साहित्य चक्र

27 April 2026

हीट वेव की मार, क्या करें सरकार!



उफ्फ! ये गर्मी मार ही डालेगी। इन दिनों इस वाक्य को देश का हर नागरिक दोहरा रहा है। गर्मी ने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सरकार को हाई अलर्ट जारी करना पड़ रहा है। आम नागरिक जो रिक्शा चलाता है, मजदूरी करता है और कारखानों में काम करता है, उसके लिए एक और चुनौती पहाड़ की तरह खड़ी है। कड़ाके की ठंड और गर्मी की मार सिर्फ आम नागरिकों पर पड़ती है। इसलिए किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि हमारा देश में आम नागरिकों की समस्या कोई बड़ी समस्या नहीं होती है।




विकास के नाम पर कभी हम हसदेव के जंगलों को तो कभी उत्तराखंड और महाराष्ट्र के जंगलों को काट देते हैं। सरकार के आंकड़े बताते हैं कि पिछले 10 सालों में देश में वनों की संख्या में तेजी से गिरावट आई है। इतना ही नहीं विकास के लिए हम सड़कों के आसपास वाले जो पेड़ काटते हैं, उनके बदले में जो पौधे लगाने चाहिए, वह लगते तो है, मगर उनमें से एक या दो प्रतिशत पौधे ही पेड़ बन पाते हैं। इस विषय पर अब हमारी सरकारों, राजनेताओं और आम जनता को गंभीरता से सोचना होगा। नहीं तो वह बहुत समय दूर नहीं जब गर्मी के कारण लोग मरने लग जाएंगे और गर्मी एक आपात स्थिति पैदा कर सकती है।

बतौर नागरिक हमें अपने आसपास के पेड़ों को काटने से बचना होगा। इसके अलावा अपने समाज, अपने गांव, मोहल्ले में एक मुहिम चलानी होगी, जिसके तहत वृक्षारोपण हो और उन पौधों को संरक्षण प्रदान कर उन्हें समय पर खाद व पानी देकर पेड़ में बदलना होगा। इतना ही नहीं बल्कि विवाह, नामकरण जैसे शुभ कार्यों में भी वृक्षारोपण और वृक्ष दान देने की परंपरा शुरू करनी होगी। धार्मिक यात्रा, मूवी देखना इत्यादि फिजूल खर्च करने से बेहतर है कि उन पैसों से अपने गांव में रह रहे किसी रिश्तेदार या दोस्त से 10 पेड़ अपने परिवार के नाम से लगाने के लिए कहिए और उसको 3-5 साल तक हर महीने ₹200-300 भेजिए। और समय-समय पर उन पौधों की फोटो मंगवाए।

केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को पर्यावरण को लेकर विशेष योजना बनाने की जरूरत है। वक्त रहते अगर इस पर सरकारें काम नहीं करेगी तो हमारे पास विकास, संसाधन सब होगा, मगर सांस लेने के लिए ऑक्सीजन और पर्यावरण नहीं होगा। आधुनिकता के इस दौड़ में कितना भागोगे और संसाधनों की खरीद कब तक करोगे ? कम से कम अपने क्षेत्र, राज्य, देश का पर्यावरण और प्रकृति को बेहतर बनाने के लिए हम सभी को साथ में आकर सोचा होगा। नहीं तो हीट वेव का शिकार हम सभी होंगे और इससे हमारा जीवन प्रभावित होगा।


                                                       - दीपक कोहली


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