साहित्य चक्र

09 October 2017

* सड़क सुरक्षा *




सड़क सुरक्षा


तुम हैल्मेट पहन के जाओगे,तो क्या घट जायेगा!
 मेरे सजना रूल ट्रैफिक के ये कौन निभाएगा
कहना मानो राजा ज़ी रिश्ता तब ही निभ पायेगा!
मेरे सजना रूल ट्रैफिक के ये कौन निभाएगा।

सुना है मैने लापरवाही , हद से कर जाते है!
कितने घरोँ के दीपक ऐसे सडकों पे बुझ जाते है!
महंगी जाती है जल्दी ,जो भी कर जायेगा!
मेरे सजना रूल ट्रैफिक के ये कौन निभाएगा।

चुड़ी और सिन्दुर मुझको प्राणो से भी प्यारे है!
रखना हरदम याद हमें दिन इंतजार में गुजारे है!
देखेगें तब तक रस्ता,जब तक तु न आएगा!
मेरे सजना ट्रैफिक के ये कौन निभाएगा।

हर जगह है नाका बन्दी,हर जगह पर पुलिस खड़ी!
सड़क सुरक्षा जिम्मेदारी हम सब की है हर घड़ी!
जागो और जगाओ फिर वक्त न हाथ में आएगा!
मेरे सजना रूल ट्रैफिक के ये कौन निभाएगा।

हाथ जोड़कर विनती है रूल ट्रैफिक मत तोड़ो!
जिन्दगी मिली है एक बार तुम इससे मत तोड़ो!
कहे सुमन घमण्ड न करना मिट्टी में मिल जायेगा!
मेरे सजना रूल ट्रैफिक के ये कौन निभाएगा

                                                                 


                                     (सुमन जांगड़ा हांसी हिसार)


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