साहित्य चक्र

16 February 2017

सोमेश्वर की 51- विधानसभा

                                     सोमेश्वर की 51- विधानसभा


जी हॉं... आज मैं बात करूगां। उत्तराखंड की सोमेश्वर विधानसभा सीट की। जो एक आरक्षित सीट है। वैसे इस सीट पर ज्यादा दबदबा किसी भी एक पार्टी का नहीं रहा है। अगर पिछले पंद्रह सालों में नज़र डालें तो, इस 
सीट पर टम्टा परिवार का कब्जा था। उत्तराखंड बनने के बाद साल 2002 में यहां पहला विधानसभा चुनाव हुआ। जिसमें इस सीट से कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप टम्टा विधायक चुने गए। इसके बाद साल 2007 में दूसरे विधानसभा चुनाव हुए। जिसमें बीजेपी प्रत्याशी अजय टम्टा विधायक चुने गए। वहीं साल 2009 में कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप टम्टा लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। जिसके बाद ये सीट औऱ भी रोमांचक हो गई। क्योंकि जहां कांग्रेस के पास विधायक के लिए कोई नामी चहेरा सामने नहीं था तो वहीं बीजेपी प्रत्याशी अजय टम्टा लोकसभा चुनाव हार गए। जिससे बीजेपी के लिए 2012 के विधानसभा चुनाव और आसान हो गया। क्योंकि कांग्रेस के पास 2012 में कोई नामी चेहरा नहीं था। साल 2012 में सोमेश्वर विधानसभा सीट से एक बार फिर बीजेपी प्रत्याशी अजय टम्टा को शानदार जीत मिली।
असली खेल तो तब शुरू हुआ जब 2014 में लोकसभा चुनाव हुए। क्योंकि यहां बीजेपी के पास कोई उम्मीदवार नहीं था। उसे विधायक अजय टम्टा को ही यहां से एक बार फिर लोकसभा टिकट देना पड़ा। जिसमें मोदी की लहर के साथ अजय टम्टा यहां भी जीत गए। बड़ी बात तो ये थी कि उनके विरुद्ध कांग्रेस के सबसे नामी नेता प्रदीप टम्टा थे। जिन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। वहीं एक बार फिर सोमेश्वर विधानसभा सीट खाली हो गई।
क्योंकि विधायक अजय टम्टा सांसद बन गए, जिसके चलते ये सीट खाली हो गई। इस बार यह खेल और भी रोमांचक हो गया। क्योंकि एक ओर कांग्रेस के नामी नेता प्रदीप टम्टा ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया। वहीं बीजेपी में भी कोई नामी चेहरा नहीं था। तो दूसरी ओर बीजेपी प्रत्याशी अजय टम्टा सांसद बन चुके थे। ना कांग्रेस के पास कोई चेहरा था, ना बीजेपी के पास कोई बड़ा चेहरा। आखिर करे तो क्या करें, जिस सीट में टम्टा परिवार का दबदबा हुआ करता था। वह सीट खाली थी। खेल का असली मजा तब शुरू हुआ, जब 2012 की निर्दलीय