साहित्य चक्र

20 June 2019

एकांत में सुख है

  ..निर्जन स्थान..


हम राह के मुसाफिर है पर
एकांत में सुख है
एकांत में रहना
संवेदना देता मुझे,
सुकून सा मिलता
आत्मा से मिलाता मुझे
एकांत तो साथी है
अकेलापन बुरा है।

हम राह के मुसाफिर है पर
व्याकुल होते जब भीड़ से
मुक्ति देता एकांत
अक्सर खुद को
सम्हालने के लिए
मन खोजता है एकांत
अकेलापन घबराहट है, 
एकांत में खुशी
और मेरे कविता की तिजोरी

एकांत धुन है, शीतल है
संगी है प्रीत है।
खुद का खुद से
मिलाने का पथ है।

भूले बिसरे यादों का
नदियों सा बहाव होता
और उन नदियों से निकल
मन नई राह को बुनता।
एकांत में भी
होता हलचल कुछ
और नया सृजन करता
हम राह के मुसाफिर है पर
कभी कभी एकांत में रहता।
 
                                          विवेक कुमार साव



*क्लाइमेट एक्शन होगी अंतराष्ट्रीय योग दिवस की थीम*


योग के बदलते अर्थ-


हम प्रतिवर्ष 21 जून को अंतराष्ट्रीय योग दिवस मनाते हैं। इस वर्ष पूरी दुनियां पांचवा अंतराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए तैयार है।  योग प्राणायाम आसनों के नियमित अभ्यास से शरीर निरोग रहता है। व्यक्ति एलोपैथिक आयुर्वेदिक होम्योपैथिक दवाइयों के ख़र्चे से बच जाता है। शरीर स्वस्थ रहता है। मस्तिष्क तरोताजा रहता है। मजबूत तन मजबूत मन बनता है। ईश्वर में ध्यान लगता है। आत्मा से परमात्मा के मिलन का नाम योग है। चित्त की वृतियों का भली प्रकार शांत हो जाना योग है। तन को मन से जीवन को स्वास्थ्य से जोड़ने की क्रिया का नाम योग है।

योग के लिए इस अंतराष्ट्रीय दिवस को दिसम्बर 2014 में संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भाषण के दौरान 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का सुझाव दिया कि 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पूरे विश्व मे मनाया जाएगा।

  2019 के योग दिवस का थीम क्लाइमेट एक्शन रखा गया है।  योग का अभ्यास करने से जलवायु परिवर्तन का समाधान हो सकता है। योगासनों से शरीर व मन के मध्य एक आंतरिक सन्तुलन कायम होता है। यह अपने व प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित करता है। पृथ्वी को मनुष्य द्वारा जो नुकसान पहुंचाया जा रहा है जिसके कारण जलवायु परिस्थितियों में भारी बदलाव हो रहा है। इसलिए संयुक्त राष्ट्र ने योगाभ्यास के जरिये जलवायु क्रियाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए फैसला किया है। जो हमारे शरीर की आत्मा को प्रकृति से जोड़ता है और पृथ्वी कर बदलते जलवायु या क्लाइमेट के प्रति एक्शन लेने के लिए प्रेरित करता है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने योग के बारे में कहा है कि योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार  है।

यह मन और शरीर की एकता का प्रतीक है। विचार और एक्शन संयम और पूर्णता मनुष्य व प्रकृति के बीच सामंजस्य स्वास्थ्य व कल्याण के लिए एक समग्र दृष्टिकोण है योग। अपनी जीवन शैली को बदलकर और चेतना पैदा करके यह समग्र स्वास्थ्य में सुधार करता है।

वर्तमान में योग का अर्थ बदलता जा रहा है। योग का वास्तविक अर्थ है इस आत्मा का परमात्मा से मिलन कैसे हो। क्या करें जिससे इंद्रियों पर संयम कर सकें। इंद्रियों का संयम मन का शमन श्वांस प्रश्वांस का यजन ही योग की प्रक्रिया है। मात्र योगी को श्वांस पर दृष्टि रखना है। योग शारीरिक मानसिक या आध्यात्मिक अभ्यास है जो भारत की देन है जो जीवन के पूर्ण तरीके को वर्णित करता है। योग समझ को विकसित करते हुए स्वयं को जानने की विधि है। यह मात्र एक्सरसाइज करना ही नहीं है। योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत से हुई है जिसका अर्थ है एकजुट होना। शरीर से जुड़ना। 21 जून को वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है। योग दिवस का लोगो भी हमे शांति व सद्भाव में रहना सीखाता है जो योग की प्रकृति है।

