साहित्य चक्र

02 January 2024

नववर्ष- 2024




स्वागत है नववर्ष तुम्हारा,आओ फिर इक बार।
बीत गया यह साल पुराना, देकर खुशी अपार।

मस्तक तिलक लगाकर प्यारे,आना तुम इस बार।
कोई दुखी न रहने पाये,ऐसा दो उपहार।

माँ की ममता मिले सभी को,मिले पिता का प्यार।
जीवन सफल बने सभी का , दुःखों से हो पार।

सौंधी-सौंधी खुशबू लाना,लाना प्यार बहार।
महके दुनिया की फुलवारी,जगत रहे गुलज़ार।

मैं भी महकूँ तुम भी महको, महके हर घर द्वार।
जूही ,चंपा ,बेला बनना, बनना हरसिंगार।

चमक उठे यह सारी दुनिया, ऐसा हो आभिसार।
मन-मन उल्लासित हो सबका,रहे न कोई खार।

कूहू-कूहू कोयल बोले,चातक करे गुहार।
बन बासंती वृद्धा नाचे, जीवन रंग फुहार।

मूक,बधिर भी बोल उठें,सुनकर तेरी पुकार।
ऐसा रंग जमाना प्यारे ,बाँछें खिलें हज़ार।


- अनामिका कली

नये साल के नये हिसाब




आओ... नए साल पर कुछ हिसाब -किताब कर ले ।
 जिंदगी ने लम्हा -लम्हा कितना घटाव दिया।
 उस सब का जोड़ कर ले ।
 जो दर्द कई गुना बढ़ते ही गए।
 आओ... चंद उम्मीदों से उन्हें भाग कर ले ।।
आओ नए साल पर कुछ हिसाब -किताब कर ले ।

जिंदगी बड़ी तेजी से निकल जाती है ।
जबकि लगता है यह गुजराती ही नहीं  है।
इसी बात पर फिर से वहीं बात कर ले।
 घूम -घाम कर,  फिर से उसी घेरे में घूमती है जिंदगी।
हम खड़े किसी त्रिकोण में जिंदगी को, 
फिर से नई उम्मीद से वर्गाकार कर ले ।
आओ नए साल पर कुछ हिसाब -किताब कर ले ।

जो लोग....कहते है।
यह करेंगे... वह करेंगे रेजोल्यूशन तो एक भुलावा  है ।
जबकि हम भी जानते हैं ।
पिछले बीते हुए  तमाम सालों में कौन -सा खंबा उखाड़ डाला है।
आओ फिर भी  ...फिर से एक नई उम्मीद कर ले ।
आओ नए साल पर कुछ हिसाब -किताब कर ले ।

पिछले सालों की बजाय इस साल कुछ नया होगा।
 इसी बात पर पुराने साल को नए साल के स्वागत में विलय कर ले।
 जमा-घटाव तो चलते ही रहेंगे।
अपनी हिम्मत से हर हार को जीत में बदलने का ऐलान कर ले।


                                                         - प्रीति शर्मा 'असीम'


शीर्षक- मां



पल पल बदलती इस दुनियां में
कुछ बातें,कुछ रस्मों रिवाज
और कुछ मुलाकाते
आज भी वहीं ठहरी हुई हैं

जैसे मां का प्यार
चाहे दुनियां इधर की उधर हो जाएं
कभी नहीं बदलता
जब भी घर से बाहर

निकलो तुम
मां दही शक्कर की कटोरी लिए
हमेशा तुम्हें दरवाजे पर खड़ी मिलेगी
और घर लोटते वक्त
मां दरवाजे पर इंतजार करती हुई मिलेगी

जब भी तुम बहुत सुंदर
दिखती हो
मां काला टीका लगाना नहीं भूलती
मां आज भी सहेज कर

रखती है तुम्हारे बचपन की यादें
तुम भूल जाओ
किंतु मां को समर्पित की हुई
तुम्हारी ट्रॉफी को
मां अलमारी में सजा कर रखती हैं

तुम्हारी हर जीत पर
सबसे ज्यादा खुशियां
मां ही तो मनाती हैं
जैसे मां के लिए ये सब रिवाज है
जिन्हें हर मां
बरसों से निभाती नजर आती हैं


- जया वैष्णव, जोधपुर, राजस्थान



नूतन वर्ष का अभिनंदन






चांदनी मुस्कराई तुम्हारे लिए,
वर्णमाला गुनगुनाई तुम्हारे लिए,
तुम्हारे आगमन पर सखें,
मेरे हृदय की बधाई तुम्हारे लिए।

चांद बन तुम जियो,
नेह की नूतन छुवन बन जियो,
भावना से भरे इस हृदय में,
तुम हमारे नयन में सुमन बन जियो।

मेरे परिचय बन तुम जियो,
मेरा मुकाम बन तुम जियो,
जिंदगी अपनी पूरी सफल बन जियो,
नूतन वर्ष का अभिनंदन कर,
अपने कर्मों से अभिमान बन जियो।

