साहित्य चक्र

04 January 2026

आज की प्रमुख रचनाएँ- 05 जनवरी 2026





*****





तेरे आने की खुशी में नूतन
मैं आधी रात तक जगता रहा,
घड़ी घड़ी पल पल बीतता रहा
पदचाप कदमों की आती रही,
पत्थरा गई आंखें इंतजार करते करते
अक्ष आपका चक्फेरी देता रहा
तेरे आने की खुशी में नूतन
मैं आधी रात तक जगता रहा...

आपके आने की आहट में मैं नूतन
बहुत सावधान रहा,
कालीन पलकों की स्वागत में
मैं बिछाता रहा,
बुक्का हाथ में लेकर फूलों का
तेरा इंतजार करता रहा,
अर्पित कर फूलों का बुक्का तुम्हें
मैं आपका शुक्रिया करता रहा,
आप आए, साथ में समृद्धि लाए,
आहट समाप्त हुई आपके आने की
कैसे कहूं ? नूतन कितनी खुशी मिली मुझे
आधी रात तक उस खुशी को छुपाता रहा
तेरे आने की खुशी में नूतन
मैं आधी रात तक जगता रहा...

आप भी किसी वी आई पी से कम नहीं
आधी रात तक इंतज़ार करवाते रहे,
चन्दन, कुमकुम, अगर, पुष्प हाथ में लेकर
तेरी आरती उतरता रहा,
ध्यान आगामी लक्ष्य पर रख कर
प्राथमिकता तय करता रहा,
सुन! नूतन, खुशियां देना सभी को
मुराद सभी की पूरी करना,
कोई खाली न जाए तुम्हारी दहलीज से
झोल्लियां सभी की भरते जाना,
नव रंग, नव रस, नव उमंग, नव प्रेम
नव जोश, नई स्फूर्ति, सब में भरते जाना,
ख़त्म हो गई है इंतजार की घड़ियां अब
मेरी भी, स्वागत में पलकें झपकता रहा,
मुबारिक हो नया साल सभी को
धीमान भी अन्त में यही कहता रहा,
खुशियां मिले सभी को,
नूतन से थी गुज़ारिश करता रहा,
तेरे आने की खुशी में नूतन
मैं आधी रात तक जगता रहा...

- बाबू राम धीमान


*****





हमारे अटल जी

जो अटल रहा,अटल है उसका क्या बखान लिखूं,
जिसे अमरत्व प्राप्त हो उसका जीवनदान लिखूं।
जिसने भारतीय भाषाओं को जग में मान देकर,
प्रति करूं खुद को समर्पित थोड़ा सा ज्ञान लिखूं।।

अटल जी की प्रतिभाओं को सारा जग जानता है,
कोई ऐसा लाल नहीं,जो इस लाल को न पहचानता है।
जिसने पूरे ब्रह्मांड को अपना ही परिवार समझा हो,
अब सच बताओ, मैं उसके बारे में क्या ज्ञान लिखूं।।

हमारे अटल जी आराध्या राम के लिए हनुमान हुए,
हमारे रोगी सनातन धर्म उद्धार के लिए महान हुए।
हमें अज्ञानी बनाए रखने वाले जो इस जग के लोग थे,
उनको अज्ञानी बनाया अटल जी ने क्या हानि लिखूं।।

अटल जी के शब्द अटल होने का प्रमाण देते हैं,
लोकतंत्र भी अटल जी के शब्दों से सजल होते हैं।
देश की कुछ जनता ने हराया हमारे अटल जी को,
जो अटल थे, अटल रहें, क्या देश की शान लिखूं।


- प्रभात सनातनी "राज" गोंडवी



*****




बात समझ में आयी,
पर देर से जरा...

उसने कहा-
रुक जा, ठहर जा, थम जा जरा
बहुत दौड़ लगा ली, संभल जा जरा
कर लिया बहुत अर्पण-समर्पण
अपना भी समर्थन कर ले जरा
कुछ वादे किये थे कभी अपने आप से
इक बार मेरे सामने दोहरा ले जरा
माना कि बचपन और
जवानी ने छोड़ दिया साथ
पर तुम अपना साथ निभा लो जरा
बिखरी पड़ी हो जगह-जगह तुम
चलो उठो! समेटो अपने आप को
बैठो मेरे पास संवार दूं जरा
जिंदगी का सफर चलता रहेगा
जो होना है वो होकर रहेगा
मैंने उसे बीच में टोका-
तुम कौन ?
मेरे सामने तो आओ जरा
वो बोला-
मैं आइना हूँ, झूठ नहीं बोलूँगा
जो मैंने कहा वो कोई और नहीं कहेगा
तुम क्या थीं, क्या हो, क्या हो सकती हो
बस इतना मंथन कर लो जरा
इक आइना ही आइना दिखा सकता है
ये बात समझ में आयी पर देर से जरा