ऋषि मुनि की संस्कृति व प्राचीन योग परम्परा को अपनाने से या नियमित योग करने से फायदे ही फायदे हैं। प्रतिदिन सूर्य नमस्कार से दिन का श्रीगणेश करना चाहिए। कुछ सांस लेने के व्यायाम करना चाहिए और प्रतिदिन कुछ मिनिट के लिए योग करना चाहिए। नित्य योग से ध्यान क्षमता का विकास होता है याददाश्त व प्रोडक्टिविटी भी बढ़ती है  मांसपेशियों का दर्द दूर होता है। सम्पूर्ण स्वस्थ्य हो जाता है। रीढ़ को स्थिर करता है। पीठ दर्द व अवसाद तनाव दूर होता है  मन शरीर व आत्मा को शान्ति व आनंद प्रदान करता है।

शीर्षासन से पाचन तन्त्र ठीक रहता है। सूर्य नमस्कार से शरीर निरोग व स्वस्थ होता है। कटि चक्रासन से कमर की चर्बी कम होती है।पादहस्तासन खड़े होकर किया जाता है। इससे पैर व हाथ मजबूत होते हसन। ताड़ासन से लंबाई बढ़ती है व पैरों में मजबूती आती है। विपरीत नोकसान से मोटापा कम होती है।  हलासन से शरीर लचीला बनता है। सर्वांगासन से दुर्बलता दूर होती है। शवासन से शारीरिक व मानसिक शांति मिलती है। मयूरासन से फेफड़े व पसलियां को शक्ति मिलती है। पाश्चिमोतनासन से उदर व छाती की कसरत होती है। वक्रासन से मेरुदंड सीधा होता है।  मत्स्य आसन से गला साफ रहता है। पद्मासन से रक्त संचार तेजी से होता है। यह तनाव हटाकर चित्त को एकाग्र  कर सकारत्मक ऊर्जा को बढ़ाता है।।

संसार के संयोग वियोग से रहित अव्यक्त ब्रह्म के मिलन का नाम योग है। शारीरिक योग तो योग की प्रारंभिक अवस्था है।। योगी के लक्षण गीता में लिखे हैं।  योगी आत्मशुद्धि के लिए कर्म करते हैं।  इन्द्रिय मन  बुद्धि व शरीर द्वारा भी आसक्ति त्याग कर रहते हैं। उनके भीतर असीम शांति होती है।योग के परिणाम को प्राप्त पुरुष आत्मा के मूल परमात्मा में स्थित होते हैं।

अनुलोम  विलोम  भ्रामरी भस्त्रिका प्राणायाम  आदि नियमित करने से लाभ ही लाभ होते हैं। योग के आठ अंग है यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार, धारणा,  ध्यान ,समाधि। महर्षि पतंजलि ने योग की सीधी परिभाषा दी। चित्त की वृतियों का निरोध करना ही योग है। चित्त बड़ा चंचल। हवा से बातें करता है। इसे रोकना अभ्यास से संभव है। मन को रोकने के लिए मस्तिष्क को शांत रखना होगा। पतंजलि के योग सूत्रों में पूर्ण कल्याण शारिरिक मानसिक और आत्मिक शुद्धि के लिए आठ अंगों वाले योग की विस्तार से जो व्याख्या की वही अष्टांग योग हमे योग करने की क्रमिक अवस्था के भेद बताता है।

आज घर घर योग किया जा रहा है। प्रातः जल्दी उठकर योगाभ्यास सीख रहे हैं। वे अष्टांग योग का मतलब भी समझते हैं। हमारे देश के यही योगी विश्व को योग सीखा कर योग परम्परा आगे बढ़ाएंगे।

करो योग और रहो निरोग। आज घर घर ये संदेश पहुंचाने की जरूरत है। योग की पांच हजार साल पुरानी परंपरा को योग दिवस के रूप में मनाने के लिए विश्व के 177 देशों में तैयारियां हो रही है जिसका मुख्य उद्देश्य भारत  के प्राचीन योगाभ्यास को नयी पीढ़ी के युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाना है। योग के फायदे के बारे में जागरूक करना। विभिन्न जाति धर्म भाषा सम्बन्धी भेदभाव को दूर करना भी इसका उद्देश्य है। सभी मनुष्यों को एक मंच पर लाकर विश्व शांति करना इसका उद्देश्य है। शरीर को रोगमुक्त करने का योग एक प्राकृतिक तरीका है। यह अंतर के विकार दूर करता है। मानसिक शांति देता है। सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह योग से ही होता है। इसलिए इसे नियमित करना चाहिए। योगाभ्यास से ब्लड शुगर इम्यून सिस्टम बेहतर रहता है। आत्मकेंद्रित रहने की क्षमता बढ़ती है। स्ट्रेस डिप्रेशन माइग्रेन चिन्ता तनाव दूर होता है। पेट सम्बन्धी बीमारियां दूर हो जाती है। बुखार एलर्जी खत्म हो जाती हैम एसिडिटी अस्थमा दृष्टि कमजोर होना बालों का टूटना सब से मुक्ति मिल जाती है।