विधानसभा प्रत्याशी  रेखा आर्या को कांग्रेस से टिकट दिया गया। इसे पहले रेखा बीजेपी की ओर जाती दिखी थी, लेकिन बीजेपी ने उन्हें टिकट देने से इनकार कर दिया। जिसके बाद रेखा ने कांग्रेस से 2014 का उप विधानसभा लड़ा। जिसमें उन्हें भारी मतों से जीत मिली थी। वहीं बीजेपी ने अपने पुराने कार्यकर्ता मोहन राम आर्या पर विश्वास जताया। जिसमें मोहन राम आर्या जनता का विश्वास नहीं जीत पाए। वहीं एक बार फिर इस सीट को लेकर काफी कयास लगाए गए। जहां एक ओर कांग्रेस प्रत्याशी रेखा आर्या ने कांग्रेस से बगावत कर, बीजेपी शामिल हो गई। जिससे कांग्रेस में टिकट को लेकर चिंता की लहर दौड़ और एक बार फिर राजेंद्र बाराकोटी को बलि का बकरा बनाया गया। वहीं बीजेपी ने रेखा को टिकट देकर बीजेपी के कर्यकर्ताओं में फूट जरूर पाड़ दी। क्योंकि रेखा इससे पहले कांग्रेस से चुनाव लड़ चुकी है। जिससे ये साफ होता है कि रेखा एक दलबदलू या बागी नेता है। वैसे रेखा आर्या सोमेश्वर की रनमन क्षेत्र से है। इससे पहले रेखा आर्या जिला पंचायत सदस्य भी रह चुकी है। जिसके बाद 2012 में रेखा ने सोमेश्वर विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा जिसमें वो हार गई। लेकिन खास बात ये रही कि निर्दलीय चुनाव लड़ने के बाद भी रेखा दूसरे स्थान पर रही। जिससे ये साबित होता है कि रेखा ने लोगों में किस तरह अपनी पहचान बनाई। लेकिन यह एक बड़ा सवाल भी खड़ा करता है। आखिरकार कोई अपनी पहचान इतनी जल्दी कैसे बना सकता है..? वैसे रेखा अपने पति और चुनाव प्रचार में पैसों को लेकर काफी सुर्खियों में रही है। रेखा के पति  गिरधारी लाल उर्फ शाहू यूपी का एक हिस्ट्रीशटर है। जिनके ऊपर कई केस दर्ज हैं। जिसमें एक केस ये भी है कि उन्होंने कई लोगों की जमीन अवैध तरीके से बेची हैं। वैसे रेखा के पति मुरादाबाद के रहने वाले है। वहीं नैनीताल, सोमेश्वर, रुद्रपुर, हल्द्वानी, में करोड़ो की जमीन रेखा के नाम है, साथ ही तीन गाड़िया और एक किलो जेवरात भी है। जो ये बताते है कि आखिर एक सामान्य परिवार की बेटी इतना कैसे कमा सकती है। जो 2012 से पहले कुछ करती ही नहीं थी। बस एक बार जिला पंचायत सदस्य जरुर रही। आखिर सवाल ये उठते है कि एक जिला पंचायत सदस्य या फिर एक विधायक जो ढ़ाई साल रहा हो, वह इतना कहा से कमा लेता है। ये सोचने वाली बात जरूर है। आखिरकार हम भी इस देश के नागरिक है। हमारे पास भी जानने का पूरा अधिकार है। हम भी आजाद है।

