साहित्य चक्र
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02 July 2026

छायाचित्राधारित पंक्तियाँ पढ़िए- 03 जुलाई 2026






अडिग खड़ा हिमालय है, भारत का मस्तक है,
जब जी चाहे घुम्मकड़, पंहुच जाते है आग़ोश में,
कितना सुकून मिलता है, सारी थकान मिट जाती है,
ताज़ी हवा वातावरण में, जब प्रकृति में घुल जाता है।

- सुमन डोभाल काला


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उच्च हिमालय के तल पर, यह कौन खड़ा छत्र उठाए।
जैसे लगता है कान्हा, अंगुली में है गोवर्धन उठाए।

- रत्ना बापुली


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हमने अपनी पूरी सम्भावनाओं के
साथ हाथ फैलाकर देख लिए,
रे कुदरत, तेरे आगे आज भी हम छोटे हैं।
देख-सदियों से अडिग खड़ा हिमालय तेरा,
हमारे क्षणिक सर्जन के भी टोटे हैं।

- स्वाति जोशी


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हिम-शिखरों ने आज फिर, साहस का संदेश सुनाया।
जो ऊँचाइयों से प्रेम करे, उसने जीवन का अर्थ पाया।

- डॉ. सारिका ठाकुर 'जागृति'


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ख्वाहिश

काश तेरी पनाहों में एक बसेरा हो,
हर रात मै कविता लिखूं...
जब तुम सुकून से पढ़ो,
तो तसल्ली से एक सबेरा हो।

- सुतपा घोष


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महफ़िल की भीड़ में भी तन्हा था, क्या अपने क्या पराये।
तन्हाइयों में भी महफ़िल जता गये, ये पर्वतों के साये।

- कुणाल


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खुशनुमा है ये धरती और आसमान ,
आच्छादित है बर्फ से घाटियां महान।

- मनोज कौशल


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बर्फ से ढके मनमोहक पहाड़, प्रकृति की अनुपम छटा देखकर,
इस निर्जन, एकाकी स्थान पर भी हृदय आनंदित हो गया।

- प्रवीण कुमार


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ऊँचाइयों पर पहुँचकर, बस इतना एहसास हुआ,
सबसे सुंदर मंज़िल, अपने ही भीतर मिली।

- नरेंद्र मंघनानी


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शहर की उदासी से, जेब की लाचारी से, भाग चलें कही दूर हम।
नदी किनारे बैठ कर, पर्वत से लग कर, छोड़ दे सारे दुःख, दर्द और गम।

- प्रणव राज


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एक दूसरे को निहार रहे,
कौन ? कितना पिघल रहे।

- जितेंद्र बोयल


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दुनियां से दूर, खुद के पास, जहां है अपनी ही तलाश।
कितना मीठा, कितना सुखद, है यह मन का एहसास।

- रोशन झा


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धवल हिमगिरी शिखर की तलहटी में पलता जीवन मोती,
गगन चुंबी तरुवर की छाया में हो प्यारी सी कुटिया।
उसके रक्त चन्दन से छत के नीचे खड़े होकर,
मैं निहारु असली मोती, मैं निहारु असली मोती,
असीम मिलती शान्ति जहां, हर वक्त विचरण करता रहूँ वहां।

- बाबू राम धीमान


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03 September 2025

कविता- उड़ान सपनों की





सपनों की ऐसी उड़ान
जो कभी ना देती थकान,
जो नींद ना आने देती ना.
ऐसे सपने ही चाहिए ना।

जो विचार प्रवाह में दौड़े
सपना पूरा करना है,
लक्ष्य नहीं मिले जब तक
कमर कस लेनी है तब तक‌।

सपनों की मंजिल ऐसी हो
अहसास ना होने दे किसी को,
जब ऐसे सपने होंगे
तो ही पूरे होंगे ।

इस उडान में कभी ना भटकना,
नई तरंगो नई उमंगो को
जिंदगी का हिस्सा बनाना,
दोस्ती, यारी में तुम ना फंसना
सपनों की उडान
को तुम पूरी करना,
सबसे अलग करोगे
तो कुछ बन जाओगे,
चाहे आये मुश्किलें हजार
तेरे होंगे सपने साकार,

तुम संघर्ष करोगे
तो ही आगे बढ़ोगे,
कई बार गिरोगे
कई बार उठोगे,

तभी तो इस प्रक्रिया में
सपनों को
हवा दे पाओगे,

हौसलों में उडान रखोगे
तभी सपनों में
जान भर पाओगे,

थक हार कर
नहीं बैठना है।
पहचान को आसमान
तक पहुंचाना है,
हौसलों की बुलंदी को
अनंत तक ले जाना है।


- बबिता कुमावत