साहित्य चक्र

18 July 2020

जाने दो....



नदिया   हूं ,  बह   जाने   दो ,
कल - कल  करके आने दो ।
अविरल - प्रवाह बह जाने दो,
मुझे लहरों में  मुस्कुराने  दो।।
नदिया हूं, बह जाने दो .......

जग की सब प्यास बुझाने दो,
सबका  तर्पण   करवाने  दो ।
मुझे जीवन  अमृत  बनाने दो,
सबके अवसाद धुल जाने दो।।
नदिया हूं, बह जाने दो .......

मिलकर "श्रेष्ठ" संगम बनाने दो,
सागर की बाहों में समाने दो ।
मुझे कण कण में रम जाने दो,
मुझे गगन में मेघ बन जाने दो।।
नदिया हूं , बह जाने दो .......

मुझे बूंद  बन  बरस  जाने  दो,
सबकी  अग्नि को  बुझाने दो।
यश  मंगल - कीर्ति  बनाने  दो,
सबके मन में मुझे घूल जाने दो।।
नदिया हूं बह जाने दो ........

                                 यशवंत राय श्रेष्ठ


"डॉक्टर"



पेशेंट के लिए तो खुदा और भगवान है डॉक्टर
हर बीमारी का सोलुशन और समाधान है डॉक्टर

ओ.पी.डी. हो या आई.पी.डी. करते है 24 घण्टे ये काम
डॉक्टर ही है दुनिया में भगवान का दूजा नाम


इनके पास आकर होता हैं हर शख्स एक समान
ना अमिर ना गरीब ना धर्म का कोई नाम

डॉक्टर की एक दवा से कोई भी बीमारी भाग जाती हैं
पेशेंट के ठीक होने पर सारी खुशी साफ नजर आती हैं


डॉक्टर हि है जो समजते है हर इंसान कि जान का मोल
चाहे दिन हो या चाहें रात निभाते है ये अहम रोल

इंसानियत की सच्ची मिशाल हैं डॉक्टर
हर लाईलाज सी बीमारी का ईलाज है डॉक्टर


ना कोई संडे ना छुट्टी है इनको प्यारी
पेशेंट को ठीक करने में लगाते है जान सारी

गले में स्टेथोस्कोप ओर पहनते हैं ये सफेद कोट
इनका ध्यान होता है कैसे करे हर डिसीज़ बायकॉट


सर्दी गर्मी बारिश में भी करते है जो अपना काम
उस डेरिंग ओर फीयरलेस पर्सन का डॉक्टर है नाम


                                  साहिल मोहम्मद


डिपेरशन क्यों होता है


डिप्रेशन क्यों होता है? यह बहुत ही विचारणीय प्रश्न  है जब कोई दुखो में डूब जाता है, सारी  दुनिया उसे काली लगने लगती है, तब  व्यक्ति को कुछ भी अच्छा नहीं लगता है। अवसाद का अर्थ मनोभावों से सम्बन्धी दुःख से होता है। अधिकतर यह देखा गया की जो प्रेम में ज्यादा डूबा है, और उसे उसका प्रेम नहीं मिला है, तो वह अवसाद में डूब जाता है। अवसाद की अवस्था में व्यक्ति स्वयं को लाचार समझता है, प्रेम ही नहीं वरन आज की परिस्थियों को देखते हुए बहुत सारे  कारण  अवसाद के होते है। अवसाद के कारण   नींद  नहीं आती है। विश्व सवास्थ्य संगठन के अनुसार अवसाद बहुत सामान्य बीमारी है। इस बीमारी का समय ६-८ महीने रहता है, अगर आपके किसी बहुत प्रिय की मृत्यु हो जाये और आप दुखी है, तो यह स्वाभाविक प्रक्रिया है, और उसके दुःख में आप बहुत भावुक रहते है तो आप अवसाद का शिकार होते है। अगर आप जीवन में खालीपन महसूस कर रहे है तो अवसाद में है एक सर्वे के अनुसार महिलाओ को  जल्दी अक्साद होता है पुरुषो के अपेक्षा मानसिक रोग पागलपन नहीं है।

