साहित्य चक्र

27 January 2022

कविताः तेरे जाने के बाद


खुद को पहचानने लगे हैं अब हम,
खुद को जानने लगे हैं अब हम,
खुद से खुद को खुश करने लगे हैं अब हम,
तेरे जाने के बाद खुद को बदलने लगे हैं अब हम,

खुद की वजूद से रुबरू होने लगे हैं हम,
सबको नजरअंदाज कर आगे बढ़ने लगे हैं हम,
जिंदगी में बहुत परिवर्तन होने लगें हैं है अब
तेरे जाने के बाद तेरा ही नाम भूलने लगे हैं अब हम,

दुनिया की हकीकत से वाकिफ होने लगें हैं अब हम,
खुद को सपनें को पूरे करने की उड़ान भरने लगे है अब हम,
दर्द को खुशियों में बदलने लगें हैं अब हम,
तेरे जाने के बाद अपनी एक पहचान बनाने लगे है अब हम,


लेखिकाः मनीषा कुमारी 


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