साहित्य चक्र

27 October 2017

*प्रज्ञा रक्त रक्षक*



हमारी शक्ति- हमारा ताकत-हमारा रक्त ही हमारी पहचान है..। इसमें कोई दो राय नहीं की हमारी पहचान हमारे रक्त से होती है...। जी हां...। हर व्यकित का रक्त ग्रुप अलग -अलग होता हैं..। चाहे वह स्त्री हो या फिर पुरूष...। आज जिस तरह लगातार बीमारियां बढ़ रही हैं..। उसे देखते हुए देश में कई ब्लड बैंक बनें हैं...। आजकल की दुनियां में हादसे होना कोई बड़ी बात नहीं रह गई है...। हर दिन पूरे देश में कई हादसे होते है..और कई लोग मरते है...। इसी को देखते हुए...। दिल्ली के निवासी हरीश बहुगुणा जी ने एक रक्त समूह की स्थापना की..। जिसका नाम प्रज्ञा रक्त रक्षक रखा गया...। इस समूह में कई राज्यों के लोग जुड़े हुए है..। यह समूह हिंदू रक्त - हिंदू हेतु पर काम करता है...। इस समूह को गठित करने वाले श्री हरीश बहुगुणा जी है..। जो काफी सालों से इस विषय पर सोच रहे थे..। हरीश जी ने इस पर तेजी से काम करते हुए..। इसे आज आठ राज्यों तक पहुंचा दिया हैं...। जिसमें इस समूह के लोग अपना काम कर रहे है..और लोग तक रक्त की सेवा दे रहे है..।


हरीश बहुगुणा


वैसे हरीश बहुगुणा को यह आइडिया बहुत पहले आया था...। जब उन्होंने देखा की बहुत लोग ब्लड बैंकों में धक्का खाते है..। जिसके बाद बहुगुणा जी ने इस पर विचार किया और तेजी से इस यहां तक पहुंचाया..। आज हमारे देश में भाई-भतीजा वाद और भष्टाचार इतना बढ़ा चुका है..कि ब्लड बैंकों में भी उन्हीं को ब्लड मिलता हैं...। जिनके कोई जानने वाले होते है या फिर जिनके पास पैसा होता हैं...।  यह समूह दूर-दराज से आए लोगों के लिए और मजबूर लोगों की सहायता के लिए ही स्थापित किया गया हैं...। इस समूह में मात्र एक फोन कॉल और एक व्ट्सअप मैसेज या फोन मैसेज करने से रक्त की व्यवस्था हो सकती है..। चाहे फिर वो जरूरतमंद देवभूमि में हो या फिर दिल्ली के अस्पतालों में..। बस हां...वो हिंदू होना चाहिए...। यह समूह मूलरूप से हिंदू धर्म के लोगों के लिए ही काम करता है...।  इस समूह का मूल मंत्र ही 'हिंदू रक्त हिंदू हेतु' है..।
अगर आप रक्तदान और अंगदान करने वालों के आकंडे़ देखेंगे तो अधिकतर इसमें हिंदू समाज के लोग ज्यादा होगें..। हिंदू समाज पहले से ही एक पवित्र समाज के तौर पर जाना जाता है..। इसी को देखते हुए हिंदू समाज के लिए हरीश बहुगुणा जी ने प्रज्ञा रक्त रक्षक सेवा शुरू की है...। इस मुहिम के जरिए...। पीड़ित या जरूरतमंद को अगर रक्त की जरूरत हो...। तो प्रज्ञा रक्त रक्षक उसे रक्त उपलब्ध करने में मदद करता है..। 'प्रज्ञा रक्त रक्षक' सोशल मीडिया के माध्यम से हर जरूरतमंद हिंदू के लिए हर समय सेवा के लिए तत्पर है..। 'प्रज्ञा रक्त रक्षक' अभी दिल्ली सहित आठ-दस राज्यों में अपनी सेवा प्रदान कर रहा है..। जिससे आगे उम्मीद है कि 'प्रज्ञा रक्त रक्षक' पूरे भारत में अपने सेवा प्रदान करेगा..। आपको हम बता दें ..। इसकी संचालन की क्या व्यवस्था है..। 'प्रज्ञा रक्त रक्षक' पूर्ण रूप से नि:शुल्क सेवा प्रदान करती है..। उन सभी मित्रों से निवेदन हैं जो 'प्रज्ञा रक्त रक्षक' के माध्यम से हिंदू जन सेवा करना चाहते है...। 'प्रज्ञा रक्त रक्षक' का प्रयास संपूर्ण भारत में सुगम तरीके से रक्त उपलब्ध हो..।  जिससे स्वस्थ भारत का निर्माण हो..।
'प्रज्ञा रक्त रक्षक' सेवा हेल्पलाइन नम्बर- 9811469908

अगर आप भी 'प्रज्ञा रक्त रक्षक' से जुड़ना चाहते है...। तो 'प्रज्ञा रक्त रक्षक' से संपर्क करें..।
मो. न.- 9811469908
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https://www.facebook.com/groups/532797287068062/



