साहित्य चक्र

03 January 2017

- भारत में नोटों का प्रचलन & रुपये की शुरुआत -

                - भारत में नोटों का प्रचलन &  रुपये की शुरुआत - 

देश में नोटबंदी को लेकर घमासान मचा हुआ है। जहां एक ओऱ मोदी सरकार  इसे जनता के पक्ष में बता रही हैं। तो वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे जनता के खिलाफ बता रही हैं। वैसे देखा जाए तो फैसला कोई गलत नहीं है। लेकिन व्यवस्था ठीक नहीं होने के कारण लोगों को थोड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं। जिसे देश के लोग खुशी खुशी सह रहे हैं। देश में नोटबंदी ने जहां पूरे विश्व को हिला दिया है तो वहीं कालेधन रखने वालों की परेशानी दिन पे दिन बढ़ती जा रही हैं। मैं आपको नोटों का वो इतिहास बताने जा रहा हूं जिसे पढ़कर आप हैरान रह जाएगे। क्या आपको पता है देश का पहला नोट कब छपा और किस बैंक के द्वारा छापा गया। नोटों से जुड़े हर एक पहलू मैं आपको बताऊंगा। क्या है नोटो का इतिहास और कैसे शुरु हुआ नोटों का चलन। आपको बता दूं देश का पहला नोट बैंक ऑफ हिंदुस्तान ने सन् 1770 में छापा था। जिसमें 10 रू से लेकर 10 हजार रूपये तक के नोट छापे गए थे। "बैंक ऑफ हिंदुस्तान" बंगाल प्रेसिडेंसी के तहत काम करने वाला एक प्राइवेट बैंक हुआ करता था। वैसे देश में 1857 की क्रांति के बाद अग्रेजों  ने रूपये को अधिकारिक मुद्रा बनाया। जिसे पूरे भारत में लागू किया। जिससे देश में एक नई क्रांति आई और नोटों का प्रचलन शुरु हुआ। वैसे अंग्रेजों से पहले भी कई भारतीय राजाओं ने नोट जारी किये। लेकिन वो एक सीमा के अंतर्गत चलते थे। आपको बात दूं 1857 में जो नोट अंग्रेजों द्वारा चलाए गए, उन नोटों में जार्ज पंचम और क्वीन विक्टोरिया की फोटो होती थी। अगर देखा जाए तो हमारे देश में भी अंग्रेजों ने अंग्रेजी करेंसी लागू कर दी थी। इतिहास तो बहुत बड़ा है लेकिन मैं आपको वो बातों से रुबरु करा रहा हूं जो नोटों की कहानी बताती है। सन् 1938 से लेकर अब तक का सबसे बड़ा नोट दस हजार & पांच हजार & एक हजार रूपये के थे। जो 1946 से पहले चलन में थे। जिसके बाद इन्हें 1946 में बंद कर दिया गया, और 1954 में एक बार फिर इन्हें चलन में दुबारा लाया गया। जिसके बाद इन्हें एक बार फिर 1978 में बंद कर दिया गय़ा। अगर आजाद भारत की बात करें तो देश का पहला नोट 1949 में एक रूपये का नोट छापा गया। जिसमें सारनाथ के सिंहों वाले अशोक स्तम्भ की तस्वीर थी। आपको बता दूं सन् 2000 से पहले भी देश में 1000 के नोट नहीं हुआ करते थे, जिन्हें सन् 2000 में एक बार फिर दुबारा चलन में लाया गया। वैसे 1969 से पहले नोटों में महात्मा गांधी की फोटो नहीं हुआ करती थी। अब एक बार फिर मोदी सरकार ने दो हजार रू का नोट लाकर पूरे देश में एक क्रांति ला खड़ी की है। जिससे एक तरफ लोगों में आक्रोश देखने को मिल रहा है तो वहीं दूसरी तरफ एक बड़ी संख्या में जनता पीएम के इस फैसले की तारीफों की पुल बांधा रही हैं। अब आगे देखना होगा इस फैसले से देश को कितना फायदा हुआ।   


                           संपादक - दीपक कोहली

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