- गुरदीप कौर


*****





नदी!
तुम यूँ ही मुस्कुराते हुए
हँसते-लहराते हुए
मेरे गाँव जाना
मेरे पिता जो वृद्ध हैं
उनके ख्वाब सब
मेरे लिए अब तक युवा हैं
मेरी राह तकते हुए
होंगे द्वार पर अब तक खड़े
वहीं बिखरी बालों वाली सभी उजले
चिड़चिड़ी सी,क्रोध वाली
दुआओं से सींचने को तैयार प्रतिपल
मेरी माँ भी मिलेगी
व्यस्त होगी वह रसोई में
डुभकी बनाती
मेरे लिए उम्मीद के सपने संजोती
बहती हुई उस देहरी पर जाना
छूना उनके पाँव
मेरा हाल कहना
फिर तुम लौट आना
उस जल से अपने सिर को धोकर
धन्य हो जाऊँगा मैं
शहर की इन बेचैन गलियों में
मुझे सब याद आते हैं
दिन बुरे अच्छे सभी
खुद को जताते हैं
अस्तित्त्व का हर पल कराकर बोध मुझको
जी भर सताते हैं
नदी!
अपने साथ ठंडी हवाओं को ले जाना
शीतलता से अवगत कराना
सभी 'अपनों' को
पल भर बैठना उस आँगन में
जहाँ मैं बैठा करता था
सबका कुशल क्षेम जानना
चाय की चुस्कियों का आनंद भी लेना
भूलना मत,ना मत कहना
सबकी बातों के साथ चाय का स्वाद
ऐसा लगेगा जिसे कभी भूलना
संभव नहीं होगा।
मिलना सबसे हृदय से
लौटना फिर शहर में बसे
कृत्रिम गाँव की ओर
उन मधुर अनुभवों को जीते हुए
झूमते हुए आना
मुझसे मिलना, बताना अनुभव सारे
जिन्हें लम्बे अरसे से मैं
चाहकर भी
जी नहीं पाया।


- अनिल कुमार मिश्र



*****





जवाब दो साहेब अब सवाल का, पूछता है भारत
मसनद नशी क्यूँ हुए पर्दा नशी काफूर हुई महारत

शिक्षा चिकित्सा सुरक्षा शून्य के निशान पर
हिँसा है बड़ी उफान पर देश भारी नुक़सान पर

युवा सारे सड़कों में है उग्र हुए क्यूँ भड़के से है
बहन बेटी की अस्मत अब हर घड़ी खतरे में है

ओ गुरुओं के गुरु राष्ट्र निर्माता कब लाल आँख दिखाओगे
हैं सवालों पे सवाल आप जवाब कब देनें हमको आओगे

हैं सवालों पे सवाल आप जवाब कब देनें हमको.....


- नरेन्द्र सोनकर बरेली


*****





घर की लक्ष्मी या नौकरानी ?
कहते हैं-
"बहू तो घर की लक्ष्मी होती है!"
लेकिन पूछो ज़रा-
क्या लक्ष्मी रोज़ 5 बजे उठकर
सबका टिफ़िन बनाती है ?
क्या लक्ष्मी
बिना थके, बिना रुके
किचन से लेकर कमरे तक
झाड़ू-पोंछा,
बर्तन-कपड़े सब संभालती है ?
क्या लक्ष्मी को
अपनी पसंद का खाना
बिना तानों के मिल पाता है ?
क्यों नहीं
वो 'लक्ष्मी' बैठ सकती
सोफ़े पर चाय लेकर ?
क्यों उसे
छुट्टी नहीं मिलती-
ना बीमारी में, ना पीड़ा में,
ना ही त्योहारों में ?
सच कहें तो-
उस "घर की लक्ष्मी" का सम्मान
सिर्फ़ शब्दों तक सीमित है।
असल में वो
बिना वेतन की पूर्णकालिक नौकरानी है,
जिसे न तो ‘काम’ माना जाता है,
और न ही ‘थकान’ समझी जाती है।
जब कोई महिला
अपने हक़ की बात करती है,
तो सुनने को मिलता है-
"इतना सब करने के बाद भी
ये क्या कम पड़ रहा है ?"
कम पड़ रही है-
इज़्ज़त.. बराबरी..!
और अपनी मर्ज़ी से जीने की आज़ादी।
तो अगली बार
किसी महिला को
"घर की लक्ष्मी" कहने से पहले
सुनिश्चित कर लेना-
कि वो घर में देवी की
तरह पूजी जा रही है
या बस कामवाली की
तरह इस्तेमाल की जा रही है।


- प्रीती जायसवाल



*****






सर्दियाॅं पास हैं, तो वसंत भी दूर नहीं

अभी ठिठुर रहे हैं शब्द
अपने भीतर अपने ताप के लिए
तंबू तने हैं घने-सूने जॅंगलों में
पीने के पानी की कमी है चहूॅं-ओर
सरकारें सेंक रही हैं मुर्गे और
भेड़ेंऔर तीतर वग़ैरह
बकरियाॅं मिमिया रही हैं समर्थन में
चूहे लिख रहे हैं प्रशस्तियाॅं और प्रार्थना-पत्र
खेतों में लहलहा रहा है
अकाल जैसा ही कुछ-कुछ
नालियों में विचार और व्यवहारिकताऍं
सभी दुबके हैं अभी ओढ़कर कंबल
जाग रही हैं, झाॅंक रही हैं बहते जल में
झिलमिल-झिलमिल
गिलहरियाॅं, तितलियाॅं और चींटियाॅं
शेरों को, मगरमच्छों को,हो रहा है अजीर्ण
सर्दियाॅं पास हैं, तो वसंत भी दूर नहीं
साॅंसत में हैं प्राण प्रायः...


