साहित्य चक्र
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22 August 2026

छायाचित्र आधारित पंक्तियाँ पढ़िए






छोटे घरो मे बड़े दिलवाले रहते है,
उम्र गुजर रहीं इक लाठी के सहारे मग़र,
इन्ही घरों मे प्रकृति प्रेम के मतवाले रहते है।

                                                 - राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'


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घर छोड़ डोली पर यहां आई,
गुजरा जीवन,साथ सिर्फ यादें यहां।
आ गई सांझ की बेला,मिलूंगी फिर वहां अपनों से,
लेकर यहां अंतिम विदाई।

- रोशन कुमार झा


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रेत-हेत रो मेळ है,
घर कांई ओ हवामहळ है।
बडेरा मायता री संगत है,
अपणायत री रंगत है।
घर भला ही काच्चो है,
पण हेत घणों पाक्को है।

- डॉ. जितेन्द्र कुमार बोयल


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ये सिर्फ तस्वीर नहीं, एक कहानी है,
जिसमें मेहनत की अमिट निशानी है।

- सूरजमल AkS


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आशियाना अपना हो, भले वो जैसा हो,
महल हो या झोपड़ी हो, बस वो अपना हो।

- चुन्नू साहा


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यह घर मिट्टी का है,
मगर इसके भीतर एक पूरी ज़िंदगी दफ़्न है।
टूटी छत के नीचे न जाने कितने मौसम गुज़रे होंगे,
और यह बूढ़ी माँ-लाठी के सहारे-आज भी ज़िंदगी ढो रही है।
जिस उम्र में सिर पर सिर्फ़ सुकून की छाँव होनी चाहिए,
उस उम्र में अभाव अब भी उसका पीछा कर रहा है।
कुछ तस्वीरें गरीबी नहीं दिखातीं,
वे समाज की संवेदनहीनता का आईना बन जाती हैं।

- आरती कुशवाहा


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झोपड़ी छोटी है, मगर हौसले आसमान से ऊँचे हैं,
यही तो भारत के गाँवों के असली किस्से हैं।
मिट्टी का घर, हाथ में लाठी और आँखों में विश्वास,
यही सादगी तो है हमारे गाँव की सबसे बड़ी पहचान।

- बीना सेमवाल


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निशान

वक्त रुकता नहीं...
जाते जाते निशान छोड़ जाता है;
कभी चहरे पर, कभी दीवारों पर।
जिसकी चुप्पी साबित करतें हैं-
जिंदगी में सबसे बड़ा सहारा,
बूढ़ी मां और बूढ़ा घर।

- सुतपा घोष


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जर्जर बदन जर्जर आँगन।
जर्जर हुआ है आज ये मन।
कोई न साथी अंतिम सफर है,
बोझ लगने लगा है ये जीवन।

- कला भारद्वाज


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जरा जब जीवन में आए,
सहारा कोई नहीं।
घास फूस के अपनी झोपड़ी।
उसी में जीवन बिताएं।
जरा जब जीवन में आए।

- अनुरोध त्रिपाठी


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जीवन की हर तपिश को
सहकर जर्जर हुई है ये काया,
उस पर देखो ये कैसी है प्रभु की माया।
घास फूस का जर्जर सा घर,
और संग है हरे-भरे पेड़ों की छाया।

- रूचिका राय


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दादी मां मैं सबकी प्यारी,
छड़ी है मेरी सबसे न्यारी।
घर है मेरा घास-फूंस का,
सौंधी खुश्बू घर आंगन की।

- सुमन डोभाल काला


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21 July 2026

छायाचित्र आधारित पंक्तियाँ






कठिन तो है ये डगर..
लक्ष्य तक पहुँचूंगा जरूर,
चाहे भटकना पड़े दर-बदर।

   
                            - सूरजमल AkS


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मंज़िलें तुमको मुबारक! ओ मुसाफ़िर…
हम तो दरिया है चलते जाएँगे, रास्ते बनते जाएँगे।


- मोहन मीणा, जयपुर


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पेड़ की छाँव, खुला आसमान
और सफ़र का साथ,
कभी-कभी मंज़िल से ज़्यादा खूबसूरत होता है
ठहरने का एहसास।


