साहित्य चक्र
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02 August 2026

मित्रता दिवस विशेष- 02 अगस्त 2026





मेरी पहली दोस्ती- सुनीता के नाम


मेरी पहली दोस्ती सुनीता से हुई। वह केवल मेरी सहेली नहीं, मेरे संघर्षों की सच्ची साथी थी। उत्तराखंड के छोटे-से शहर टिहरी में हमारा बचपन बीता। जब पानी की कमी होती, हम साथ नदी से पानी भरते, वहीं कपड़े धोते और फिर कई किलोमीटर पैदल स्कूल जाते। पढ़ाई, होमवर्क और घर-परिवार की ज़िम्मेदारियां- हर कदम पर हम एक-दूसरे का सहारा बने।


"वक़्त बदल गया, रास्ते बदल गए,
पर दोस्ती के एहसास कभी नहीं बदले।"


आज हमारी शादियाँ हो चुकी हैं, जीवन अपनी-अपनी दिशा में आगे बढ़ गया है, लेकिन वर्षों बाद भी हमारी मित्रता वैसी ही निर्मल, निस्वार्थ और अटूट है। सच तो यह है कि पहली दोस्ती उम्रभर दिल की सबसे खूबसूरत याद बनकर साथ चलती है।


- बीना सेमवाल


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पांचवीं कक्षा के बाद जब हमने गांव छोड़ा तो उस समय ललिता गांव में नहीं थी, छुट्टियों में अपने मामा के घर गई हुई थी। कुछ दिनों बाद गांव से मेरे चाचाजी मुझे लेने आये, उन्होंने कहा- "ललिता बहुत ज्यादा बीमार है और एक बार तुझसे मिलना चाहती है।"

गांव जाकर जब मैं उससे मिली तो हम दोनों एक-दूसरे के गले लगाकर बहुत रोये। वो बहुत कुछ जो मन में रह गया था आंसुओं में बहकर बाहर आ गया। उसके बाद समझ आया कि हम दोनों की जिंदगी में एक-दूसरे की क्या अहमियत है। एक-दूसरे से दूर होने के बाद भी हम 36 साल से अपनी दोस्ती को आज भी निभा रहे हैं।


- मंजू सागर


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निःस्वार्थ दोस्ती

दोस्ती शब्द सुनते ही दिल, दिमाग और चेहरा एक साथ खिल उठता है। दोस्ती में कुछ तेरा या मेरा नहीं होता। सब कुछ हमारा होता हैं। दोस्ती वो रिश्ता है जो हमे पारिवारिक रूप से या परंपरागत तरीके से नहीं मिलती। ना ही जन्मसूत्र से मिलती हैं। जिंदगी के बाकी रिश्ते माता पिता भाई बहन चाचा मामा बुआ मौसी कुछ भी हम स्वयं नहीं चुनते। पर दोस्त, एक दूसरे को लाखों करोड़ी की भीड़ में ढूंढ लेते। और फिर दोस्ती हो जाती है।

अक्सर पहले अनजान लोग आपस मिलते हैं, उनमें से जिनकी इच्छाए, रुचि, भावनाएं, चेतना, जागरूकता एवं विचार धाराएं आपस में अधिकांश रूप मेल खाती हैं। वो एक दूसरे को हर परिस्थिति में भली भांति समझ पाते हैं। इस प्रकार वो अच्छे दोस्त बन जाते हैं। मेरी सबसे पहली और अच्छी दोस्त है प्रकृति। क्योंकि हम, एक दूसरे को अच्छी तरह से समझते हैं। जिंदगी के हर पल हर एक परिस्थिति, हर फैसला एवं हर सफलता और असफलता को समझने में प्रकृति से अच्छा उदाहरण और कोई नहीं दे सकता। प्रकृति से मुझे हर मुश्किल से सामना करने की हिम्मत मिलती है।

जिंदगी को सही तरीके से जीने की प्रेरणा भी प्रकृति ही है। ये पेड़ पौधे नदी पहाड़ वादियां,फूल पत्ते पक्षी मै सबकी भावनाओं को समझ सकती हूं। हम एक दूसरे का ख्याल भी रखते हैं। दोस्ती में कोई आभार नहीं होता। इसलिए मैं धन्यवाद तो नहीं कहूंगी, पर गर्व से कहती हूं, कि प्रकृति मेरी निःस्वार्थ दोस्त है।