- राजकुमार कुम्भज


*****





खामोशियां
न सूखे पत्तो की सरसराहट होगा
न बर्फ की चट्टाने होगी
न ही ठंड से ठिठुरेंगे।
न सूर्य की तपती लौ होगी
जिससे शरीर झुलसेगा।
न बारिश की बूंदे होगी
जिससे कपड़े भीगेंगे।

न पेड़ होंगे न पंछी होगी
जिसकी जिसकी कलरव सुनेंगे।
न समंदर होगा न लहरे होंगी
जिसमें डूबेगी जहाज।
न फूल खिलेंगे न देखेंगे
जिसकी खुशबू महसूस करेंगे।

न चंद्रमा होगा न रात होगी
जिसकी शीतलता बिस्तर तक
पहुंचेगी।
न जंगल होगा न झाड़ियां होगी
जिसमें भूलने और जानवरों से
डरने की कोई खौफ होगा।

न कोई लाइब्रेरी होगी
न विश्वविद्यालय होगा
जहां पर विज्ञान , दर्शनशास्र
न खगोलीय तारा मंडल होगा
जिसका शोध करेंगे।
हर तरफ अंधेरा होगा
हर तरफ खंडहर होगा।

चैन की नीद में सोएंगे
न मधुर संगीत होगी
न कही अज़ान होगा
न कही मंदिर की घंटियां
सुनाई देंगी।

बोलना चाहेंगे पर बोल न पाएंगे
नीद से उतना चाहेगी पर उठ न पाएंगे
भागना चाहेगी पर भाग नहीं पाएंगे।


- सदानंद गाजीपुरी


*****





परचम

बेटियां सिर्फ आज ही आसमान नहीं छू सकती,
सदियों से उन्होंने योग्यता का परचम लहराया है।

बेटों से चलता है गर वंश का नाम,
बेटियों बिना भला क्या ये संभव हो पाया है ?

बेटों ने गर किया कुल का नाम रोशन,
बेटियों ने भी दो पीढ़ियों को चमकाया है।

वीर राणा प्रताप ने दुश्मन को धूल चटाई थी,
तो मनु ने भी रानी लक्ष्मी बाई बन मान बढ़ाया है।

प्रभु राम ने निभाया गर वचन पिता का,
अग्निपरीक्षा दे सीता ने गर्व से शीश उठाया है।

जब संकट पड़ा दशरथ पर देवासुर युद्ध में,
कैकई ने रथ चला दशरथ का साथ निभाया है।

नरेंद्र ने विवेकानंद बन धर्म ध्वज को लहराया है,
स्त्री जागृति प्रतीक सावित्री बाई फुले ने पाया है।

ए पी जे अब्दुल कलाम थे मिसाइल मैन,
मिसाइल वूमेन का दर्ज़ा टेसी थॉमस ने पाया है।

बेटियां बेटे हैं एक दूजे की पूरक जगत में,
बिन राखी सूने हाथ ने भला क्या मान पाया है।

मां बाप,भाई बहन,पति पत्नी,साम्य है सृष्टि का,
बिन इक दूजे भला क्या ये जगत चल पाया है ?


- राज कुमार कौंडल



*****




दिल नहीं लगाना चाहिए

दिलजलों की महफ़िल में भी जाना चाहिए,
उन्हें अपना भी किस्सा सुनाना चाहिए।

जुदा होने पर कैसे जीना है आगे,
ये राज़ भी तो ज़रा बताना चाहिए।

तकलीफें ही देती हैं हर बेईमान मोहब्बत,
किसी से इतना दिल नहीं लगाना चाहिए।

ग़मों के साये में कोई साकी ना बन जाए,
बस इसी बात को उन्हें समझाना चाहिए।

कतरा-कतरा आँखों का होता है अनमोल,
इन्हें ऐसे ही नहीं किसी पर बहाना चाहिए।

माशुकाएँ तो और भी मिलेंगी इस जहां में,
ख़ुद को किसी क़ाबिल तो बनाना चाहिए।

माना कि उदास है वो यादों के साये में,
देकर हौसला उन्हें गले से लगाना चाहिए।

पास हैं अभी और ज़िंदा रहने के ज़रिया,
बस ज़िंदगी जीने का हुनर आना चाहिए।


- आनन्द कुमार



*****





दोहे

सीधे सांच से सब लडैं
निकृष्ट से लडैं न कोय।
जो निकृष्ट से लड़ पड़ै
तब दुःख काहे को होय।

राजनीति में हिंद की
मचा रखी दुर्गंध।
टिड्डी मधु का पान करै
ताक रहे मकरन्द।

सुरभि ठण्ड में ठिठुर रही
पक-डण्डी पर बिन काऊ।
श्वान लेत आनंद हैं
घर में तुम्हें बताऊं।


- रेखा शर्मा



*****




उत्कर्ष का सृजन

अपने उत्कर्ष की गाथा,
हमें ही लिखनी होती है।

श्रेष्ठ जनों की छाया से
सफलता नहीं मिलती है।

पुरुषार्थ की अग्नि जला,
स्वयं को तपाना होता है।
जो पाना है इस जीवन में,
वह खुद ही पाना होता है।

यह क्षण है- इसी पल कर्म कर,
कल की आस न बाँधो तुम।
जो हाथ लगे वह काम पकड़,
पूरा मन उसमें साधो तुम।

लोग क्या सोचें, छोड़ो यह,
यह बोझ न मन में रखो।
प्रशंसा-निंदा, मान-अपमान,
इनसे आगे बढ़कर चलो।

अपने कर्तव्य-पथ पर अडिग रह,
नज़रों की चिंता त्यागो।
सम्मान मिलेगा या न मिले,
इस गणना से मन भागो।

विचार, साधन, अवसर जो मिले,
उनका पूर्ण उपयोग करो।

जीवन का अर्थ उतना ही है,
जितना तुम खुद सृजन करो।


- नरेंद्र मंघनानी


*****




हाँ ऐसी ही हूँ मैं!

