साहित्य चक्र

17 February 2017

आज का साहित्य बाजार-

 आज का साहित्य बाजार-


अगर किसी देश की संस्कृति और सभ्यता जाननी हो तो, वहां का साहित्य एक बार जरूर पढ़े। क्योंकि साहित्य से हम किसी भी देश की संस्कृति जान सकते है।  वहीं अगर आपने किसी देश का रहन-सहन, वातावरण के बारे में जानना हो तो, आप वहां के साहित्य से जान सकते है। साहित्य ही एक ऐसा माध्यम है, जिसके द्वारा हम किसी भी देश के बारे में जान सकते है। वहीं अगर आज की साहित्य की बात करें तो, आज का साहित्य कहीं खो सा जा रहा है। जिसका मुख्य कारण सोशल मीडिया को माना जा रहा है। इसका कारण यह है, कि आजकल के युवा या कहे लोगों में साहित्य के प्रति रुचि नहीं है। आजकल के युवा या लोग इंटरनेट, मोबाइल आदि का प्रयोग ज्यादा कर रहे है। जिससे उनमें साहित्य के प्रति कोई लगाव देखने को नहीं मिलता। जो हमारे समाज के लिए चिंता का विषय है। जहां एक समय था जब साहित्य से विचार, संस्कार पैदा किए जाते थे। आज वहीं साहित्य संघर्ष कर रहा है। अगर बात करे साहित्य की तो, एक कोरे कागज (बच्चा) के लिए साहित्य का ज्ञान बेहद ही जरूरी है। जिस तरह मनुष्य के लिए खाना जरूरी होता है, ठीक उसी तरह एक कोरे कागज (बच्चा) के लिए साहित्य का ज्ञान होना जरूरी होता है। साहित्य के बिना ये एक शिष्य की जीवन अधूरा है। आज के बच्चों में पुस्तकों के प्रति रुचि घटती जा रही है। जो ये दर्शाता है कि हमारे आने वाले भविष्य की पीढ़ी को साहित्य का ज्ञान नहीं होगा। वैसे बच्चों को देश का भविष्य भी माना जाता हैं। एक समय था जब हमारे समाज में साहित्य की मजबूत पकड़ थी। वहीं आज बिना इंटरनेट से कुछ नहीं हो पा रहा है। एक ऐसा टाइम था, जब घर-घर में न्यूज़ पेपर आ करता था। वहीं आज के टाइम में लोग अख़बार मोबाइल पर ही पढ़ रहे है। या कहे सकते है कि लोगों के जेब में पूरा साहित्य है। वैसे यह भी कहा जाता है कि अख़बार पढ़ने से साहित्य की समझ बढ़ती है। अगर हम बात करें बाल साहित्य की तो, आज का बाल साहित्य में कोई रुचि नहीं रखता। जिससे हमारी बाल साहित्य खतरे में दिखाई देती है। जिसके लिए हमारे साहित्यकारों को कुछ परिवर्तन लाने की जरूरत है। जिससे हमारे बाल साहित्य की ओर आकर्षित हो। साहित्य ही असली ज्ञान की प्राप्त है। साहित्य को बाजार में एक नया रूप देना होगा। जिससे हमारी साहित्य बरकरार रह सके। मैं अपनी नई पीढ़ी से आशा करूगां कि वो इस लेख को पढ़ने के बाद साहित्य की ओर अपना ध्यान जरूर लगाएगें। जिससे हमारा साहित्य हमारे समाज में बरकरार रहे या बना रहे।।

                                         संपादक- दीपक कोहली          

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