                                         - राजेश कुमार शर्मा "पुरोहित"



गिरीश कर्नाडः बहुमुखी व्यक्तित्व


ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता, बहुभाषी विद्वान, कुशल नाटककार,पटकथा लेखक,साहित्यकार अभिनेता, फिल्म-निर्देशक,और प्रभावी शिक्षक भारत के सांस्कृतिक परिदृश्य में विराट व्यक्तित्व की छवि रखने वाले गिरीश कर्नाड एक व्यक्ति नहीं वरन संस्था थे। बहुमुखी प्रतिभा के धनी गिरीश एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होने स्वयं को किसी एक कार्यक्षेत्र तक सीमित नहीं रखा वरन कई क्षेत्रों में अपना बहुमूल्य योगदान दिया।

19 मई सन 1938 को महाराष्ट्र माथेरान में जन्मे गिरीश कर्नाड का पूरा नाम गिरीश रघुनाथ कर्नाड था | उनके पिता का नाम रघुनाथ कर्नाड व माँ का नाम कृष्णबाई कर्नाड था | उन्होने 1958 में कर्नाटक वि.वि.से स्नातक किया तथा उसके बाद अपनी योग्यता के आधार पर ही उन्हें स्कॉलर के रूप में ऑक्सफोर्ड वि.वि. से आगे की पढ़ाई करने का अवसर मिला,ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के मेंगडेलन और लिंकॉन कालेज से उन्होंने एक नहीं बल्कि तीन विषयों दर्शनशास्त्र, राजनीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन किया अपने कैरियर के प्रारंभिक दिनों में वे “शिकागो विश्वविद्यालय के फुलब्राइट कॉलेज” में विजिटिंग प्रोफेसर भी रहे लेकिन शीघ्र ही वे भारत वापस लौट आए और लेखन के साथ साथ थिएटर से जुड़ गए । बतौर अभिनेता उनकी पहेली फिल्म 1970 में बनी कन्नड़ फिल्म “संस्कार” थी जिसे राष्ट्रपति का गोल्डन लोटस पुरस्कार मिला.बॉलीवुड में बतौर अभिनेता उनकी पहली फिल्म 1976 में बनी “जादू का शंख” थी ।

हिन्दी, अँग्रेजी व कन्नड़ भाषा पर समान अधिकार रखने वाले कर्नाड ने कई सुप्रसिद्ध नाटक लिखें जिनमें “ययाति” और “तुगलक” जैसे नाटक बहुत ही लोकप्रिय हुए और आज भी कई विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में शामिल कर पढ़ाये जा रहे हैं |

विभिन्न क्षेत्रों में योगदान के लिए उन्हें मिले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों की एक लंबी श्रंखला है | सन 1978 में फिल्म “भूमिका” के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला साथ ही विभिन्न रूपों में उन्हें चार बार फिल्म फेयर पुरस्कार भी मिला | साहित्य के क्षेत्र में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए वर्ष 1992 में कन्नड़ साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1994 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, वर्ष 1998 में ज्ञानपीठ पुरस्कार तथा कालिदास सम्मान उन्हें प्रदान किया गया | साथ ही वर्ष 1974 में उन्हें पदम श्री तथा वर्ष 1992 में पद्म भूषण जैसे सम्मान भी मिले।

1976 में श्याम बेनेगल निर्मित फिल्म "मंथन" में  उन्होंने एक जुझारू व्यक्ति “डॉक्टर राव” का दमदार किरदार निभाया इस फिल्म में वह राजस्थान की एक गांव में बड़ी मशक्कत से वहां के लोगों को समझा-बुझाकर दूध की कोंपरेटिव सोसायटी का गठन करवाते है ताकि इस सोसायटी के माध्यम से ग्रामीण अपने दूध का व्यवसाय कर वास्तविक लाभ कमा सकें | इस फिल्म का चयन बताता है कि वह सिनेमा को महज मनोरंजन का साधन न मानकर सामाजिक जागरूकता का एक सशक्त माध्यम मानते थे ....।