- नरेंद्र मंघनानी


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हो साथ राजदूत का, तो मंज़िल दूर नहीं
जज़्बा हो दिल में कुछ कर गुजरने का,
तो डगर दूर नहीं।


- बाबू राम धीमान


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घर के वास्ते ही, घर छोड़ चले हैं।
अपनों की खुशियों के खातिर,
हर दर्द, खुशी से ओढ़ चले हैं।


- रोशन झा


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प्रकृति का सुन्दरतम् चेहरा देख, मन को मोह लिया,
रोक कर अपनी वाहन को, सुकून का अहसास लिया।


- चुन्नू साहा


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चला हूं ख़ोज में कि चैन पाऊं जहां,
ख़ुद से भागकर भी मगर जाऊं कहां!


- कुणाल


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अकेला ही चला था, सुकून की तलाश में,
देख कुदरत के हसीन नजारे, नजरें ठहर गई।


- प्रवीण कुमार


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कैसी विडंबनाओं का बोझ लिए खड़े हैं दोनों,
एक रुक नहीं सकता, एक चल नहीं सकता।


- स्वाति जोशी


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ईश्वर द्वारा रचित सृष्टि के सौंदर्य में मुग्ध मन को,
वापस खींच पाना बहुत ही मुश्किल है।


- अनुरोध त्रिपाठी


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"पेड़ की छाँव में बैठा हूँ, मगर सफ़र अभी बाकी है,
ख़ामोशी कह रही है, खुद से मिलना अभी बाकी है।"


- डॉ. सारिका ठाकुर 'जागृति'


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हरे भरे खेतों में पेड़ की छांव तले,
तेरा इंतजार और सामान का बोझ लिए सफ़र हुआ करता था।
जाने कहां खो गया ? कभी पहाड़ों के उस पार तेरा घर हुआ करता था।


- मंजू सागर


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आसमा ज़मी तक झुक सकता है,
चाहे तो दोपहिया रुक सकता है।
मगर जिंदगी जहां तक चलती है,
सफ़र उसी मंज़िल पे थम जाता है।


- सुतपा घोष


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02 July 2026

छायाचित्राधारित पंक्तियाँ पढ़िए- 03 जुलाई 2026






अडिग खड़ा हिमालय है, भारत का मस्तक है,
जब जी चाहे घुम्मकड़, पंहुच जाते है आग़ोश में,
कितना सुकून मिलता है, सारी थकान मिट जाती है,
ताज़ी हवा वातावरण में, जब प्रकृति में घुल जाता है।

- सुमन डोभाल काला


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उच्च हिमालय के तल पर, यह कौन खड़ा छत्र उठाए।
जैसे लगता है कान्हा, अंगुली में है गोवर्धन उठाए।

- रत्ना बापुली


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हमने अपनी पूरी सम्भावनाओं के
साथ हाथ फैलाकर देख लिए,
रे कुदरत, तेरे आगे आज भी हम छोटे हैं।
देख-सदियों से अडिग खड़ा हिमालय तेरा,
हमारे क्षणिक सर्जन के भी टोटे हैं।

- स्वाति जोशी


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हिम-शिखरों ने आज फिर, साहस का संदेश सुनाया।
जो ऊँचाइयों से प्रेम करे, उसने जीवन का अर्थ पाया।

- डॉ. सारिका ठाकुर 'जागृति'


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ख्वाहिश

काश तेरी पनाहों में एक बसेरा हो,
हर रात मै कविता लिखूं...
जब तुम सुकून से पढ़ो,
तो तसल्ली से एक सबेरा हो।

- सुतपा घोष


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महफ़िल की भीड़ में भी तन्हा था, क्या अपने क्या पराये।
तन्हाइयों में भी महफ़िल जता गये, ये पर्वतों के साये।

- कुणाल


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खुशनुमा है ये धरती और आसमान ,
आच्छादित है बर्फ से घाटियां महान।

- मनोज कौशल


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बर्फ से ढके मनमोहक पहाड़, प्रकृति की अनुपम छटा देखकर,
इस निर्जन, एकाकी स्थान पर भी हृदय आनंदित हो गया।