- सुतपा घोष, दुर्गापुर


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बचपन की अनमोल धरोहर, पहली मित्रता और अशोक

जीवन के सफ़र में कई रिश्ते बनते हैं, लेकिन बचपन की पहली मित्रता सबसे अनोखी और निष्कपट होती है, जहां स्वार्थ का कोई स्थान नहीं होता।

​मेरा मित्र अशोक सिर्फ़ एक नाम नहीं, बल्कि भरोसे और बिना शर्तों के स्नेह का दूसरा नाम था। नीम के पेड़ की छांव, एक ही छाते में भीगते हुए स्कूल से घर लौटना और हर मुश्किल वक्त में उसका यह कहना,"फ़िक्र मत कर, तेरा भाई तेरे साथ है",आज भी मेरी स्मृतियों में जीवित है।

​वक्त के क्रूर मोड़ ने उसे हमसे छीन लिया, लेकिन उसकी यादें और दोस्ती इस जीवन की सबसे बड़ी दौलत बनकर हमेशा मेरे दिल में अमर रहेंगी।


- डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़



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मेरे दोस्त

जब भी दोस्ती का ज़िक्र आता है, सबसे पहले तुम याद आते हो। तुम केवल मेरे सहपाठी नहीं, बल्कि मेरी परछाईं थे। साथ-साथ स्कूल जाना, एक ही साइकिल से ट्यूशन पहुँचना और लौटते समय समोसे खाना- ये छोटी-छोटी यादें आज भी मुस्कान दे जाती हैं।

पढ़ाई में हमारी स्वस्थ प्रतिस्पर्धा कभी-कभी तकरार भी कराती थी, लेकिन आज समझ आता है कि उसी ने हमें आगे बढ़ना सिखाया। समय ने हमें अलग राहों पर पहुँचा दिया, पर दोस्ती का वह अपनापन आज भी दिल में ज़िंदा है। मित्रता दिवस पर बस इतना कहना चाहता हूँ- तुम्हारी दोस्ती मेरे जीवन की सबसे अनमोल यादों में हमेशा रहेगी।


- रोशन कुमार झा, जमशेदपुर


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पहली मित्रता


मेरी पहली मित्रता विक्रांत से हुई, वह मेरे मामा जी का सबसे बड़ा बेटा है। बचपन में ननिहाल में जाना अक्सर होता था। हम दोनों इस दौरान खूब मस्ती करते थे । विकी उर्फ विक्रांत बचपन से ही समझदार और पढ़ाई में होशियार था। वो दिल का सच्चा था और हम दोनों एक दूसरे का साथ बहुत पसंद करते थे।

बचपन में लगभग सारे त्योहार हम दोनों बड़े प्यार से इकट्ठे मनाते थे। कभी विकी हमारे घर आता था, कभी मैं अपने मामा के घर जाकर विकी के साथ का आनंद लेता था।

आज विकी बैंगलुरु में एक प्राइवेट कंपनी में एक अच्छे पैकेज पर कार्यरत है, शादीशुदा है और एक खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहा है। अक्सर उससे बात होती रहती है, तो ये एहसास होता है कि वो आज भी पहले की तरह बिंदास ही है, उसे प्रसन्न देख मुझे भी अत्यन्त प्रसन्नता होती है।


- प्रवीण कुमार, घुमारवीं



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मेरी पहली दोस्ती पुष्पा श्रीवास्तव से थी। मैं गांव से पहली बार पढ़ने शहर आई थी और ठीक से बोलना, ड्रेस अप होना भी नहीं आता था। उसने ही मुझे संबल दिया और दूसरे मेरा मज़ाक करते थे, तो वह मुझे अकेले में समझाती थी।

इसलिए मैंने तो सच्चे दोस्त की परिभाषा जो जानी है, वह नीचे पंक्तियों में उल्लेखित की है-


कांटों की राहों में जो कमल खिलाएं,
दुःख की घड़ी में जो संवल दिलाएं।
सच्चा दोस्त मैंने जाना वही कहलाएं,
जो एकांत में तेरे दोषों को समझाएं।



- रत्ना बापुली, लखनऊ



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