साहित्य चक्र

19 December 2016

- नोटबंदी पर मेरी रॉय –

        - नोटबंदी पर मेरी रॉय –


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नोटबंदी के फैसले से जहॉ एक तरफ पूरा देश खुश नजर आ रहा है। तो वहीं विपक्ष नोटबंदी के खिलाफ नारेबाजी कर रहा हैं। वैसे 9 नवंबर की रात 8 बजे जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये फैसला सुनाया कि 500 औऱ 1000 के नोट अब चलन में नहीं रहेंगे तो पूरा देश अचम्भित हो गया। लेकिन जब देश की जनता को इसके नतीजे और लाभ बताएं गए, तो पूरा देश प्रधानमंत्री के इस फैसले का साथ खड़ा नजर आया। मैं भी पीएम मोदी के इस फैसले के साथ हूं, लेकिन मेरे कई सवाल है जो मुझे चैन से नहीं सोने देते हैं। शायद आप भी सोच रहे होंगे। इन्हीं सवालों में मेरा पहला सवाल “ क्या नोटबंदी से कालाधन खत्म हो जाएगा..? और केंद्र सरकार व्यवस्था कब तक करेगीं..? आखिरकार आम जनता कब तक इन मुसीबतों से लड़ती रहेगी। एक सवाल और कहना चाहूंगा कि सरकार ने नोटबंदी तो एक ही पल में कर दी। लेकिन आम जनता की समस्याओं के लिए सरकार ने कोई बड़ा फैसला अभी तक नहीं लिया। जिसके चलते अभी भी बैंकों औऱ एटीएम में लोगों की भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। वैसे में किसी भी राजनीतिक पार्टी औऱ राजनेता से जुड़ा नहीं हूं। मैं तो एक आम व्यक्ति के रुप में अपने विचार आप लोगों तक रख रहा हूं। मेरा मनाना है कि नोटबंदी तो सही फैसला है लेकिन इसे सही तरीके से इस्तेमाल में नहीं लाया गया। जिससे लोगों कि परेशानी दिन-बे-दिन बड़ती जा रही है। मैंने एक आम व्यक्ति के रुप में ये लेखा है। जो मेैंने देखा और सुना उसको मद्नजर रखते हुए मैं उन लोगों की राय आप तक पहुंचा रहा हूं। जो सुबह चार बजे से एटीएम और बैकों के लाइनों में खड़े हैं। उन लोगों में से कुछ लोगों का कहना है कि फैसला तो सही है लेकिन व्यवस्था ठीक नहीं होने के कारण थोड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि ये फैसला बिलकुल ही ठीक नहीं है। वहीं कुछ युवाओं का कहना है कि ये फैसला देश के विकास में बदलाव लाएगा। वहीं कुछ वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि ये फैसला तो ठीक है, लेकिन देश में अभी भी कालाधन पर रोक नहीं लगा पा रही मोदी सरकार जिससे आए दिन कालाधन छुपाने वाले कई गद्दार पकड़े जा रहे हैं। वहीं अगर पीेएम मोदी की बात करें तो उन्हें आम जनता से उम्मीद हैं कि जनता उनके इस फैसले के विरोध में नहीं आ सकते क्योंकि पूरा देश पीएम मोदी के साध खड़ा हैं। चाहे कोई दिल से हो या दिखावे से हो। लेकिन आम जनता पीएम के साध खड़ी दिख रही हैं। जो आप भी देख रहे है, कि देश इस वक्त इतनी बड़ी समस्या से गुजर रहा है, लेकिन आम लोगों में कोई बड़ा विरोध देखने को नहीं मिल रहा है। जिससे ये साबित होता है, कि देश की जनता मोदी के भक्ति में डूबी हुई हैं। उन लोगों से पूछो जिनके अपने अस्पतालों में बीमार पड़े है और वे लोगों कुछ नहीं कर पा रहे है। वहीं जिन लोगों के घर में शादी-विवाह जैसे कार्यक्रम है उनकी क्या हालत हो रही है। ये तो वहीं जान सकते हैं। वहीं एक तरफ देश में करो़ड़ों रुपये छापेमारी में पकड़े जा रहे। जिससे ये साफ हो जाता है कि कालाधन रखने वालों पर कोई लगाम नहीं लग रहीं है। चाहे सरकार कितने ही दांवे क्यों ना कर ले। अभी तक सरकार इस फैसले में नाकाम होती दिख रही हैं। वहीं सरकार ने जब से ये फैसला सुनाया है, तब से सरकार कई बार इन नियमों में बदलाव कर चुकी हैं। जो जनता के लिए मुश्किलों का पहाड़ खड़ा कर रही है। आखिर कब ये स्थिति सामान्य होगी। ये एक बड़ा सवाल बना हुआ है।  