          जब कोई अवसाद का शिकार हो तो उसे गाना  सुनना चाहिए, मस्ती करनी चाहिए। जीवन के हर क्षण  का मजा लेना चाहिए, उसे कभी अकेले नहीं रहना चाहिए। उसे प्रकृति से बात करनी चाहिए। जीवन के हर छड़ में आनद की अनुभूति करनी चाहिए सामाजिक मेल जोल जयादा बढ़ाना चाहिए नकारात्मक लोगो के पास नहीं रहना चाहिए सुबह शाम धूप  लेनी चाहिए कसरत करने से भी अक्साद दूर होता है आप जितना मस्त रहेंगे उतना ही अवसाद से दूर रहेंगे संतुलित आहार में अगर आप विटामिन डी लेते है तो बहुत अच्छा रहता है शराब और ऐसी कोई बस्तु से दूर रहे जो हानि पहुँचती हो खुद को दोष न दे जिंदगी बहुत ख़ूबसूरत है और एक ही बार मिली है तो मस्त रहे और  सबसे बड़ी बात  अपने व्यस्त रखे जितना व्यस्त आप होंगे उतना ही कुछ सोच नहीं पाएंगे और ज्यादा से ज्यादा लोगो से मिलिए और हर समय सीखिए।

            दुनिया से जुड़ीये हर किसी से सकारत्मक बात करिए अपने जो करीबी उनसे बात करीये बच्चो के साथ मस्ती करे अपना बचपन याद  करे कभी कभी उनकी तरह हरकत करे अवसाद बहुत दूर हो जायेगा जिनगी बहुत कीमती है उसे खुशहाल रखे दुनिया में कुछ नहीं रखा है और न ही आप धन दौलत अपने साथ ले जाने वाले है जब शरीर आप साथ नहीं ले जा सकते तो बाकि क्या ले जा पाएंगे जो कुछ आज है अभी है कल किसने देखा है तो दूसरो को ख़ुशी  देने के बाद जो मन को संतुष्टि मिलती है वो बहुत धन दौलत में नहीं मिलती है यदि आपने कभी कोई पुरस्कार पाया है उस लम्हे को याद करीये आप अपने आत्मविश्वास को कभी कम मत करीये आप हमेशा यह सोचे की मुझसे अच्छा कोई नहीं है इस दुनिया में आप अपने को पहचाने अपनी क़ाबलियत को पहचाने और धीरे धीरे अपना काम दुबारा शरू करे आप कभी अवसाद में नहीं आएंगे।

                                                                                           
                                                                       गरिमा 



शिव



शिव जीवन है।
शिव मरण है।
शिव सत्य है।
शिव सनातन है।

शिव ओ३म है।
शिव वेद है।
शिव विधान है।
शिव गीत है।
शिव नाद है।

शिव धरा है।
शिव व्योम है।
शिव नदियां है।
शिव महासागर है।
शिव शिला है।

शिव शिखर है।
शिव रस है।
शिव स्वाद है।
शिव वन है।
शिव मन है।

शिव ज्ञान है।
शिव विज्ञान है।
शिव  शक्ति है।
शिव भाक्ति है। 

शिव प्रश्न है।
शिव उत्तर है।
शिव साकार है।
शिव निराकार है। 


                  @प्रीति शर्मा"असीम"

04 July 2020

सफर से वास्ता नहीं



लकीरें कुछ कहती है
अगर पढ़ सको तो पढ़ों
किस्मत में लिखा होता है
उस पाने लड़ सको तो लड़ो
टेढ़ी मेढ़ी चलती हैं वो 
कोई सीधा रास्ता नहीं
मंजिल का नाम बताती
पर सफर से वास्ता नहीं
हथेली में उनका जाल बुना है
सबने अपना काम चुना है
कोई भविष्य की नौकरी बताएं
किसी को बच्चों की चिंता सताए
कोई उम्र का गान सुनाएं
कोई अपने कर्म गिनाए
अगर पढ़ सको तो पढ़ लेना
यह सब राज हमारे बताएगी
वर्तमान में रहकर वह तो
भविष्य से परिचय कराएगी

                                      नीलेश मालवीय “नीलकंठ”