                                   संपादक- दीपक कोहली     

       
           







11 February 2017

देश के युवा पोर्न साइट के शिकार

                                   
            
                                
आजकल के युवाओं में पोर्न साइटों को लेकर कई सवाल उठते है। इसी को लेकर देश के विद्वानों ने अपनी - अपनी सोच आम लोगों तक तो पहुंचा दी। लेकिन फिर भी युवाओं में पोर्न देखने का क्रेज कम नहीं हुआ है। वहीं हमारी सरकार इन चीजों पर कानून तो बनाती है लेकिन उन पर कोई अमल नहीं करता है। वैसे हमारे देश में शराब बेचना कानून है लेकिन शराब पीना गैरकानूनी हैं। जो ये दर्शाता है  कि हमारे देश का कानून कितना लचीला है। यहीं नियम इन साइटों पर भी लागू होता हैं। वैसे हमारे देश में सेक्स को लेकर कई बातें सामने आती है। जहां एक ओर पढ़े लिखे लोग इसे कानूनन सही मानते है, तो वहीं गांव देहात क्षेत्रों में इसे गलत माना जाता है। अगर देखा जाए तो पोर्न देखना कोई गैरकानूनी नहीं है। क्योंकि हम 21वीं सदीं और पश्चिमी देशों की संस्कृति अपना रहे है। जहां पोर्न खुले आम देखी जाती है। वहीं अगर पश्चिमी देशों की बात करें तो वहां पोर्न देखना कोई अपराध नहीं है। वैसे पोर्न साइट तो आप जानते ही होंगे, अगर नहीं जानते तो आप भी जान लीजिए। पोर्न साइटों के माध्यम से आप गंदी मूवी & सेक्स के बारे में जानकारी ले सकते है। आखिर जानकारी लेनी भी चाहिए। ये हमारा अधिकार है। वैसे हमारे देश के युवाओं को पोर्न देखने की बीमारी लगी है। पिछले कुछ सर्वों के अनुसार हमारे देश में पोर्न मूवी सबसे ज्यादा देखी जा रही है। जो ये दर्शाता है कि हमारे देश में सेक्स को लेकर आज भी लोगों में एक अलग सोच है। इस मुद्दे पर सरकार ने कई फैसले लेने की सोच, लेकिन आज तक इन पर कोई काम नहीं हो पाया। वैसे कुछ लोगों का मानना है कि पोर्न साइटों पर बैन लगाना आटिर्कल 21 का हनन है। जिसमें राइट टू पर्सनल लिबर्टी की बात की गई है। जिससे आप किसी को कुछ करने से नहीं रोक सकते है।  
वैसे अगर  इंटरनेट पर कुल साइटों की बात करें तो, 37 प्रतिशत साइटें पोर्न मूवीयों की है। जो युवाओं के लिए एक रोज से बढ़कर है।  वहीं "एवस्ट्रीम टेक" के अनुसार पूरे विश्व के इंटरनेट में देखी जाने वाली साइटों में 30 % पोर्न साइटें देखी जाती हैं। जिससे ये साफ हो जाता है कि पूरा विश्व पोर्न साइटों का जमकर इस्तेमाल करता हैं। वैसे अगर भारत की बात करें तो, सेक्स को लेकर लोगों की अलग-अलग मानसिकता हैं। वहीं अगर युवाओं की बात करें तो आज हमारे देश के युवा पश्चिमी सभ्यता के प्रति ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। जिससे रेप, छेड़छाड़ जैसे केस बढ़ने लगे हैं। वहीं अगर देश की महिलाओं की बात करें तो चार पुरूषों के मुकाबले एक महिला पोर्न साइट का इस्तेमाल करती है। जिससे यह साबित होता है कि हमारे देश की महिलाएं भी पोर्न साइट का खूब प्रयोग करती है। वहीं आजकल लिविंग रिलेशनशिप में रहने का भी खूब फैशन चल रहा है। जो इन चीजों को बढ़ावा देता है। एक तरफ हम अपनी संस्कृति की बात करते है तो दूसरी तरफ हम आधुनिक बनते जा रहे है। जिससे हमारी संस्कृति खोती जा रही है। जिससे हम पश्चिमी फैशन के शिकार होते जा रहे है।
वैसे अगर सरकार इस पर कोई कदम उठाना चाहे तो कोई गलत नहीं होगा। क्योंकि हाल ही के दिनों में पीएम मोदी ने नोटबंदी जैसा कदम उठाकर पूरी दुनिया को चौका दिया था। ठीक उसी तरह अगर सरकार चाहे तो इन पोर्न साइटों पर बैन लगा सकती है। जिनसे 18 साल से छोटे नवयुवाओं पर बुरा असर पड़ रहा हैं। सरकार इन पोर्न साइटों को महंगी करे या फिर login के जरिए एक पहचान के माध्यम से इन्हें देखने की इजाजत दें। जिससे 18 साल से छोटे नवयुवा इनके शिकार न हो। हमें भी अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत हैं। हमें अपने बच्चों को सेक्स से संबंधित जानकारियां देनी होंगी। जिससे उन्हें इन चीजों की नॉलेज मिल सके और जिससे वो समझ पाएं, कि आखिर सेक्स क्या होता है। जिससे हमारे देश के नवयुवाओं की मानसिकता बदलेगी। जिसका फायदा देश को होगा, जिससे देश में रेप, छेड़छाड़ जैसी घटनाओं पर रोक लगेगी।
वैसे हमें भी इन चीजों के बारे में खुलकर बात करनी चाहिए। जिससे हमारे समाज में एक नई सोच पैदा हो सके। आखिर हमारा देश पोर्न देखने में क्यों सबसे आगे है..? इस बारे में हमारी सरकार को कुछ सोचा चाहिए और कुछ नये कानून या शिक्षा के माध्यम से जागरुकता फैलानी चाहिए।।

                                                                        संपादक- दीपक कोहली      

   



      

