साहित्य चक्र

25 August 2022

मानव समाज को धर्म की जरूरत क्यों है ?



समस्त संसार में मानव ही एक ऐसा प्राणी है, जो इस पृथ्वी के जन्म से लेकर अब तक सबसे अधिक बदला है। मानव ने अन्य प्राणियों के मुकाबले अपना रहन-सहन बदला, खानपान बदला, बोली भाषा बदली और तो और इस पृथ्वी को भी अपने ऐशो आराम के लिए बदल दिया। कभी ऊंची ऊंची इमारतें बनाई तो कभी जमीन को खोदकर खनिज पदार्थ निकाले, कभी समुंद्र में पाइप लाइनें बिछाई तो कभी अंतरिक्ष में सैटेलाइट लॉन्च किए। इतना ही नहीं मानव अन्य जीवों की तरह एक जीव है, इसके बावजूद भी मानव समाज अलग-अलग देश, अलग-अलग धर्म और अलग-अलग जाति में बटा हुआ है। मानव समाज में अनेकों प्रकार कि मानव हैं कोई कमजोर, कोई ज्ञानी, कोई पागल, कोई बुद्धिहीन, कोई लड़ाकू इत्यादि।






धर्म का निर्माण मानव ने स्वयं किया है। इसके कई सबूत मौजूद है, उदाहरण के लिए सिख धर्म, जिसे बना ज्यादा समय नहीं हुआ है। अब सवाल उत्पन्न होता है मानव समाज में धर्म की जरूरत क्यों पड़ी ? धर्म एक प्रकार से किसी स्थान पर जीवों की रहने की व्यवस्था है। जंगल के जानवरों में भी एक व्यवस्था बनी हुई है। शेर को जंगल का राजा यूं ही नहीं कहा जाता है बल्कि शेर के अपने कुछ वसूल होते हैं। जिसमें से एक वसूल है शेर कभी भी दूसरे जानवरों द्वारा मारे गए शिकार को नहीं खाता है और जिस शिकार के पीछे वह भागता है, उसे मार कर ही दम लेता है। जंगल के जानवर भी एक दूसरे जानवरों को मान सम्मान देते हैं। कहीं जानवर तो दूसरे जानवर की सुगंध सूंघकर ही अपना रास्ता बदल लेते हैं। अगर आप करीब से देखेंगे तो व्यवस्था ही आपको धर्म का रूप दिखाई देगी। धर्म ने हम इंसानों को अन्य जीवों से अलग बनाया है। हम इंसान अन्य जीवों के मुकाबले अधिक बुद्धिमान और अधिक ताकतवर है। प्राकृतिक तौर पर कई जीवों से हम कम ताकतवर भी है। आज हम इंसानों ने इतनी शक्ति प्राप्त कर ली है कि हम मंगल ग्रह, चंद्रमा, अंतरिक्ष में भी अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर रहे हैं।


धर्म मानव समाज को अच्छाई-बुराई, अपना-पराया, सही-गलत इत्यादि चीजों का अंतर बताता है। धर्म हमें मां-बाप, भाई-बहन, पत्नी, बेटा-बेटी इत्यादि का रिश्ता देता है। सोचिए अगर धर्म नहीं होता तो क्या मानव समाज में रिश्ते होते ? शायद नहीं। हमें यह तक पता नहीं होता कि हमारे पिता कौन है, भाई कौन है, बुआ कौन है ? धर्म यानी व्यवस्था ने ही हम मानव समाज को इतना आधुनिक बनाया है। धर्म ने ही हमें शिक्षा प्रणाली, स्वास्थ्य प्रणाली, न्याय प्रणाली इत्यादि दी हैं। अगर धर्म नहीं होंगे तो फिर भी हमें ऐसी व्यवस्था की जरूरत होगी जो धर्म जैसी होगी। धर्म और आस्था मानव समाज को कई प्रकार से सहारा देती है।

कल्पना कीजिए दुनिया के सभी धर्म खत्म हो जाए तो मानव समाज कैसा होगा ? अगर दुनिया से सभी धर्म खत्म होते हैं तो मानव समाज एक प्रकार से आदिमानव वाला समाज बन जाएगा। जहां ना कोई रिश्ता होगा, ना कोई त्यौहार होगा, ना कोई शर्म होगी, ना लिहाज होगी। धर्म के बगैर मानव समाज का अस्तित्व खतरे में आ जाएगा। समाज में कई प्रकार की हिंसात्मक गतिविधियां उत्पन्न हो जाएंगे। इसलिए मानव समाज के लिए धर्म कई जगहों पर जरूरी और अहम हो जाता है। हॉं..!धर्म के नाम पर कुछ लोगों ने मानव समाज को भड़काने का काम अवश्य किया है, मगर यह तर्क देना कही ना कही गलत होगा कि धर्म की जरूरत मानव समाज में नहीं है। हमारे मानव समाज को हर उस अच्छाई की जरूरत है, जिससे मानव समाज का विकास और कल्याण हो सकें। धर्म यानी एक व्यवस्था समाज के लिए जरूरी है, पाखंड और अंधविश्वास धर्म और समाज के लिए कैंसर है।


                                                               लेखक- दीपक कोहली


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