नहीं आता मुझे बनावटीपन दिखाना
उल्टे-सीधे किस्से-कहानियां बनाना

झूठी बातों को सुनकर ताली बजाना
पाने को वाहवाही गलत करना कराना

शहद में शब्द लपेटकर तंज कस जाना
फिर भी, जिसकी जैसी समझ में आये

कभी उलझी और कभी सुलझी सी
हाँ ऐसी ही हूँ मैं!


- गीता सरीन


*****




दिल की आरजू

मचल रहा है मेरे दिल की आरजू
गीत मिलन की गाओ री कलियाँ
अय चंचल अल्हड़ उड़ती हवा
पैरों में बाँध छनकाओ पायलिया

अमुवा की डाली पे कोयलिया काली
कुहू कूहू गाती है प्रीत की पिरितिया
चकोर भी पूनम की चाँद की चाँदनी में
भूला गई सुध बुध सारी बीती वो रतिया.

रे पपीहा तुँ भी बात कर मना ले अपनी
रूठा जो तेरा मन की प्रेमी पड़ोसिया
कहो आवाज लगाओ तुँ उनको अब
कहाँ छुपा है गुमनाम बैरी रंग रसिया

गिले शिकवे को कह दो आज अलविदा
मेरे दर पे ना कभी आने वो कभी पाये
मेरी पर्ण कुटी रूपी आशियाना में
गम की जादू ना दिखला कर अब जाये

ना जाने कौन सा पल हो जाये कयामत
ना जाने कौन सी आनी है कोई आफत
चलो भूल जाये जो कल तक बीता था
खो जाना है एक दूजै में दिखा कर शराफत


- उदय किशोर साह


*****



लघुकथाः तसल्ली


शाम के तकरीबन 7 बज रहे थे। आज़ की पांचवीं पार्सल डिलीवरी कर तेज़ी से वापस स्टोर की ओर लौट रहा था। आमतौर पर शाम के इस वक्त लाल बिल्डिंग चौक और भालोटिया रोड पर भीड़ अपने शबाब पर होती है। लेकिन रोजाना ऐसे माहौल से गुज़रकर बाइक को सलीके से पार करने की हममें दक्षता आ गई है। सभी राइडर्स इस जगह को जल्दी से पार कर जाने पर खुद को विजयी महसूस करते हैं।





मैं भी लाल बिल्डिंग चौक पार कर विजयी मुस्कान के साथ आदित्यपुर-कांड्रा एक्सप्रेस वे पर चढ़ते ही एक उत्तेजना के साथ एक्सीलेटर को कसता चला गया। अभी केडिया चौक पार करने ही वाला था कि अचानक से मेरी नज़र उस छोटे से मासूम पिल्ले पर पड़ी जो डिवाइडर के बीच में खड़ा कभी इस ओर की सड़क तो कभी उस ओर की सड़क पर आधा कूदकर जाता, फिर तेज़ रफ़्तार गाड़ियों का रेला देखकर डर से वापस डिवाइडर पर चढ़ जाता।

मैं अपनी तेज़ रफ़्तार के कारण थोड़ा-सा आगे बढ़ चुका था लेकिन महज़ तीन-चार सेकेंड के भीतर जो मेरे मानस पटल पर कौंधा उसने मुझे बाइक रोकने पर मजबूर कर दिया। मुझे अपने मार्ग गुरू का वो कथन याद आ गया जिसमें कहा गया है कि पातक यानि पाप के तीन स्तर होते हैं। ऐसा काम जो नहीं करना चाहिए वो कर दिया।

उदाहरणार्थ किसी की हत्या करना,हाथ काट देना या चोरी करना आदि पातक की श्रेणी में आते हैं। दूसरे स्तर का पाप है अतिपातक! मतलब ऐसा काम जो करना चाहिए था और नहीं किया वह अतिपातक है। जैसे किसी जरूरतमंद या बेबस इंसान की मदद करनी चाहिए थी और मौके पर मौजूद रहकर भी नहीं किया तो यह अतिपातक है।

तीसरे स्तर का पाप ऐसे कार्य को कहा जाता है जो एक उदाहरण छोड़ जाता है। आने वाले समय में भी उससे लोग प्रेरित होकर उसकी युगों-युगों तक पुनरावृत्ति करते हैं।इसे कहा जाता है महापातक! उदाहरणार्थ रावण ने साधु के वेश में आकर सीता का हरण किया। यदि वह अपने असली रूप में आकर सीता का हरण करता तो यह केवल पातक होता।

लेकिन चूंकि उसने साधु के वेश में सीता का हरण किया तो उसने समाज में एक नया तरीका ईजाद कर दिया अपहरण का कि इस प्रकार वेश बदलकर भी अपहरण किया जा सकता है। जिसकी पुनरावृत्ति अपराधी लोग युगों-युगों तक करते आ रहे हैं।





