आज के आधुनिक क्रिकेट के कोलाहल के बीच, जहाँ किक्रेट अब विशुद्ध मनोरंजन और व्यापार की धुरी बन चुका है। वही विराट कोहली जैसे महान खिलाड़ी ने अपनी तपस्या से इस खेल के प्रति लोगों के प्रेम को जिंदा रखा है। जब भी विराट कोहली खेल के मैदान में उतरते हैं तो टीवी स्क्रीन से लेकर मोबाइल में मैच को देखने वालों की संख्या करोड़ों में पहुंच जाती है। वर्तमान समय में विराट कोहली अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सिर्फ एक ही फॉर्मेट यानी वनडे क्रिकेट मैच खेलते हैं।
विराट कोहली का क्रिकेट करियर उनके पिता की अंतिम विदाई का असहनीय दर्द के साथ शुरू हुआ था। विराट कोहली ने अपनी मेहनत और लगन से किक्रेट में वह मुकाम हासिल कर लिया है, जो हर क्रिकेटर का सपना होता है। चाहे वह विश्व कप जितना हो या फिर चैंपियन ट्रॉफी व एशिया कप या फिर बल्लेबाजी रैंकिंग में नंबर वन बनना हो। वनडे क्रिकेट में सबसे अधिक शतक बनाने का रिकॉर्ड हो या फिर सबसे तेज 13000 रन बनाना हो। विराट कोहली की किक्रेट विरासत उनके नाम की तरह विराट और अटूट है।
दिल्ली की गलियों से निकाल कर पूरे विश्व में भारत का नाम रोशन करने के बात हो या फिर टेस्ट क्रिकेट को अपनी आक्रामकता से दिलचस्प बनाने की बात हो विराट कोहली हर जगह सबसे आगे नजर आते हैं। कभी भारतीय क्रिकेट टीम अपनी फिटनेस के कारण मैच हार जाया करती थी। मगर विराट कोहली ने फिटनेस का ऐसा मंत्र दिया कि आज भारतीय क्रिकेट टीम की फिटनेस दुनिया में सबसे बेहतर मानी जाती है। 38 साल के हो चुके विराट कोहली आज भी क्रिकेट मैदान में ऐसे दौड़ते हैं जैसे 18 साल के युवा हो। सिंगल रन को डबल में कन्वर्ट कर लेते हैं और डबल रन को ट्रिपल में कन्वर्ट कर लेते हैं और टीम को हर जगह सपोर्ट करने की कोशिश करते हैं।
भारतीय क्रिकेट टीम का नेतृत्व करने का मौका भी विराट कोहली को मिला। मगर अपने नेतृत्व में विराट कोहली उतना अच्छा नहीं कर पाए, जितना बतौर बल्लेबाज उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए किया है। जब भी भारतीय क्रिकेट टीम संकट में आती है तो विराट कोहली शक्तिशाली सेनापति के तौर पर खड़े नजर आते हैं। अपनी आक्रामकता से विराट कोहली विपक्षीय क्रिकेट टीम का हौसला तोड़ देते हैं। मौजूदा क्रिकेट में विराट कोहली एकमात्र खिलाड़ी हैं, जिनका अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 शतक पूरे करने के लिए मात्र 14 शतकों की जरूरत है। आने वाला भविष्य ही बता पाएगा विराट कोहली 100 शतक बना पाते हैं या फिर नहीं!
- दीपक कोहली

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