                                                                                                    रिपोर्ट- दीपक कोहली



24 October 2017

*आंगन*










आंगन खिल उठता जब बेटी घर मे आती है,
आते ही माँ की लाडली बन जाती है...।

घर की इज़्ज़त कहलाती है,

जब जब बेटी पढ़ने जाती ,
पिता की आंखे भर आती...।

पढ़ते ही जब वापस आती,
माँ को सारा हाल बताती।
भाई भी खुश हो जाता है,
हर पल बहन की खुशी मनाता है...।

बेटी बड़ी जब हो जाती है,
पिता को शादी की चिन्ता हो जाती है...।

माँ को नींद नही आती है,
भाई की भी आंखे सोच सोच भर आती है..।

शादी जब हो जाती है,
बेटी डोली में जाती है...।

सभी की आंखे भर आती है,
पहले पिता के घर की लक्ष्मी थी,
अब ससुराल के घर की लक्ष्मी है...।

बेटी भी चिड़िया की तरह बन जाती है,
फिर पिता के घर से 
ससुराल के लिए उड़ जाती है...।

पहले पिता के घर की इज़्ज़त थी,
अब ससुराल की इज़्ज़त बन जाती है...।

धन्य है वो मात पिता जिनके 
आंगन में बेटी आती है...।

बेटी कभी परायी नही होती,
ये तो दोनों घर का दीया जलाती है...।

ओर फिर हर पल, हर त्यौहार पर ,
दोनों घर के लिए खुशियां मनाती है...।
                     



                                                                                 कवि- अमन वशिष्ठ




* सत्य वचन...!





पृथ्वी पर प्रकाश पड़ा सूर्य देव 
का, तो संसार झूम उठा..।

और जब होने लगा, चन्द्रग्रहण 
तो अंधकार उमड़ उठा..।

न जाने मनुष्य किस
बात से इतना विचलित है..।

अरे संसार तो प्रभु श्री राम का था, 
अब तो फिर से अंधकार हो चला..।

हाथ की लकीरें बता देती, 
जीवन भर की सच्चाई...।

अब तो खुद अपने हाथ से
मनुष्य अपना ही घर बसाने चला..।

मत करना बेर किसी से,
ये दुनिया एक बहाना है...।

कल सब आये थे, एक दिन 
कल ही सबको जाना है..।

बुरा लगे किसी की बात का,
तो खुद से बेर मत कर लेना।

उसको मित्र कहकर खुद को 
समझा लेना....।

               कवि- अमन वशिष्ठ

09 October 2017

* सड़क सुरक्षा *




सड़क सुरक्षा


तुम हैल्मेट पहन के जाओगे,तो क्या घट जायेगा!
 मेरे सजना रूल ट्रैफिक के ये कौन निभाएगा
कहना मानो राजा ज़ी रिश्ता तब ही निभ पायेगा!
मेरे सजना रूल ट्रैफिक के ये कौन निभाएगा।

सुना है मैने लापरवाही , हद से कर जाते है!
कितने घरोँ के दीपक ऐसे सडकों पे बुझ जाते है!
महंगी जाती है जल्दी ,जो भी कर जायेगा!
मेरे सजना रूल ट्रैफिक के ये कौन निभाएगा।

चुड़ी और सिन्दुर मुझको प्राणो से भी प्यारे है!
रखना हरदम याद हमें दिन इंतजार में गुजारे है!
देखेगें तब तक रस्ता,जब तक तु न आएगा!
मेरे सजना ट्रैफिक के ये कौन निभाएगा।

हर जगह है नाका बन्दी,हर जगह पर पुलिस खड़ी!
सड़क सुरक्षा जिम्मेदारी हम सब की है हर घड़ी!
जागो और जगाओ फिर वक्त न हाथ में आएगा!
मेरे सजना रूल ट्रैफिक के ये कौन निभाएगा।

हाथ जोड़कर विनती है रूल ट्रैफिक मत तोड़ो!
जिन्दगी मिली है एक बार तुम इससे मत तोड़ो!
कहे सुमन घमण्ड न करना मिट्टी में मिल जायेगा!
मेरे सजना रूल ट्रैफिक के ये कौन निभाएगा

                                                                 


                                     (सुमन जांगड़ा हांसी हिसार)


07 October 2017

* जिंदगी के मोड़ पर *



बालों में चांदी
दांतों में सोना आ गया
उम्र के इस पड़ाव में

तू साया बन मिल गया
शिकायत खुद से करूँ 
या करूँ रब से
तुझ बिन साथी मैं
तन्हा थी न जाने कब से
तेरी ताप न मिली तो क्या
तेरी छांव ही सही
कुछ तो मिला सार्थक
इस निर्रथक जीवन में
अंतस के रसातल में
ग़मों का कारोबार था
फैला हर तरफ 
आंसुओं का बाजार था
खारे अश्कों का वृहद् 
समंदर था जिसने
कभी डूबने भी न दिया
शायद इसलिए ही कि
मिलना तय था तुमसे
जीवन के अंतिम मोड़ पर


                                                                आरती लोहनी