खैर बाइक रोकने से पहले के करीब तीन-चार सेकेंड में मेरे दिमाग ने अहसास कर लिया था कि मैं क्या कर रहा हूं। उस मासूम से पिल्ले के लिए मेरे कुछ मिनट देना कर्तव्य है जिससे उसकी जान बच सकती है। वरना हो सकता है रोड पर सरपट दौड़ती गाड़ियां क्या पता उतनी संजीदगी न दिखाएं और उसे रौंदते हुए चले जाएं। शाय़द उसे मेरी ज़रूरत है और ऐसे में मैं नहीं रुका तो यह द्वितीय श्रेणी का पाप यानि अतिपातक हो जाएगा। और यूं भी यह मेरी पार्ट टाइम जॉब है, थोड़ा वक्त बर्बाद भी हो गया तो क्या ही हो जाएगा।

मैं बाइक खड़ी कर सीधे डिवाइडर पर जा पहुंचा। एक बार लगा कि पकड़ कर सीधे उसे सर्विस लेन के बाहर छोड़ आऊं। लेकिन वह बिल्कुल भी छोटा नहीं था इसलिए थोड़ा सा डर भी था कि कहीं काट न ले मुझे। मुझे अपनी ओर बढ़ता देख वह फ़िर से कभी सड़क पर तो कभी डिवाइडर पर भागदौड़ करने लगा। क़रीब दस मिनट तक मैं उससे कबड्डी-कबड्डी खेलकर परेशान हो चुका था। इस बीच मुझे देखकर एक फल बेचकर लौट रहे ठेले वाले ने भी अपना ठेला किनारे लगाकर मेरी मदद करने में जुट गया।






अब हम दो लोग मिलकर उसे एक्सप्रेस वे से बाहर ले जाने की कोशिश करने लगे। लेकिन मजाल है कि वो पिल्ला हमारे इरादे को समझ पाए। इस फेर में यह भी डर था कि हमें देखकर भागते हुए सचमुच किसी गाड़ी की चपेट में आ गया तो "रक्षा में हत्या" हो जाएगी।

क़रीब बीस -पच्चीस मिनट की आपाधापी के बाद वह मुख्य सड़क पर ही खड़ी एक कार के नीचे जाकर दुबक गया। परेशान ठेलेवाले ने हताश होकर मुझसे कहा- "जाने दीजिए भैया! इसको इसका काल खींच रहा है, हमलोग बचा नहीं पाएंगे। मुसीबत ये थी कि दोनों ओर आसपास कोई कटिंग भी नहीं थी जिससे वह पिल्ला मुख्य सड़क से सर्विस लेन पर जा सके। यानि उसे मुख्य सड़क पर ही लगभग आधा किलोमीटर ले जाने के बाद ही कटिंग थी। मैं भी कहां हार मानने वाला था।

उसे किसी तरह कार के नीचे से डांटकर बाहर निकाला। फिर ठेलेवाले की मदद से मुख्य सड़क के ही बिल्कुल किनारे-किनारे कैरी करते हुए उसे गम्हारिया प्रखंड कार्यालय के गेट तक ले गया। वहां से उसे तेज़ी से भगाते हुए कार्यालय कैंपस के काफी भीतर तक खदेड़कर आया। पूरे घटनाक्रम में कड़ाके की ठंड के बावजूद पसीना छूट गया था। लेकिन जब उसे खदेड़कर पैदल अपनी बाइक की ओर लौटने लगा तो हवाओं के साथ ठंड पड़ते पसीने के साथ ही दिल को भी ठंडक पहुंच रही थी। मन में एक तसल्ली थी कि उस पिल्ले की रक्षा का जो अवसर ईश्वर ने प्रदान किया उसे मैंने पूरा किया।






हमारे साथ दैनिक जीवन में न जाने कितने ही ऐसे मौके रोज़ाना आते हैं। कई बार हम उसे हल्के में लेते हुए नज़रंदाज़ कर आगे बढ़ जाते हैं। लेकिन आग्रह है सभी से कि कभी भी ऐसे मौकों को नज़रंदाज़ न करें। जहां आप सक्षम हों और संभव हो तो थोड़ा सा वक्त निकालकर जरूरतमंदों की मदद ज़रूर करें चाहे वो इंसान हों या पशु-पक्षी। दावा करता हूं कि इससे कोई प्रत्यक्ष लाभ तो नहीं होगा लेकिन मन को एक अलौकिक तसल्ली मिलेगी।


- कुणाल


01 January 2026

नववर्ष- 2026 की प्रमुख रचनाएँ पढ़िए



*****





नववर्ष उम्मीदों का इक नया पैगाम

अब एक नया साल फिर है आया,
वादों का वही पुलिंदा फिर है लाया।

छूटे वादे जिन्हें इस साल नहीं था निभाया,
उन्हें पूरा करने का इक मौका फिर है आया।

नई उमंग नई ऊर्जा नया अहसास है लाया,
नया साल नई ताजगी संकल्पों संग है आया।

देखो फिर आलस में आकर न करना जाया,
मुश्किल से ये मौका दोबारा सबके हाथ है आया।

गिले शिकवे मिटा क्या हमने सबको गले लगाया,
जिन्हें हमने वक्त बेवक्त वजह बेवजह ही सताया।

सबके दिलों में छाए खुशियों का हसीन साया,
सबके हिस्से ये वक्त का बसंत फिर है आया।

इस बरस हमने जीवन में क्या खोया क्या पाया,
हर बशर हो सुखी जग में दूर रहे गमों का साया।