07 February 2017

- गांधी परिवार के दो लाल -

                         - गांधी परिवार के दो लाल -
              
                            
गांधी परिवार की बात सामने आते ही गांधी परिवार के दो लाल याद आते है। एक कांंग्रेस के लाल है तो दूसरे बीजेपी के सांसद है। जी हां... मैं राहुल गांधी और वरुण गांधी की बात कर रहा हूं। ये गांधी परिवार के वो सपूत है। जिन्हें देश का बच्चा - बच्चा जानता हैं। इन्हें गांधी परिवार का भविष्य कहा जाए तो गलत नहीं होगा। वैसे देश की जनता इन्हें गांधी परिवार की वजह से जानती हैं। क्योंकि इनकी दादी देश की प्रधानमंत्री रही है। चाहे वह राहुल हो या फिर वरुण गांधी ही क्यों ना हो। वैसे हमारे देश में गांधी परिवार का एक अहम रोल रहा है। चाहे वह आजादी की बात हो या फिर देश को दो भागों में बॉंटने की। हर जगह गांधी परिवार अपनी मौजूदगी देखता आया है। ऐसे में आज गांधी परिवार का वर्चस्व खतरे में है। जिसे देखकर ये लगता है कि देश गांधी परिवार के चुगल से निकल रहा है। वहीं एक ओर कांग्रेस की नैया डूबने में लगी है, तो दूसरी ओर राहुल अपना कद बढ़ाने में लगे है। वहीं अगर बात करे वरुण गांधी की तो उनका बीजेपी में कोई वर्चस्व दिखता नज़र नहीं आता। वैसे इस गांधी परिवार को हर देशवासी जाता है। कोई इसे महात्मा गांधी के नाम से जानता है, तो कोई इसे इंदरा गांधी के नाम से आज भी जाता है। वैसे अगर बात की जाए तो गांधी परिवार की नई पीढ़ी कि, तो अभी तक दोनों सपूतों में से कोई भी देश की राजनीति में ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ पाए हैं। जिससे ये साबित होता है, कि गांधी परिवार का दबदबा खत्म - सा हो रहा है। जहां एक ओऱ राहुल गांधी कांग्रेस की साख बचाने मेंं लगे है, तो वहीं वरुण गांधी अपनी एक अगल पहचान बनाने में लेगे है। वैसे वरुण गांधी को संजय गांधी की तरह समझा जाता है। वरुण गांधी कदम उठाने में विश्वास रखते है। ना की राजनीति करके उसे मुद्दा बनाते है। वहीं अगर राहुल की बात की जाए तो, राहुल को जबर्दस्ती राजनीति में लाया गया है। आखिर गांधी परिवार का दबदबा क्यों कम होता जा रहा है। क्या गांधी परिवार के इन दो लालों को राजनीति करनी नहीं आती है। या फिर देश की जनता गांधी परिवार का पूरा सच जान चुकी है। जो भी हो लेकिन इतना जरूर कह सकते है कि देश में गांधी परिवार का वर्चस्व बरकरार रहेगा। चाहे देश का प्रधानमंत्री गांधी परिवार से ना बने। लेकिन देश की राजनीति में उनका वर्चस्व लगातार बरकरार रहेगा। यह मेरा कहना नहीं है, यह तो देश की राजनीति का कहना है। वैसे आपको बता दूं कि राहुल गांधी और वरुण गांधी के पिता भाई थे। लेकिन आप सोच रहे होगे कि राहुल गांधी कांग्रेस के उपाध्यक्ष है, तो वरुण गांधी बीजेपी से सांसद क्यों..? इसके भी कई मायने है। जिस पर मैं बात नहीं करना चाहता। जहां एक ओर राहुल गांधी को कांग्रेस भविष्य का पीएम उम्मीदवार मानती है। वहीं अगर वरुण गाँधी की बात करें तो उनका कोई वर्चस्व बीजेपी में दिखता नजर नहीं आता। जिससे ये कयास लगाए जा रहे है, कि वरुण कहीं कांग्रेस में शामिल न हो जाए। अगर ऐसा होता है, तो यह गाँधी परिवार के लिए एक संजीवनी बूंटी से कम नहीं होगी। वैसे गांधी परिवार भी ये चाहेगा कि अगर दोनों सपूतों कांग्रेस पार्टी को आगे बढ़ाने में लगे तो बुरा नहीं होगा। जिससे घर की पार्टी में एक नया जोश और जज्बा देखने को मिल सकता है। इंद्रा गांधी के समय में भी गांधी परिवार के सपूतों ने कांग्रेस पार्टी को एक नया आयाम दिया था। जिसे आज भी याद किया जाता है। अब देखने वाली बात ये रहेगी, कि देश की राजनीति में गांधी परिवार के ये सपूत कितने कामयाब होते हैं। ये तो समय ही बताएगां ।
गाँधी परिवार के इन पुत्रों के लिए मैं इतना ही कह सकता हूं, कि ये राजनीति है इसमें कोई किसी का नहीं होता।
बस राजनीति करते जाओ और सीखते जाओ। तब दांव खेलो...।।

                                                                        संपादक-  दीपक कोहली  

     




         
     

