साहित्य चक्र

12 April 2026

युवाओं में सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव


लगातार सोशल मीडिया पर लगे रहने की आदत की तुलना तंबाकू की लत से की गई है। सोशल मीडिया की लत की समस्या का समाधान आसान नहीं है। केवल अदालत द्वारा प्रतिबंध लगाने से यह लत खत्म हो जाएगी, ऐसा मानना सही नहीं है। कैलिफोर्निया की अदालत ने मेटा और अल्फाबेट जैसी बड़ी तकनीकी कंपनियों से कहा है कि वे जानबूझकर ऐसे फीचर्स बनाती हैं, जो युवाओं को ऑनलाइन बने रहने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इंस्टाग्राम, स्नैपचैट आदि को इस तरह डिजाइन किया गया है कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे (और यहां तक कि बड़े लोग भी) फोन नीचे रखने का मन नहीं करते।


फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप तीनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा के पास हैं, जबकि यूट्यूब और गूगल अल्फाबेट के पास हैं। मेटा और अल्फाबेट दोनों ही ऐसे फीचर्स डालते हैं, जो किशोरों को आकर्षित करते हैं और धीरे-धीरे उन्हें इसका आदी बना देते हैं। इसके परिणामस्वरूप वे अवसाद और निराशा का शिकार हो जाते हैं तथा किसी भी काम में एकाग्रता नहीं रख पाते।

सोशल मीडिया की लत की तुलना तंबाकू की लत से की गई है। मेटा और अल्फाबेट की कमाई अरबों डालर में होती है। 2025 में अल्फाबेट की शुद्ध आय 132 बिलियन डालर थी, जबकि मेटा की शुद्ध आय 60.46 बिलियन डालर थी। एक 20 वर्षीय युवती के बिगड़े मानसिक स्वास्थ्य के लिए मेटा और अल्फाबेट को जिम्मेदार ठहराते हुए कैलिफोर्निया की अदालत ने दोनों कंपनियों पर कुल 6 मिलियन डालर का जुर्माना लगाया। हालांकि सच्चाई यह है कि इतनी बड़ी कंपनियों पर 6 मिलियन डालर का जुर्माना कोई खास असर नहीं डालता।




अदालत ने कहा कि जुर्माने की राशि महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इन कंपनियों को कानून के दायरे में लाना जरूरी है। 16 वर्ष से कम उम्र के नागरिकों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने वाला आस्ट्रेलिया पहला देश बना है। वहां 16 साल से कम उम्र के बच्चे टिकटॉक, फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, स्नैपचैट और थ्रेड्स का उपयोग नहीं कर सकते। वे नए अकाउंट नहीं बना सकते और उनके पुराने अकाउंट भी निष्क्रिय कर दिए गए हैं।

कुछ सोशल मीडिया कंपनियां अन्य नामों से सेवाएं शुरू करके युवाओं को आकर्षित करने की कोशिश करती हैं, लेकिन आस्ट्रेलिया इस पर कड़ी निगरानी रख रहा है। दुनिया के अन्य देश भी आस्ट्रेलिया के इस कदम के प्रभाव पर नजर रख रहे हैं, क्योंकि सभी देश अपने युवाओं को सुरक्षित रखना चाहते हैं।

आस्ट्रेलिया के इस प्रतिबंध का उद्देश्य युवाओं को सकारात्मक सोच और रचनात्मक कार्यों की ओर प्रेरित करना है। इससे वे स्क्रीन पर कम समय बिताएं और उनका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बना रहे। 2025 में किए गए एक अध्ययन के अनुसार 10 से 15 वर्ष के 96 प्रतिशत बच्चे मोबाइल का उपयोग करते हैं और हानिकारक सामग्री देखते हैं। किशोरों में अत्यधिक जिज्ञासा होती है और वे जानना चाहते हैं कि उनके माता-पिता या बड़े मोबाइल पर क्या देखते रहते हैं।




आजकल तीन साल के बच्चे भी अपने दादा-दादी से बेहतर मोबाइल चला लेते हैं। कई बच्चे साइबर बुलिंग का शिकार भी होते हैं। छोटे बच्चों को मोबाइल की ओर आकर्षित करने में उनके परिवारजन ही जिम्मेदार होते हैं। बच्चों को शांत रखने के लिए उनके हाथ में मोबाइल दे दिया जाता है। इसलिए बचपन से ही बच्चों को मोबाइल से दूर रखकर उन्हें आउटडोर खेलों की ओर प्रेरित करना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले परिवार के लोगों को खुद मोबाइल का कम उपयोग करना चाहिए।

भारत में भी सोशल मीडिया की लत बड़े पैमाने पर देखी जा रही है। अक्टूबर, 2025 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में फेसबुक के 403 मिलियन, इंस्टाग्राम के 481 मिलियन और यूट्यूब के 500 मिलियन सक्रिय उपयोगकर्ता हैं। इसलिए आस्ट्रेलिया की तरह भारत में भी 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता है।


- अनिकेत सिंह



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