आओ मिलकर करें स्वागत इस नववर्ष का,
ये नववर्ष उम्मीदों का इक नया पैगाम है लाया।


- राज कुमार कौंडल


*****





नववर्ष में भुला दो

नववर्ष में भुला दो, सारे गिले-शिकवे
बीते वर्ष की बातों से, क्यों हम रोये
जो बीत गयी है, वो बात चली गयी
उसे ना दुहराया, देखो नववर्ष आ गयी है
दो-चार दिन की ही, ये जीवन हमारी है
सोचो सबकी भला हो, बात बहुत प्यारी है

क्या लेकर आये हो, क्या लेकर तुम जाओगे
शब्द तो छोटे हैं, अर्थ समझो तब जानोगे
एक दूजे से मिल-जुल कर, नयी शुरुआत करें
खुशियां दे, गम बांटे, सबों में प्रेम भाव भरें

तेरा है ,मेरा है, ये गीत अब पुरानी कर दें
यहाँ, सबका है, सबों से हैं, यही मन में सब्र दें
सिर्फ वर्ष बदलने की, खुशियाँ ना मनायें
हर पल, हर दिन-महीना बीते, ये भी नव ही गिनायें

मिलने-मिलाने वक्त बीतने का, कोई मौक ना छोड़े
हर पल को शुभ मान, सबों को अपनी ओर मोड़े
नया जोश, नयी उम्मीद, नये उमंग, जीवन में लायें
आओ नववर्ष में गिले-शिकवे भुला कर,जश्न मनायें


- चुन्नू साहा


*****




नववर्ष का हो रहा आगमन
मन है मुदित,हृदय है प्रफुल्लित
हर ओर नई उमंग है, नव उल्लास है,
नवीन आशाएं हैं, नवीन अपेक्षाएं हैं
नवचिंतन है, नवऊर्जा है
नववर्ष का हो रहा आगमन
बीता वक्त ,बीता साल था
उतार और चढ़ाव का
जय और पराजय का
गम और खुशी का
हर्ष और शोक का संमिश्रण
नव वर्ष का हो रहा आगमन
बीता साल क्या-क्या सीखा गया
बीता साल बहुत कुछ सीखा गया
कौन है अपना,कौन बेगाना
यह भेद करना, हमें बता गया
किस पर कर सकते हो एतवार
कौन है तुम्हारा सच्चा यार
कौन करता है तुमसे हृदय से प्यार
यह सब हमें बता गया
नव वर्ष का हो रहा आगमन
नव वर्ष हंसी और खुशी लेकर आये
सब रहें हर्षित और उल्लसित
ईश्वर से है करबद्ध प्रार्थना
इतनी शक्ति देना मुझे कि
औरों के आंसू पोंछ सकूँ
औरों के गम चुरा सकूं
जहां खो गई है मुस्कुराहटें
उन पाषाणों पर आनंद एवं
जीवटता को प्रतिबिम्बित कर सकूँ
नव वर्ष का हो रहा आगमन


- प्रवीण कुमार



*****




नव वर्ष की बेला

आज एक और नववर्ष का आगमन हुआ
खुशियों ने फिर आसमान है छुआ।
मन  हर्षित और प्रफुल्लित सा हुआ
मांगता है प्रत्येक जन के लिए दुआ।

कर रहा है एक नववर्ष की कामना 
खुशियां ही खुशियां मिले कष्ट से न हो सामना।
गत वर्ष में जो मुकाम हासिल नहीं हुआ
प्राप्त हो, करते हैं बस यही  दुआ।

अपनों से मिलने का सिलसिला चलता रहे
बिछड़े न कभी अपने  यही हर मन कहे।
गत वर्ष कुछ ख्वाब अधूरे रहे 
जज़्बात भी रह गए कुछ अनकहे।

अबके वर्ष कोई सपना अधूरा न रहे 
कहे  हर कोई चहुं ओर खुशहाली रहे।
स्वस्थ,निरोग जीवन व्यतीत करें सभी
सफलता कदम चूमे असफलता न मिले कभी।


- विनोद वर्मा


*****




उम्मीदों का नया साल

नई उम्मीदों का साल आ रहा है
गुजरा जो जैसे वो साल जा रहा है
कुछ दोस्त रिश्ते बिछड़ गए
कुछ नए लोग मिलेंगे
नई उम्मीदों का प्रस्फुटन होगा
निकलेगा नया सूरज
नई ईबारत लिखेगा
आने जाने की परंपरा है
ये तो लगा रहेगा
कुछ अच्छा करने का
प्रण लें हम
करें नित्यकर्म निष्काम
निः स्वार्थ!


- मनोज कौशल


*****





नव वर्ष- 2026

साल बदल रहा है, तुम नहीं बदलना,
जीवन है संघर्ष, देखो ज़रा संभलना!

अधूरी हैं ख़्वाहिश, तन्हा है सफ़र,
हाथ पकड़ कर मेरा, संग-संग चलना!

हो रही है रात, सर्द हवाओं से भरपूर,
घने कोहरे में, सूरज की तरह जलना!

दिसम्बर ने जाते हुए, कहा है कान में,
जनवरी में जाकर हमको मत भूलना!

देखें हैं आँखों ने उम्मीदों भरे सपने,
इन सपनों का, हक़ीक़त में पिघलना!

नूतन वर्ष की नई, अलबेली फ़िज़ाएँ,
शुरू हो गया, इस दिल का मचलना!