03 February 2017

देवभूमि का दिव्यलोक कैंची धाम

                             देवभूमि का दिव्यलोक कैंची धाम




कैंची धाम कहे या नीम करोली बाबा कहे तो गलत नहीं होगा। कैंची धाम उत्तराखंड के नैनीताल जिले के भवाली-अल्मोड़ा-रानीखेत मोर्टर मार्ग पर 
 स्थित है। इसे देवभूमि का दिव्यलोक भी कहा जाता है। ये धाम पूरे विश्व में लोक प्रसिद्ध है। वैसे यहां हनुमान जी का विशाल मंदिर है। लेकिन ये धाम फिर भी यहां के नीम करोली बाबा के नाम से जाना जाता है। आपको बता दूं इस धाम के बारे में कई रोचक कथाएं प्रसिद्ध है। इसी में से एक कथा ये भी बताई जाती है। इस मंदिर में 1962 में नीम करोली बाबा ने अपने कदम रखे थे। जिन्होंने यहां कई लीलाएं रचीं। जो लीलाएं आज लोकप्रसिद्ध है। आपको बता दूं कि, यहां के नीम करोली बाबा हर हमेशा एक कंबल ओढ़ा करते थे। नीम बाबा ने अपने जीवन काल में 108 हनुमान मंदिरों का निर्माण करवाया था। नीम करोली बाबा हनुमान भक्त थे। इस मंदिर का नाम कैंची धाम इस लिए पड़ा क्योंकि यहां पर सड़क कैंची कि तरह कटी हुई है। जिसके चलते यहां के लोगों ने इसे कैंची धाम नाम दे दिया। धीरे धीरे ये नाम आज लोक प्रसिद्ध हो गया। इतना ही नहीं इस मंदिर में दुनिया के हर कोने से श्रदालु दर्शन के लिए आते हैं। पिछले कुछ साल पहले यहां FACEBOOK के CEO मार्क जुकेरबर्ग भी आए थे। इस बात की पुष्टि खुद मार्क जुकेरबर्ग ने की है। कैंची धाम कोसी नदी के किनारे पर बसा है। यहां का वातावरण स्वर्ग का आभास कराता है। वैसे होने को तो उत्तराखंड के हर कर्ण में स्वर्ग का आभास होता है। कैंची धाम अपने आप में एक अलग ही महिमा को दर्शाता है। यहां के लोगों का इस धाम के बारे में कुछ अलग ही मान्यता है। यहां के लोग बाबा नीम करोली को ही अपना ईश्वर मानते है। उन्हीं के भरोसे अपना जीवनयापन करते है। यह स्थान उत्तराखंड की विभिन्न पर्यटन स्थलों में से एक है। वैसे यह मंदिर दिखने में तो बहुत ही सुंदर है। मैं आप लोगों से एक बार जरूर कहूंगा, कि आप भी इस मंदिर में दर्शन के लिए एक बार जरूर आए और अपने दिल को स्वर्ग का आभास जरूर कराएं। इस मंदिर के बारे जानने की कोशिश भी करें। यह मंदिर दिव्यलोक कहा जाता है। दुनिया के कई हस्तियां यहां दर्शन के लिए आ चुके है। कहीं आप न रह जाए। आइए एक बार मेरी देवभूमि के दर्शन तो करिए। वैसे बाबा करोली को हनुमान का रूप भी माना जाता है।  

 बाबा नीम करोली की जय हो.......।। 




                                     संपादक- दीपक कोहली 




  




02 February 2017

हिटलर की हकीकत


                