- प्रवीण कुमार


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ऊँचाइयों पर पहुँचकर, बस इतना एहसास हुआ,
सबसे सुंदर मंज़िल, अपने ही भीतर मिली।

- नरेंद्र मंघनानी


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शहर की उदासी से, जेब की लाचारी से, भाग चलें कही दूर हम।
नदी किनारे बैठ कर, पर्वत से लग कर, छोड़ दे सारे दुःख, दर्द और गम।

- प्रणव राज


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एक दूसरे को निहार रहे,
कौन ? कितना पिघल रहे।

- जितेंद्र बोयल


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दुनियां से दूर, खुद के पास, जहां है अपनी ही तलाश।
कितना मीठा, कितना सुखद, है यह मन का एहसास।

- रोशन झा


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धवल हिमगिरी शिखर की तलहटी में पलता जीवन मोती,
गगन चुंबी तरुवर की छाया में हो प्यारी सी कुटिया।
उसके रक्त चन्दन से छत के नीचे खड़े होकर,
मैं निहारु असली मोती, मैं निहारु असली मोती,
असीम मिलती शान्ति जहां, हर वक्त विचरण करता रहूँ वहां।

- बाबू राम धीमान


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24 November 2025

धर्मेंद्र जी को समर्पित पंक्तियाँ पढ़िए

🙏🏻 धर्मेंद्र जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि 🙏🏻






आपकी मुस्कान में सिनेमा की शान बसती थी,
आपके जाने से एक युग की गर्माहट चली गई।

- आरती कुशवाहा

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सिनेमा जगत की एक महान हस्ती
छोड़ गया संसार
जाने वाले कभी न आते
पर आती उनकी याद

- रत्ना बापुली

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भोर का सितारा कभी नहीं मरता, बस अपना स्थान बदल लेता है।
वो मिटता नहीं बल्कि इक दूसरे चमकते सितारे को जन्म दे जाता है
और अपने पीछे एक सुनहरी छाप छोड़ जाता है।

- रजनी उपाध्याय

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🙏🏻विनम्र श्रद्धांजलि 🙏🏻

अभिनय का इक युग बसा,धर्मेंद्र के नाम,
जिंदादिल व्यक्तित्व थे,उम्दा हरदम काम।
एक्शन गाने नृत्य से, किया सभी दिल राज,
अभिनय के सिरमौर थे, हमको तुम पर नाज़।

- डॉ प्रतिभा गर्ग

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हमसे मोहब्बत करने वाले रोते ही रह जाएँगे
हम जो किसी दिन सोए तो फिर सोते ही रह जाएँगे

- मुरा

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यूं जाना जैसे एक युग का मिट जाना
आपकी सादगी बनी रहे जेहन में आप सदा याद आना।

- मनोज कौशल

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तुम्हारा रोल देख कर खुश होते थे सभी,
सोए आज गहरी नींद में न उठेंगे कभी,
भगवान अपने चरणों में स्थान दे तुम्हें,
दुःख पहुंचा हमें इतना न भूला पाएंगे तुम्हें।

- बाबू राम धीमान

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दिलो में राज तो बहुत किया हैं
चलचित्रों में आवाज तो बहुत किया है
जिन्दगी से अब गिला क्या
इनके कर्म पे दुनिया ने नाज तो बहुत किया हैं
प्रकृति ने अपने गोंद में समा लिया
पर इनके चाहने वाले को नाराज़ तो बहुत किया है

- सदानंद

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हमारे ही-मैन, हमारे प्यारे वीरू,
हमारे दिलों की धड़कन धरम-पाजी शरीर भले छोड़ गए हमारे
हृदय में, हमारी यादों में रहेंगे हमेशा...

- प्रवीण कुमार

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जय और वीरू की जोड़ी को भूले नहीं भूल सकते
आज भी शोले फिल्म देखने से नहीं थकते।
आपका रोमांटिक अभिनय सबको भाया
पर जोशिले रुप की फिल्म देखने में मजा बहुत आया।
अभिनय आपका भूलाए नहीं भूलेगा,
श्रद्धांजलि में हर कोई आज यही कहेगा।

- विनोद वर्मा


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बीज पौधा बनता है, पौधा पेड़ बनता है
और एक सदी के बाद, पेड़ ढह जाता है।

- दीपक कोहली