हर ग़म भुलाकर आओ एक हो जाएं,
ज़रुरी है अब, दुआओं का निकलना।


- आनन्द कुमार


*****




अलविदा 2025

सन 2025 के दिन गए,
नए साल के दिन आए,
लाए ढेर सारी उम्मीदें,
खुशियाँ अत्यधिक सजाए।
2025 ने साथ दिया,
बहुत कुछ सिखाया,
कुछ खुशियाँ दी,
कुछ दर्द भी छोड़ा।

जो बीत गया, उसे जाने दो,
नए साल में आगे बढ़ने दो।
गलतियों से सीखो, हौसला रखो,
जीवन की राह में खुशियाँ मिलें।

नए साल में सपने नए होंगे,
लाएंगे खुशियाँ, नए रंग होंगे।
हिम्मत रखो, आगे बढ़ो,
जीवन की कहानी तुम लिखो।

साल 2025, अलविदा कह दो,
2026 को गले लगाओ।
नई उम्मीदें, नए सपने,
नए साल में सब कुछ होगा माने।


- कैप्टन डॉ. जय महलवाल 'अनजान'


*****




मुबारक हो नववर्ष

बीत गया धीरे-धीरे गतवर्ष, देकर कई अनुभव,
किसी का हुआ बिछोह,मिलन हुआ किसी का संभव।
टूटे कई घरौंदे, और बने नये भी कई आशियाने,
दिल से स्वागत करें हम नववर्ष का गाकर खुशी के तराने।

बाढ़ का भी देख लिया हमने खौफनाक मंजर,
उपजाऊ जमीन को देखा फिर बनते हमने बंजर।
देखे दौलतमंद लोग भी छूते हुए अर्श से फर्श,
फिर से नई मंजिलें तलाशने आओ मनाएं नववर्ष।

मन से मिटा दें गिले शिकवे, दुश्मनी, वैर भाव,
ईर्ष्या, द्वेष को जला, स्नेह सम्मान से रखें समभाव।
सांप्रदायिकता,जाति- पाति का भेद त्याग दें सहर्ष,
हर मानव मन में एकता का सूत्र हो, कुछ ऐसा करें इस नववर्ष।

पर्यावरण की स्वच्छता, शिष्टाचार को व्यवहार में लाएं,
कर्तव्यनिष्ठा, आत्मनिर्भरता, स्वरोजगार, कृषि को अपनाएं।
देशभक्ति, सत्यनिष्ठा को आत्मसात कर, आत्मा को करें स्पर्श,
सुख समृद्धि की बयार बहे नित करें प्रगति इस नववर्ष।

कर्म करें ऐसे हम,अमीर गरीब में पटती खाई हो जाए कम,
शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं सभी को एकसम।
प्रसन्नता का वातावरण हो और करें सभी जीवन संघर्ष,
सभी देशवासियों को मुबारक हो मुबारक हो ये नववर्ष।


- लता कुमारी धीमान


*****




नया साल

नए साल की शुरुआत
हे!माँ काली
तेरे विश्वास पर करता हूँ।
मानता हूँ
कि मैं खास नहीं
मगर तेरे ऐतबार पर
नए साल पर
एक नई शुरुआत करता हूँ।
छोड़ चुके हैं जो लोग
उनको भूलाने की एक
कोशिश करता हूँ,
और जो आ रहे हैं जीवन में
बनकर तेरा साया
उनको अपनाने की कोशिश करता हूँ।
ढूंढता रहा हर साल
हर इंसान में
खुशियां अपनी
अब शून्य में लीन होकर
गुरुदेव शिव पर ऐतबार करता हूँ।


- डॉ. राजीव डोगरा


*****




नया साल

नया साल आने को है,
पुराना साल जाने को है,
कैसी विचित्र सी बात है-
पुराने के जाने का ग़म मनाएँ
या नए के आने की ख़ुशी में मुस्कराएँ।
पुराने साल के जाने का दर्द है,
क्योंकि उससे जुड़ी अनगिनत यादें हैं,
कुछ हँसी, कुछ आँसू,
कुछ अपने, कुछ छूटे हुए सपने हैं।
नए साल की ख़ुशी इसलिए है,
कि वह ढेरों खुशियाँ लाने वाला है,
नई उम्मीदें, नए अरमान,
जीवन को फिर से सजाने वाला है।
आओ, नए साल का स्वागत करें,
खुशियों की सौगात को अपनाएँ,
पुराने का दुःख तो रहेगा ही,
क्योंकि यही जीवन का नियम है-
जो आता है,
उसे एक दिन जाना होता है।


- गरिमा लखनवी


*****





नया साल नया संकल्प

नये साल में नये संकल्प करें
अपने परिवेश को हराभरा करें
जहाँ भी दिखे गंदगी फैली हुई
मिट्टी से गड्ढे भरें स्वच्छता करें

जो अनपढ़ हैं गली मोहल्ले में
उन्हें पढ़ाएं लिखाएं आगे बढ़ाएं
समाज को करें शिक्षित मिलकर
फिर नये साल की खुशियां मनाएं

नये साल में बढ़ती महंगाई रोकें
युवाओं को रोजगार से जोड़ें
जो बैठे हताश होकर घरों में
उन्हें छोटे छोटे उधोगो से जोड़ें