हिटलर को तो आप जानते ही होंगे। हिटलर का पूरा नाम एडोल्फ हिटलर था। हिटलर का जर्मनी के इतिहास में वहीं स्थान है जो फ्रांस में नेपोलियन बोनाबार्ट का, इटली में मुसोनली, तुर्की में मुस्तफा कमालशापा का था। इसी प्रकार मैं आज आपको तानाशाही हिटलर के बारे में कुछ तथ्यों से अवगत कराऊंगा। जो आपने कभी सुनी ही नहीं होंगी। क्या आपको पता है तानाशाह हिटलर की जिंदगी कैसी थी। हर एक वो तथ्य, मैं आपके सामने रखूंगा। आखिर हिटलर की जिंदगी कैसी थी। 
हिटलर आज भी अपने तानाशाह के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है। हिटलर यहूदियों पर अत्याचार की बारिश करने वाला भयानक मानवहित का हन्न करने वाला एक दुष्ट व्यक्ति था। हिटलर का जन्म 20 अप्रैल 1889 में ऑस्ट्रिया के वियेना में हुआ था। वैसे बचपन में हिटलर पादरी बनना चाहता था। लेकिन भाग्य ने साथ नहीं दिया। आर्थिक तंगी के कारण हिटलर अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए। जिसके कारण हिटलर अच्छी शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाए। वैसे ये भी माना जाता है कि जब हिटलर अपनी मां क्लारा हिटलर के गर्भ में थे तो उनकी मां गर्भपात करना चाहती थी। लेकिन बाद में कुछ डॉक्टरों की सलाह से नहीं करवाया। हिटलर जर्मनी सेना का एक सिपाही था। जिसने प्रथम विश्न युद्ध में जर्मनी का प्रतिनिधित्व किया था। हिटलर वहीं घायल सिपाही है जिसे ब्रिटिश सेना ने विश्न युद्ध के दौरान बक्श दिया था। वैसे हिटलर ने फ्रांस में कई लड़ाइयों में भाग लिया था। लेकिन जर्मनी युद्ध नहीं जीत सकीं। जिसके बाद हिटलर सेना छोड़ चले आये थे। प्रथम विश्न युद्ध के बाद जहां एक ओर तानाशी प्रकृति का उदय हुआ तो वहीं दूसरी ओर जर्मनी में हिटलर के नेतृत्व में नाजी दल की स्थापना हुई। जिसके बाद जर्मनी में हिटलर का उदय हुआ। हिटलर को उनके भाषणों के लिए भी जाना जाता है क्योंकि वो अपने भाषणों से लोगों का दिल जीत लेते थे। वैसे हिटलर के बारे में ये भी कहा जाता है कि हिटलर अपनी जुबांन की ताकत से जर्मनी की सत्ता में बैठा था। हिटलर अपने भाषणों में यहूदियों के विरोध भड़काऊ बयान दिया करते थे। जिससे जर्मन जनता उनसे बहुत खुश होती थी। वहीं हिटलर के बारे में ये भी कहा जाता है कि उनके पास एक ही अंडाणुकोष था। जिसके कारण हिटलर कभी बाप नहीं बन पाया। हिटलर अपनी सेक्स पावर बढाने के लिए बैलों के वीर्य से बने इंजेक्शन का इस्तेमाल किया करता था। हिटलर आधुनिक इतिहास का वह व्यक्ति है जिसने धूम्रपान का विरोध किया था। वह नहीं चाहता था कि दुनिया धूम्रपान से ग्रस्त हो। हिटलर ने अपनी पुस्तक "माइक कम्फ" में अपने संघर्षों के बारे में विस्तार से बताया है। हिटलर एक सामान्य परिवार से संबंध रखता था। जिसके बाद भी 1933 में हिटलर जर्मनी का चांसलर बन बैठा। हिटलर के शासक में ही यहूदियों का कत्लेआम करवाया जाता था। हिटलर को 1938 में Time Magazine का Man of The Year का खिताब दिया गया था। वैसे हिटलर के बारे में यह भी कहा जाता है कि हिटलर को चॉकलेट बहुत ही पंसद थे। वह एक दिन में एक किलो चॉकलेट खाता था। हिटलर यहूदियों पर अत्याचार करने के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है। हिटलर का पहला प्यार एक यहूदी लड़की ही थी। लेकिन हिटलर कभी उसका इझहार नहीं कर सका। सन् 1939 में हिटलर का नाम शांति नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। वैसे हिटलर चार्ली चैपियन का बहुत बड़ा फैंस था। हिटलर चार्ली की तरह मूछें रखता था और चार्ली की मूछें पर मरता था। हिटलर की मूछों को टूथब्रश मूछें भी कहा जाता था। हिटलर हर प्रकार का नशा करता था और ड्रग्स का आदि था।
वैसे हिटलर के बारे में ये भी कहा जाता है कि हिटलर इतना बड़ा तानाशाह होने के बाद भी एक शुद्धशाकाहारी था। जर्मनी के एकीकरण में हिटलर का अहम रोल रहा था। हिटलर ने जर्मनी को एक अलग रूप दिया था। जर्मनी के इतिहास में हिटलर का नाम हर हमेशा जिंदा रहेगा। वहीं विश्व के इतिहास में जब जब तानाशाह शासकों की बात होगी, तो हिटलर का नाम भी उस लिस्ट में जरूर होगा।    


                                          संपादक - दीपक कोहली