साहित्य चक्र

30 May 2023

मौन और एकांत की आवश्यकता



कभी-कभी मन एकांत की कामना करता है बिल्कुल उस तरह जैसे तेज धूप  से गुजरने के बाद बादल की ठंडी छांव की इच्छा होती है। ऐसी शीतल पवन जो तन के साथ ही साथ मन भी शांति से भर दे। 





एकांत और मौन रहने का यह बलवती आवेग इतना प्रबल होता है कि उस काल खंड में सिर्फ और सिर्फ मौन रहना ही बहुत होता है।  खालीपन से भरा हृदय किसी भी प्रकार के विचार से भी दूर रहना चाहता है भले ही वह प्रसन्नता का रूप हो अथवा दुख का इस खालीपन के साथ मौन और एकांतवास हमें स्वयं से मिलवाता है, हमारे आदिम रूप में पूर्ण सत्यता के साथ हुआ यह साक्षात्कार भाषाविहीन होकर केवल संवेदनाओं पर केंद्रित होता है।

मन में उमड़ते विभिन्न आवेग–संवेग निष्पक्ष होकर मस्तिष्क के कोष्ठों–प्रकोष्ठों में विचरण करते हैं। ऐसे में नेत्र मूंद कर स्वयं को पूर्ण रूप से शिथिल कर देना श्रेयस्कर है ताकि यह समझना आसान हो सके कि इस स्थिति में नियति असीम सत्ता,क्या संदेश प्रेषित करना चाहती है। अपना पूरा ध्यान उस संदेश को प्राप्त करने में लगा देना चाहिए किंतु बलपूर्वक नहीं। 

यह भी एक साधना की समान होना चाहिए, श्वासों की गति में ध्यान लगाते हुए त्रिकुटी ( दोनों भोहों का मध्य स्थल) की केंद्रित करने का प्रयत्न करें।
मन की ऊहापोह शने: शनेः क्षीण होने लगेगी। आप पाएंगे कि वे आवेग जो अस्थिर थे वे अब स्थिरता की ओर बढ़ रहे हैं और अंत में जब वे पूर्ण रूप से स्थिर हो जाते हैं तब आप असीम शांति से भर उठते हैं।हो सकता है यह क्रिया कुछ घंटो में सम्पन्न हो या कुछ दिनों में किंतु पूर्ण अवश्य होगी।

यह स्थिति प्रत्येक मनुष्य के जीवन में बहुत बार आती है। हम इसे अकारण मन खराब होना समझ कर स्वयं को बाह्य साधनों में व्यस्त करने का प्रयत्न कर प्रसन्नता ढूंढने का प्रयास करते हैं। बहुत बार सफल भी होते हैं इसमें किंतु हम स्वयं के लिए प्राप्त हुए दुर्लभ पलों को खो देते हैं जिनमें हम एक असीम सत्ता से प्राप्त अदभुत शक्ति, सुकून को प्राप्त करने वाले थे, जिन पलों में हम स्वयं को तलाश कर अपने मित्र बनने वाले थे, उस अवसर को अज्ञानतावश हम गवां देते हैं।

अगली बार जब आपको ऐसा अनुभव हो कि आपको एकांत और मौन की आवश्यकता किसी भी अन्य वस्तु , स्थान या व्यक्ति से अधिक हैं तो स्वयं को रिक्त होने देने से मत रोकिएगा। रिक्त होना ही नवीनता का समावेश करता है और मौन मन के गहन रहस्यों से परिचित करवाने में मदद करता है जब आप इस मौन को ध्यान की तरह प्रयोग करते हैं।


                                                        - मेघा राठी


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