साहित्य चक्र

01 December 2018

कश्मीर की अमन-अशांति...?



कश्मीर में  अमन और शांति को लेकर आतंक को खत्म करने के प्रयास जारी है..। लेकिन फिर भी कोई रास्ता नहीं निकल पा रहा है..। केन्द्र से लेकर विपक्ष के कई राजनेता कश्मीर का दौरा कर चुके है..। लेकिन फिर भी हालात वहीं के वहीं धरे है..। कभी सेना पर पत्थरबाजी होती है तो, कभी पटाखे और गोलाबारी...। जिससे यह साफ होता है,  कश्मीर के हालात अभी भी गंभीर है..। 


जहां एक ओर केंद्र की मोदी सरकार कई बड़े-बड़े दांवे करती नज़र आती है...तो , वहीं कश्मीर के हालातों से यह साफ हो जाता है, कि कश्मीर मेंं शांति नहीं है..। कभी भारत के हार पर जश्न मनाया जा रहा है, तो कभी सेना के विरूद्ध नारेबाजी...। फिर भी हमारे राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी रोटियां सेंकने में लगी हुई हैं..। 

हर रोज सेना का कोई-ना-कोई जवान कश्मीर में शहीद होता है..। हमारे राजनेता और सरकारें चंद रूपये देकर शहीद के परिवार को चुप कराने की कोशिश करने लगते है..। शहीद का परिवार चंद रूपये लेकर चुप तो हो जाता है..। लेकिन कब तक ऐसा ही चलता रहेगा..। आखिरकार कितने और हमारे जवान शहीद होंगे..? अब वक्त आ गया है...फैसला करने का... या तो आर या फिर पार..। 




सरकारों और राजनीतिक पार्टियों को कश्मीर में ठोस कदम उठाने होंगे..। चाहे आपातकाल लागू करके उठाएं..। हम साथ है केंद्र सरकार के हर फैसले पर..। 

जहां एक ओर पीएम नरेंद्र मोदी अपनी विदेश यात्रायों का सफर रोकने का नाम नहीं ले रहे है..। तो वहीं पीएम मोदी हर महीने किसी ना किसी विदेश दौरे पर रहते है...। जो समझ से परे है...। मुझे पीएम मोदी की विदेश यात्राओं से कोई आपत्ति नहीं है.. । बस हमारे सेना के लिए कुछ अहम कदम उठा लें..। जो हर रोज अपनी जान गंवाते है..और देश की सेवा करते है..।
कश्मीर ही नहीं कई जगहों पर सेना के जवान अपनी जान गंवाते है..। चाहे फिर वो दार्जिलिंग ही क्यों ना हो...या फिर नक्सली इलाके..। 



                                            


                                                            संपादक- दीपक कोहली



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