साहित्य चक्र

05 July 2026

योग धर्म नहीं विज्ञान हैं, मन की शांति योग से ही संभव


यूं कहे तो योग धर्म नहीं बल्कि विज्ञान जगत हैं। योग में ये शक्ति है की ये हमारे शरीर, मन एवम आत्मा को जोड़ने का विधान है। योग सम्पूर्ण मनुष्य के शरीर, मन एवम आत्मा को ऊर्जा, तागद एवम सौंदर्य प्रदान करता है। योग से कई प्रकार की चीजे निकल कर आई है अगर मनुष्य द्वारा रोज इस मूल्यवान विधान को अपना लिया जाए तो मनुष्य को कई रोगों से छुटकारा मिल सकता है।





योग का अर्थ है अपने आप को ऊर्जा में समाहित करना, उससे जोड़ना। अगर मानव में प्रतिदिन योग करने की चाहत हो जाए तो यू मान लीजिए की वह अपने स्वास्थ्य जीवन और सौंदर्यता को प्राप्त कर ही लेगा। रोगमुक्त जीवन जीने के लिए हर व्यक्ति को इस भागदौड़ रूपी जिंदगी से कुछ समय निकालकर योग करने की आदत डालने की आवश्यकता है।

आध्यात्मिक प्रगति के तरफ मनुष्य की झुकाव हो इसके लिए योग एक अनिवार्य चीज़े बन चुकी हैं। अवसाद को दूर करने के लिए योग एक वरदान से कम नहीं है।

आत्मा से जुड़ने के लिए योग दर्शन परम आवश्यक है।स्वयं को बदलने से ही इस अलौकिक विश्व में बदलाव आएगा एवम योग से ही जीवन सुखमय होगा। जिनके शरीर और मन स्वस्थ नहीं होते हैं उनके मस्तिक में चेतना और काया में फुर्ती नाम मात्र ही होती है। अगर आप अशांत है एवम आपका किसी काम में मन नहीं लगता है तो योग जरूर अपनाएं।

सफलता तो तीन चीजों में ही आधुनिक संसार में मापी जाती रही हैं दौलत सोहरत और शांति एवम शांति हमेशा योग से ही मिलता है। अपने व्यक्तिगत कमियों पर चिंतन करना और खामियों को दूर करने के लिए योग का रास्ता तालशना होगा।


- दीपक कुमार सिंह

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