नई उमंग के संग नववर्ष मनाएं
अतीत की घटनाएं भुलाकर
नये विचारों के साथ आगे बढ़ें
नये संकल्प लेकर नये काम करें

ज्ञान विज्ञान कला में नाम कमाएं
खेलकूद में अपना नाम चमकाएं
नये साल में विश्व पटल पर जा
भारत का तिरंगा उँचा लहराएं


- डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित


*****




निरंतर

समय, एक ही लय और गति से
निरंतर चलती रहती है,
एक एक क्षण से महाशून्य की ओर।
असंख्य इतिहास इस पृथ्वी के परतों में
जमा हो रहा है।
और मानव देह के भीतर अदृश्य मन के पिंजरे में
बंदी है कई अमूल्य स्मृतियां।
जो खुली खिड़की से केवल आकाश देखते है
पर खुले दरवाजे से बाहर कभी खो नहीं जाते।
आज फिर अवकाश ले लिया
365 दिनों का वो झुंड, जिसका नाम था 2025।
फिर हम सब सवार हो गए 2026 की समय गाड़ी पर
इस उम्मीद से कि यात्रा सफल और मंगलमय हो।


- सुतपा घोष


*****




नया साल मुबारक

जिनके अधूरे सपने हैं,
और पूरे हुए जिनके सपने हैं,
जिनका सारा जहां अपना कहने को,
पर साथ नहीं कोई तैयार रहने को।

नया साल मुबारक उनको,
जिनके लिए सब रिश्ते व्यापार हैं,
उनको भी जो अपनों के खातिर,
जान हथेली पर लिया तैयार हैं।

मुबारक हो उनको भी जिनके
पास न रोटी और ना लंगोटी है,
और मुबारक हो जिनको
महल भी लगती छोटी है।

नया साल में मुबारक मेरी
वफादार, प्यारों को।
और दोस्तों में छुपे गद्दारों को।

मुबारक को समाज और देश के
रक्षक को, और लूटेरों,
भ्रष्टाचारी और भक्षक को।

नया साल मुबारक हो हर शहंशाह को,
तीनों जहां के फकीर, और
बादशाह को।

नया साल मुबारक हो लाचार,
कमजोर, असहाय को,
और संग दिल निर्मम कसाई को।

उनको भी जो घूमे, सैर करे हवाई,
और उनको जिनके,
पैरों में न चप्पल और न इस जाड़े में रजाई।

इस नए साल में सभी को बधाई,
फिर से नई साल नए उम्मीद लाई।

नया साल मुबारक


- रोशन कुमार झा



*****





नव वर्ष मंगलमय हो नव वर्ष की बेला है आई सबको नव वर्ष की बधाई लड़ें न आपस में छोटी छोटी बातों पर समझें संस्कृति और भाईचारे की गहराई ऐसा काम करें नव वर्ष में किसी के मन को न पहुँचे ठेस मिल जुल कर रहें हम सारे एक दूजे का बढ़ाएं हौसला करें न कोई क्लेश बच्चों का हो उज्ज्वल भविष्य ऐसा करें हम काम मान बढ़े हम सबका भारत का हो ऊंचा नाम प्रण लें नशे को मिल कर हमने है भगाना नशा बांटने वालों का करना है अब काम तमाम नई पीढ़ी है नया जोश है नई नई है जवानी जोश में होश कहाँ रहता है कर जाते है नादानी होश में भी रहना है और जोश भी कायम रखना है तभी बढ़ेंगे आगे सब मिल कर लिखेंगे नई कहानी न रुकेंगे हम न झुकेंगे हम बस आगे है बढ़ते जाना समय है भारत का अब भारत का परचम है लहराना विश्व तिरंगा बन जायेगा मिलजुल जो करेंगे काम मंजिल हमसे दूर नहीं बस थोड़ा जोर है और लगाना भूल सबसे हो जाती है भूल जाओ आगे बढ़ो काम दूसरों के आओ बुजुर्गों की सेवा करो दूसरों को खुश देखकर बहुत मिलती है मन को खुशी बस अच्छे काम करते रहो ईश्वर से डरो बिछुड़ गए कुछ इस वर्ष कुछ अगले वर्ष जाएंगे अटल सत्य है जानते हैं सभी कि लौट कर नहीं आएंगे अच्छे कर्म जो किये होंगे वही रहेंगे वही साथ जाएंगे याद बहुत करेंगे लेकिन एक खालीपन सा पाएंगे
- रवींद्र कुमार शर्मा


*****




नई खुशियाँ ले आया।

नया साल आया है यार,
दिल को चैन दे गया,
पुराने ग़म भुला दो,
नई खुशियाँ ले आया।

दिल की किताब खोल दो,
हर पन्ना ताज़ा लिखो,
उम्मीदों का दीया जला,
अंधेरा मिटा दो दिल से सारा।

वक्त की रेत बहती जाए,
हर कण सोना बनेगा,
सकारात्मक नज़र से देखो,
जहाँ भी मन का फूल खिलेगा।

प्राणायाम करो अच्छा ही होगा
आयुर्वेद को अपनाओ मेरे यार,
हर साँस में है बसी जिंदगी,
इसे गले लगा लो देदो प्यार।

नया साल मुबारक हो,
ग़ज़ल गीत सी बहे ज़िंदगी,
हर लम्हा जश्न मनाओ,
खुश रहो हमेशा यार।


- डॉ. मुश्ताक़ अहमद


*****