फिल्मों के साथ साथ छोटे पर्दे पर भी उनकी प्रभावी भूमिका रही धारावाहिक “मालगुडी डेज” के स्वामी एंड फ्रेंड्स एपिसोड में उन्होंने बालक स्वामी की पिता का बेहद सशक्त किरदार निभाया व 1990 में विज्ञान पर आधारित धारावाहिक “टर्निंग पॉइंट” में उन्होंने होस्ट की सशक्त भूमिका निभाई .....।

गिरीश ने सलमान खान की फिल्म ‘एक था टाइगर' और ‘टाइगर जिंदा है' में भी काम किया था।टाइगर जिंदा है बॉलीवुड में उनकी आखिरी फिल्मथी। इसमें उन्होंने डॉ. शेनॉय का किरदार निभाया था। पिछले तीन सालों से बीमार चल रहे थे. उनके शरीर ने आक्सीजन बनाना बंद कर दिया था कृत्रित सांस नली से वह सांस लेते थे।इसलिए  नाक में नली लगाई थी. फिल्म के कई सीन्स में वह उसी नली के साथ ही नजर आए थे. खुद सलमान ने भी इस हालत में काम करने पर उनकी बहुत सराहना की थी।

जीवन के आखिरी वर्षों तक समाज और राजनीति को लेकर एक एक्टिविस्ट के तौर पर भी अपनी बेबाक राय रखते रहें।ग‍िरीश कर्नाड का निधन देश के लिए बड़ी क्षति है साहित्य और सिनेमा के एक युग का अंत हो गया. गिरीश कर्नाड एकमात्र ऐसे साहित्यकार हैं, जो सिनेमा और साहित्य दोनों क्षेत्रों में शीर्ष पर रहे और हर तरह की भूमिकाओं में काम किया. गिरीश कर्नाड का साहित्य और फिल्मों में योगदान लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

                                                         डॉ.रचनासिंह "रश्मि"


गाँधी ने गीता ज्ञान की अलख जगाई

महाशक्ति भारत
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करो मेहनत की कमाई सब मेरे भाई।
गीता ज्ञान सिखाती करके सीखो भाई।।

गाँधी ने गीता ज्ञान की अलख जगाई।
सत्याग्रह कर हमको  आज़ादी दिलाई।।

वैज्ञानिक सोच  विकसित  करो  भाई।
अंधश्रद्धा में  तनिक  न  उलझो  भाई।।

जादू टोना टोटका सभी बेकार हैं भाई।
सबसे सुन्दर कर्म करो मिले सुख भाई।।

गंगा जमुना सरस्वती का देश है भाई।
सागर जिसके  नित चरण पखारे भाई।।

हिमगिरि किरीट  मनोहर लगता भाई।
कश्मीर सा स्वर्ग हमारा सुन्दर है भाई।।

केसर की खुशबू से महके वादी है भाई।
ऐसे सुन्दर देश की महिमा गाऊं मैं भाई।।

देशभाव जगा  मन मे  आगे बढ़ो भाई।
फिर से भारत महाशक्ति  बनाओ भाई।।

सबका साथ , सबका प्रयास  हो भाई।
देश विकास की बात तभी सच हो भाई।।

राम कृष्ण गौतम महावीर का देश है भाई।
ऋषि मुनियों ने जिसकी महिमा है गाई।।

                                  कवि राजेश पुरोहित 


16 June 2019

नारी तुम, बन चंडी

*शंखनाद*
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नारी तुम,
बन चंडी,
उतर धरा पर..
करो स्वतन्त्रता 
का आगाज़ ...!
काटो बन्धन,
लिए हौंसलें...
भरो उड़ाने....
न रोक सके
कोई परवाज़...!!

कब तक ट्विंकल,
कब तक आसिफा,
कब तक बेटियाँ
मारी जायेंगी ..!

आने से भी डरें
धरा पर
सतत हैवानो के 
जो हाथ सताई 
जाएंगी
मत मारो कोख 
में अब बेटी
दरिंदों का संहार करो
नहीं सहे 
अत्याचार सुता तुम्हारी
अब ऐसा शंखनाद करो ।

शब्दो को 
श्रृंगारित कर 
घुँघरू सा नहीं 
बजाओ अब !!!
जागो कविते
अंगार बनो
संसद तक 
सन्देश पठाओ अब ।

                               रागिनी स्वर्णकत