                     संपादक - दीपक कोहली

03 December 2016

नर- नारी

    नर- नारी 

अगर नारी शक्ति है, तो 
पुरुष महाशक्ति है।।

अगर नारी सुंदर है, तो 
पुरुष बलवान है।।

अगर नारी मुरत है, तो
पुरुष सूरत है।।

अगर नारी आत्मा है, तो
पुरुष महात्मा है।।

अगर नारी तन है, तो 
पुरुष धन है।।

अगर नारी देवी है, तो 
पुुरुष देवता है।।

अगर नारी मान है, तो 
पुरुष सम्मान है।।


                    कवि- दीपक कोहली 


                           

29 November 2016

सच हम नहीं - सच तुम नहीं



सच हम नहीं सच तुम नहीं 
सच ये संसार नहीं....।

सच हमारे नैन नहीं, 
सच तुम्हारे नैन नहींं..।
सच तो है ये परमात्मा..।।

सच हम नहीं - सच तुम नहीं 
सच ये संस्कृति नहीं....।।

सच हमारी नियत नहीं , 
सच तुम्हारी नियत नहीं..।
सच तो है ये ईश्वर.....।।

सच हम नहीं - सच तुम नहीं
सच ये प्रकृति नहीं...।।

सच हमारी बात नहीं, 
सच तुम्हारी बात नहीं...।
सच तो ये परमेश्नर है...।।

सच हम नहीं - सच तुम नहीं 
सच ये जगत नहीं..।।

सच हमारी जाति नहीं,
सच तुम्हारी जाति नहीं..।
सच तो ये मानव आत्मा है...।।

                        कवि- दीपक कोहली

#कलयुग की पहचान#

                                #कलयुग की पहचान#


प्राणी में  प्राण नहीं,
मानव में मानवता नहीं।
यहीं कलयुग की पहचान है।।


धर्म में धर्मता नहीं, 
पवित्र में पवित्रता नहीं।
यहीं कलयुग की पहचान है।।

वाणी में सत्य नहीं, 
पहनावे में शर्म नहीं।
यहींं कलयुग की पहचान है।।

पानी में मीठास नहीं, 
भोजन में स्वाद नहीं।
यहीं कलयुग की पहचान है।।

                                    कवि- दीपक कोहली


 
 

24 November 2016

सपा का सफरनामा & मुलायम की राजनीति

             

समाजवादी पार्टी का मुख्या या प्रमुख मुलायम सिंह यादव का राजनीति सफर बहुत ही उतार - चढ़ाव भरा रहा है। 22 नवंबर 1939 में इटावा जिले के सैफई गांव में एक किसान के यहां इनका जन्म हुआ। मुलायम अपने भाई- बहनों में सबसे छोटे है। मुलायम के पांच भाई- बहन है- रतन सिंह, अभयराम सिंह, शिवपाल सिंह, रामगोपाल, कमला देवी। 

