम न होता
अगर तुम न होते।
मैं जग में अनजान ही रहती,
अगर तुम न होते।"

- रत्ना बापुली, लखनऊ


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