गीत बन तुम जियो,
गजल बन तुम जियो,
अनुपम सृजन का भाव बन जियो,
प्यार की राशि मन में समेटे हुए,
तुम हमारे लिए राशिफल बन जियो।


                                                - अंशिता दुबे त्रिपाठी


31 December 2023

नया साल-नई उम्मीदें, नए सपने-नए लक्ष्य





नया साल हमारे लिए नया समय ही नहीं बल्कि नए समय के साथ नई उम्मीदें, नए सपने, नया लक्ष्य, नए विचार और नए इरादे लेकर आता है। हम सभी को नए साल की शुरुआत अच्छे और नेक कामों के साथ करनी चाहिए। नया साल हमारे मन के भीतर आशा की नई किरण जगाता है। नया साल तो हर साल आता है लेकिन क्या कभी हमनें ये सोचने की कोशिश की है कि हमने इस साल क्या नया और खास किया जिससे ये साल हमारे लिए यादगार साल बन जाए। हम अपनी जिंदगी में बहुत से उतार-चढ़ाव का सामना करते हैं और ये जरूरी नहीं है कि हर व्यक्ति के लिए हर साल अच्छा ही जाए या हर साल हर किसी के लिए बुरा ही जाए लेकिन इसका मतलब ये नहीं होता है कि हम बीते कल को भूल जाएं। बीता हुआ कल तो हमें आज के लिए और आने वाले कल के लिए सीख देकर जाता है कि कैसे हम अपने कल को आज से बेहतर बना सकते हैं-

 बीत गया ये साल तो, देकर सुख-दुःख मीत।
क्या पता? क्या है बुना ? नई भोर ने गीत।।
जो खोया वो सोचकर, होना नहीं उदास।
जब तक साँसे ये चले, रख खुशियों की आस।।

हर साल, साल-दर-साल, हम अपने दिल में एक गीत और कदमों में वसंत के साथ नए साल में प्रवेश करते हैं। हमें विश्वास है कि जादुई वर्ष अपने साथ हमारी सभी समस्याओं का समाधान लाएगा और हमारी सभी इच्छाएँ पूरी करेगा। चाहे वह सपनों का घर हो, सपनों का प्रस्ताव हो, सपनों की नौकरी हो, सपनों का साथी हो, सपनों का अवसर हो... और भी बहुत कुछ बेहतर हो।  लेकिन जैसे-जैसे साल शुरू होता है और हम जो कुछ भी सामने आता है उससे निपटते हैं, नए साल की नवीनता, नए संकल्प, नई शुरुआत पहली तिमाही तक लुप्त होने लगती है। वर्ष के मध्य तक हम बहुत अधिक सामान्यता और कई फीकी आशाओं की चपेट में होते  हैं, जो उस वादे से बहुत दूर है जिसके साथ हमने शुरुआत की थी। और आखिरी तिमाही तक हम अपनी वास्तविकता से इतने अभिभूत हो जाते हैं कि हम साल खत्म होने का इंतजार नहीं कर सकते। हम वर्तमान वर्ष को छोड़ते हुए और एक और 'नया साल' मनाने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाते  हैं और शुभकामनाएं बांटते है-

 
बाँट रहे शुभकामना, मंगल हो नववर्ष।
आनंद उत्कर्ष बढ़े, हर चेहरे हो हर्ष।।
गर्वित होकर जिंदगी, लिखे अमर अभिलेख।
सौरभ ऐसी खींचिए, सुंदर जीवन रेख।।

नववर्ष वह समय है जब हमें अचानक लगता है कि, ओह, एक साल बीत गया। हम कुछ पलों के लिए स्तब्ध हो जाते हैं कि समय कितनी जल्दी बीत जाता है, और फिर हम वापिस अपने काम में व्यस्त हो जाते हैं। मजेे की बात यह है कि ऐसा साल में लगभग एक बार तो होता ही है। यदि हम आश्चर्य के इन क्षणों की गहराई में जाएं, तब हम पाएंगे कि हमारे भीतर कुछ ऐसा है जो सभी घटनाओं को साक्षी भाव से देख रहा है। हमारे भीतर का यह साक्षी भाव अपरिवर्तित रहता है और इसीलिए हम समय के साथ बदलती घटनाओं को देख पाते हैं। जीवन की वे सभी घटनाएं जो बीत चुकी हैं, एक स्वप्न बन गई हैं। जीवन के इस स्वप्न-जैसे स्वभाव को समझना ही ज्ञान है। यह स्वप्न अभी इस क्षण भी चल रहा है। जब हम यह बात समझते हैं तब हमारे भीतर से एक प्रबल शक्ति का उदय होता है और फिर घटनाएं व परिस्थितियां हमें हिलाती नहीं हैं। हालांकि, घटनाओं का भी जीवन में अपना महत्व है। हमें घटनाओं से सीखना चाहिए और आगे बढ़ते रहना चाहिए।  नया साल नई उम्मीदें, नए सपने, नए लक्ष्य और नए आइडिया की उम्मीद देता है, इसलिए सभी लोग खुशी से बिना किसी मलाल के  इसका स्वागत करते हैं-

