साहित्य चक्र
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21 July 2026

छायाचित्र आधारित पंक्तियाँ






कठिन तो है ये डगर..
लक्ष्य तक पहुँचूंगा जरूर,
चाहे भटकना पड़े दर-बदर।

   
                            - सूरजमल AkS


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मंज़िलें तुमको मुबारक! ओ मुसाफ़िर…
हम तो दरिया है चलते जाएँगे, रास्ते बनते जाएँगे।


- मोहन मीणा, जयपुर


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पेड़ की छाँव, खुला आसमान
और सफ़र का साथ,
कभी-कभी मंज़िल से ज़्यादा खूबसूरत होता है
ठहरने का एहसास।


- नरेंद्र मंघनानी


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हो साथ राजदूत का, तो मंज़िल दूर नहीं
जज़्बा हो दिल में कुछ कर गुजरने का,
तो डगर दूर नहीं।


- बाबू राम धीमान


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घर के वास्ते ही, घर छोड़ चले हैं।
अपनों की खुशियों के खातिर,
हर दर्द, खुशी से ओढ़ चले हैं।


- रोशन झा


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प्रकृति का सुन्दरतम् चेहरा देख, मन को मोह लिया,
रोक कर अपनी वाहन को, सुकून का अहसास लिया।


- चुन्नू साहा


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चला हूं ख़ोज में कि चैन पाऊं जहां,
ख़ुद से भागकर भी मगर जाऊं कहां!


- कुणाल


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अकेला ही चला था, सुकून की तलाश में,
देख कुदरत के हसीन नजारे, नजरें ठहर गई।


- प्रवीण कुमार


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कैसी विडंबनाओं का बोझ लिए खड़े हैं दोनों,
एक रुक नहीं सकता, एक चल नहीं सकता।


- स्वाति जोशी


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ईश्वर द्वारा रचित सृष्टि के सौंदर्य में मुग्ध मन को,
वापस खींच पाना बहुत ही मुश्किल है।


- अनुरोध त्रिपाठी


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"पेड़ की छाँव में बैठा हूँ, मगर सफ़र अभी बाकी है,
ख़ामोशी कह रही है, खुद से मिलना अभी बाकी है।"


- डॉ. सारिका ठाकुर 'जागृति'


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हरे भरे खेतों में पेड़ की छांव तले,
तेरा इंतजार और सामान का बोझ लिए सफ़र हुआ करता था।
जाने कहां खो गया ? कभी पहाड़ों के उस पार तेरा घर हुआ करता था।


- मंजू सागर


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आसमा ज़मी तक झुक सकता है,
चाहे तो दोपहिया रुक सकता है।
मगर जिंदगी जहां तक चलती है,
सफ़र उसी मंज़िल पे थम जाता है।


- सुतपा घोष


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