साहित्य चक्र

16 December 2025

विजय दिवसः भारतीय सेना के शौर्य का प्रतीक


हर वर्ष 16 दिसंबर को हमारा देश विजय दिवस के रूप में भारतीय सेना के शौर्य को याद करता है। 16 दिसंबर 1971 का इतिहास हमारे देश के लिए एक महत्वपूर्ण दिवस के रूप में याद किया जाता है। इस दिन हमारी सेना ने पाकिस्तान को युद्ध में धूल चटाई थी। यह ना केवल एक सैन्य शक्ति का प्रदर्शन था, बल्कि मानवीय मूल्यों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता की भी पुष्टि करती है।





यह दिन हमारे हमें हमारे उन वीर सैनिकों के बलिदान और वीरता का स्मरण करता है, जिन्होंने हमारी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। इस युद्ध में हमारे 3900 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए और करीब 10 हजार सैनिक घायल हुए। मगर दुश्मन देश के हजारों सैनिक को घुटनों पर ला दिया। पूर्वी पाकिस्तान के सैन्य कमांडर लेफ्टिनेंट जरनल एएके नियाजी ने भारत के पूर्वी सैन्य कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के समक्ष 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों के साथ आत्मसमर्पण किया था।

इस युद्ध को भारत-पाक का तीसरा युद्ध भी कहा जाता है। यह युद्ध 3 दिसंबर से 16 दिसंबर 1971 तक चला और ढाका में पाकिस्तानी आत्मसमर्पण के साथ विराम हुआ था। माना जाता है कि इस युद्ध में 30 लाख से अधिक लोगों की जान गई और करीब 1 करोड़ से अधिक इस युद्धा के कारण बांग्लादेश से निर्वासित हुए। इस युद्ध की शुरुआत पाकिस्तान द्वारा भारत के हवाई अड्डों पर पूर्व-नियोजित हवाई हमलों से की गई। भारत द्वारा पाकिस्तानी आर्मी के आत्मसमर्पण एवं पाकिस्तान के दो टुकड़े कर बांग्लादेश के रूप में नया देश बनाकर युद्ध को समाप्त किया गया।






इस युद्ध में भारत में पाकिस्तान के दो टुकड़े किए और पश्चिम में लगभग 15000 किलोमीटर (5795 वर्ग मील) भूमि पर कब्जा किया था। मगर सद्भावना के प्रतीक के रूप में शिमला समझौते में पाकिस्तान को वापस कर दी गई। जबकि भारत ने जम्मू-कश्मीर में 883 किलोमीटर (341 वर्ग मील) और पाकिस्तान ने 150 किलोमीटर (59 वर्ग मील) क्षेत्र को अपने पास बरकरार रखा।

इस युद्ध को जीतने में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, रक्षामंत्री सरदार स्वर्ण सिंह, फील्ड मार्शल सैम होर्मुसजी फ्रामजी जमशेदजी मानेकशॉ (सैम बहादुर), पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा, नौसेना के पश्चिमी कमान के ध्वज अधिकारी कमान-इन-चीफ एडमिरल सौरेंद्र नाथ कोहली, पूर्वी नौसेना के कमान के ध्वज अधिकारी कमान-इन-चीफ वाइस एडमिरल नीलाकांत कृष्णन और हजारों सैनिकों की अहम भूमिका रही थीं।


- मन्नत रंधावा



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