 आते जाते साल है, करना नहीं मलाल।
सौरभ एक दुआ करे, रहे सभी खुशहाल।।
छोटी सी है जिंदगी, बैर भुलाये मीत।
नई भोर का स्वागतम, प्रेम बढ़ाये प्रीत।।

हालाँकि नए साल पर अपनी आशाएँ रखना हमारे लिए बहुत अच्छी बात है, हमें यह समझने की ज़रूरत है कि आशाओं के साथ निराशाएँ भी आती हैं। जीवन द्वंद्व का खेल है और नया साल भी इसका अपवाद नहीं है। यदि हम 'बीते वर्ष' पर ईमानदारी से विचार करें, तो हमें एहसास होगा कि  यह आवश्यक नहीं है कि वर्ष ने वह प्रदान किया हो जो हमने उससे चाहा था, लेकिन इसने हमें कुछ बहुमूल्य सीख और अनुभव अवश्य दिए। ये अलग से बहुत महत्वपूर्ण नहीं लग सकते हैं, लेकिन ये संभवतः प्रकृति का हमें उस उपहार के लिए तैयार करने का तरीका है जो उसने हमारे लिए रखा है जिसे वह अपनी समय सीमा में वितरित करेगी। साथ ही, अगर साल ने हमसे कुछ बहुत कीमती चीज़ छीन ली है, तो निश्चित रूप से उसने उसकी समान मात्रा में भरपाई भी कर दी है। वर्ष के अंत में, हमें एहसास होता है कि हमारी बैलेंस शीट काफी उचित है। तो, आइए हम आने वाले वर्ष में इस विश्वास के साथ प्रवेश करें कि नए साल का जादू यह जानने में निहित है कि चाहे कुछ भी हो, हर निराशा के लिए मुआवजा होगा, हर इच्छा की पूर्ति के लिए एक सीख होगी, दर्द-दुखों का अंत होगा, अपनेपन की धूप होगी-

 छँटे कुहासा मौन का, निखरे मन का रूप।
सब रिश्तों में खिल उठे, अपनेपन की धूप।।
दर्द- दुखों का अंत हो, विपदाएं हो दूर।
कोई भी न हो कहीं,  रोने को मजबूर।।

नए साल पर अपने लिए लक्ष्य निर्धारित कर लें। छात्र हों या नौकरीपेशा, सभी के लिए कोई न कोई लक्ष्य होना जरूरी होता है। भविष्य को बेहतर बनाने के लिए क्या कर सकते हैं और किस दिशा में प्रयास करना है, इन सब का निर्धारण करने के बाद उसे पूरा करने का संकल्प ले लें। आपका संकल्प हमेशा लक्ष्य को पूरा करने की याद दिलाता रहेगा। सभी 'नए साल' को जीवनकाल से  जोड़ते हैं और हमारा जीवनकाल आशाओं और निराशाओं, सफलताओं और असफलताओं, खुशियों और दुखों के बारे में है और यह वर्ष भी कम जादुई नहीं होगा। तो इस वर्ष आप अपने संकल्पों को कैसे पूरा कर सकते हैं?  इस बारे सोच समझकर आगे बढिये, दूसरों से समर्थन मांगें, अपने मित्रों और परिवार से आपका उत्साह बढ़ाने के लिए कहें। उन्हें अपने लक्ष्य बताएं और आप क्या हासिल करना चाहते हैं। अपने लिए एक इनाम प्रणाली बनाएं, अल्पकालिक लक्ष्य निर्धारित करें और उन्हें पूरा करने के लिए स्वयं को पुरस्कृत करें। अपने ऊपर दया कीजिये, कोई भी एकदम सही नहीं होता। अपने आप को कोसने की बजाय गहरी सांस लें और नव उत्कर्ष के प्रयास करते रहें-

 खोल दीजिये राज सब, करिये नव उत्कर्ष।
चेतन अवचेतन खिले, सौरभ इस नववर्ष।।
हँसी-खुशी, सुख-शांति हो, खुशियां हो जीवंत।
मन की सूखी डाल पर, खिले सौरभ बसंत।।

ऐसा माना जाता है कि साल का पहला दिन अगर उत्साह और खुशी के साथ मनाया जाए, तो पूरा साल इसी उत्साह और खुशियों के साथ बीतेगा। हालांकि भारतीय परम्परा के अनुसार नया साल एक नई शुरुआत को दर्शाता है और हमेशा आगे बढऩे की सीख देता है। पुराने साल में हमने जो भी किया, सीखा, सफल या असफल हुए उससे सीख लेकर, एक नई उम्मीद के साथ आगे बढऩा चाहिए। ताकि इस वर्ष की एक सुखद पहचान बने-

 खिली-खिली हो जिंदगी, महक उठे अरमान।
आशा है नव साल की, सुखद बने पहचान।।
छेड़ रही है प्यार की, मीठी-मीठी तान।
नए साल के पँख पर, खुशबू भरे उड़ान।।



                                                                          -प्रियंका सौरभ