वैसे मुलायम सिंह के पिता सुधर सिंह मुलायम को पहलवान बनाना चहते थे। लेकिन मुलायम सिंह तो उत्तरप्रदेश की राजनीति में अपना लोहा मनवाना चहते थे। किसे पता था कि एक किसान का बेटा तीन बार प्रदेश की मुख्यमंत्री बनेगा। मुलायम ने अपना राजनीति सफर जसवंत नगर से शुरु किया। राजनीति में आने से पहले मुलायम सिंह आगरा विश्वविद्दालय से स्नातकोर (एम.ए.) की डिग्री ली और मैनपुरी के जैन इंटर कॉलेज करहल में अध्यापक भी रहे है। मुलायम उन नेताओं में गिने जाते है जो किसानों, पिछड़े वर्ग को महत्वपूर्ण स्थान देते हैं। मुलायम सिंह को जनता प्यार से नेताजी भी कहती है। नेता जी 1967 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर विधानसभा सदस्य बनें। वैसे मुलायम सिंह अपना गुरु डॉ. राम मनोहर लोहिया को मानते है। नेता जी ने लोहिया जी के साथ ही राजनीति में प्रवेश किया था। जिस समय भारतीय लोक दल & भारतीय क्रांति दल राजनीति पार्टी हुआ करती थी। 1968 में लोहिया जी का देहांत हो गया जिसके बाद मुलायम सिंह अकेले और पूरी जिम्मेदारी आ गई। लोहिया जी वो राजनेता थे जिन्होंने उत्तरप्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वैसे कई राजनेताओं का मानना है कि मुलायम के गुरु चौधरी चरण सिंह भी थे। जिन्होंने मुलायम को राजनीति के गुरु सिखाए लेकिन मुलायम ने उन्हें गुरु दक्षिणा के बादले धोखा दिया। ये मेरी अपनी राय नहीं ये उन राजनेताओं का कहना हैं जो मुलायम को बचपन से जानते हैं। 

कभी भारतीय क्रांति दल से चुनाव लड़ने वाले मुलायम सिंह आज खुद अपनी पार्टी के अध्यक्ष है या कहे आज खुद उनकी आपनी पार्टी है। राजनीति में मुलायम ने वो उतार - चढ़ाव देखे हैं जो किसी भी राजनेता ने कभी देखें होंगे। मुलायम सिंह लगातार जसवंत नगर से तीन बार विधायक रहे। जब 1990 में जनता दल टूटा तो मुलायम समाजवादी जनता दल से चुनाव लड़ और जीते भी। 1992 में मुलायम सिंह ने एक पार्टी बनाने का ऐलान किया। जिसका नाम समाजवादी पार्टी रखा गया। जिससे मुलायम के विरोधी पार्टियां उन्हें कमजोर करने में जुट गए। लेकिन फिर भी मुलायम ने हार नहीं मानी और एक बार फिर 5 दिसबंर 1993 को मुख्यमंत्री बने। इससे पहले मुलायम 1989 में सीएम रह चुके थे। 

अगर आज मुलायम सिंह को सपा का भीष्मपित्माह कहां जाए तो गलत नहीं होगा। तीन बार यूपी के सीएम और केंद्र सरकार में रक्षामंत्री रह चुके है मुलायम। इसके अलावा कई पदों पर भी रहे हैं। वैसे मुलायम की पहचान एक धर्मनिरपेक्ष नेता के रुप में की जाती हैं। नेता जी संयुक्त मोर्चा सरकार में रक्षा मंत्री रहे थे। वेृैसे देखें तो मुलायम का केंद्रीय राजनीति में 1996 से प्रवेश हुआ। जब कांग्रेस पार्टी को हरा संयुक्त मोर्चा ने सरकार बनाई। तभी एचडी देवगौड़ा को  प्रधानमंत्री बनाया गया। जबकि मुलायम सिंह का नाम सामने आया था। कुछ नेताओं के विरोध के चलते मुलायम पीएम नहीं बन पाए। 28 मई 2012 को मुलायम सिंह को उनके विचारों और उनकी लोकतंत्र, राष्ट्रवाद सोच के लिए लंदन में अंतर्राष्ट्रीय जूरी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। आज भी विपक्ष प्रदेश में मुलायम सिंह का लोहा मानता है। अब सबकी नज़र 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव पर टिकी है। क्या मुलायम का जादू एक बार फिर देखने को मिलेगा। या फिर बेटे के दाम पर सपा चुनाव लड़ेगी। 




                                    संपादक - दीपक कोहली