साहित्य चक्र

17 December 2021

कविताः रात






रात हुई भई रात हुई ।
दिन हो गया ज्यूँ छुई मुई ।।

रात हुई अंधेरा साथ लाई ।
आसमान में तारों की बारात आई ।।

टिमटिम- टिमटिम तारे चमके ।
गिनते- गिनते आँखें झपके ।।

छोटे- छोटे झुरमुट से तारे ।
कुछ पगडंडी जैसे लगते तारे ।।

सबसे बड़ा  चमकीला तारा ।
उत्तर दिशा में दिखता धुरतारा।।

अलगअलग समय कुछ दिखते तारे ।
सप्त ऋषिमण्डल कीर्ति कुछ तारे।।

तारे देख दादी-नानी समय बताती ।
रात जाते-जाते तारे साथ ले जाती ।।
       

                           मईनुदीन कोहरी नाचीज़ बीकानेरी




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