साहित्य चक्र

06 September 2016

-उत्तराखंड की पहली गीतकार -

      -उत्तराखंड  की पहली गीतकार -

जी हां जब से उत्तराखंड बना है। तब से कई लोगों ने राज्य के बारे में बहुत कुछ लिखा है। लेकिन आज तक किसी ने इस गायिका के बारे में ज्यादा कुछ नहीं लिखा है। जी हां ये प्रदेश की पहली गीतकार थी।
 क्या कभी आपने सोचा या जानने की कोशिश की कि हमारे राज्य का पहला संगीतकार कौन है..? तो आज मैं आप बताऊंगा की हमारी पहाड़ की पहली गीतकार कौन थी...? जिन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया और जिन्होंने हमारी बोली को एक पहचान दी। जिनका नाम श्रीमती कबूतरी देवी है। जो उत्तराखंड जिला पिथौरागढ़ की मूनाकोट तहसील की क्वीतड़ गांव की रहने वाली थी। जिन्होंने 70-80 के दशक में पहाड़ी गीतों  को पहचान दी। इनके गीतों में इनका एक प्रमुख गीत "आज पनि झां-झां, भोल पनि झां-झां" है। इन्हें राज्य का 'तीजन बाई ' भी कहते है। 70 के दशक में कबूतरी देवी जी ने पहली बार गांव से सीधे स्टूडियो पहुंचकर रेडियो जगत में अपने गीतों की धूम मचाई। वैसे देवी जी ऋतु आधारित गीत ज्यादा गाया करती थी। इनके पति श्री दिवानी राम इनकी काफी मदद करते थे। देवी जी ने लगभग 100 से ज्यादा गाने गाए है। जिन्हें उस समय एक गीत के लिए 25 से 50 रुपये मिला करते थे। सबसे पहले इनके गीत लखनऊ आकाशवाणी से प्रसारित हुआ और कुछ समय बाद मुंबई, नजीबाबाद, रामपुर से भी प्रसारित होने लगे। वर्ष 2002 में इन्हें पिथौरागढ़ के नवोदय पर्वतीय कला केंद्र और अल्मोड़ा लोक संस्कृति कला व विज्ञान शोध समिति ने भी पुरस्कारित किया। देवी जी ने अपने पति की मृत्यु के बाद गाना बंद कर दिया। जिसके बाद वे एक सामान्य जीवन जीने लगें। कहां जाता है कि इन्हें उतनी पहचान इस लिए नहीं मिली क्योंकि देवी जी एक दलित (एससी) परिवार से संबंध रखती थी। जो भी देवी जी ने हमें एक नई पहचान दी। इसके लिए मैं देवी जी को शत्-शत् नमन करता हूं।


                                                                 संपादक - दीपक कोहली 

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