साहित्य चक्र

05 February 2021

तेरा बालक मैं नन्हा सा



मैं नन्हा सा बालक तेरा माँ,
तेरी लोरी सुन कर सोता हूँ।
जो तू न दिखे आसपास माँ,
तो मैं जोर-जोर से रोता हूँ।

पर आजकल लगता है माँ, 
तू समझने लगी है बोझ मुझे।
पढ़ाई के नाम पर  तभी तो,
तू लगाती है डाँट रोज मुझे।

अभी समय मेरा खेलकूद का,
बचपन मेरा तुम जी लेने दो।
समय रहते मैं पढ़ लूंगा माँ,
कुछ तो मन की कर लेने दो।

एक दिन ऐसा आएगा माँ,
जब मेरे साथ तेरा भी नाम होगा।
तब तू खुद चूमेगी माथा मेरा,
मुझ पर तुझे अभिमान होगा।

लेकिन तब तक तू इंतज़ार कर।
कुछ तो मुझ पर उपकार कर।
मैं कभी तोड़ूंगा न विश्वास तेरा,
माँ विनती मेरी स्वीकार कर।

                                                    कला भारद्वाज


औरत



औरत है...!
किसी भी आकार से परे...
किसी भी रंग से परे...
किसी भी रूप से परे...

वर्षों से उसके सौंदर्य और शोभा को लिखते आए तुम
रसोई और बिस्तर में समेटते आए तुम

मगर लिखा कहां तुमने उसका हृदय उसका साहस
उसके स्पर्श का वह सुकून 
जो मिला तुम्हें हमेशा
तुम्हारे थके माथे पर एक बार उसके हाथ रख देने के बाद

लिखा कहां तुमने उसकी सरलता उसका भोलापन
उसके सीने का वह प्रेम
जो दिया उसने तुम्हे हमेशा
तुम्हारे क्लांत मन को एक बार गले से लगा लेने के बाद.

लिखा कहां तुमने उसका स्नेह उसकी भावना
उसके मन की वह ममता
जो एहसासा तुमने हमेशा
तुम्हारी शिथिल आंखो मे एक बार उसके आंखे डालने के बाद.

सुनो...!
लिख सको तो लिखना तुम
उसकी आकांक्षा उसकी अभिलाषा
उसके दिल की वह इच्छा
जो दबाती रही वह
तुम्हारी चार-दीवारी में अचानक से उसे कैद कर दिए जाने का बाद.

लिख सको तो लिखना तुम
उसकी क्षमता उसका सामर्थ्य
उसके वचन कि वह प्रतिज्ञा
जो निभाती रही वह
तुम्हारे वादों से तुम्हारा हर बार पलायन हो जाने के बाद. 

लिख सको तो लिखना तुम
उसकी कल्पना उसके विचार
उसकी मौन होठ की वह आवाज
जिसमें घुट ती रही वह
तुम्हारे समाज में तुम्हें सत्ता पर बिठा देने के बाद.


लिख सको तो लिखना उसे
तुम्हारे घर की दीवार से परे
छाती तक डोलती उसके घूंघट से परे
थोपी गई शर्म और लज्जा से परे
क्योंकि औरत है..
तुम्हारी आंखों से देखकर गढ़ी हुई उसकी किसी भी परिभाषा से परे.

                                           ✍🏻 रश्मिदीप


03 February 2021

औरत क्या है..?


सुंदर औरत काली औरत
बदसूरत औरत खूबसूरत औरत

पतली औरत मोटी औरत
लंबी औरत बौनी औरत

गोरी औरत सांवली औरत
साफ औरत गंदी औरत

जवान औरत बूढी औरत
औरत औरत औरत

यह औरत क्या है...?

#दीप मदिरा

पिछड़े क्षेत्रों का काया-कल्प योजना





विशाल भौगोलिक अंतर के साथ महाद्वीपीय अनुपात का एक देश, 136 बिलियन जनसंख्या, संस्कृतियों और भाषाओं का असंख्य, भारत वास्तव में मुखर विविधता का देश है। आजादी के 73 वर्षों में, भारत ने आय के स्तर में वृद्धि, उच्च आर्थिक विकास, साक्षरता, जीवन प्रत्याशा, मजबूत बुनियादी ढांचा नेटवर्क और अन्य आर्थिक संकेतकों की एक विस्तृत श्रृंखला सहित कई क्षेत्रों में पर्याप्त प्रगति हासिल की है। विकास की कहानी, उन सभी के बीच, विभिन्न क्षेत्रों में असमानताएं संतुलित क्षेत्रीय विकास को प्राप्त करने के लिए किए गए प्रयासों के बावजूद बनी हुई हैं।


संतुलित क्षेत्रीय विकास, राष्ट्रीय विकास योजना के अतिव्यापी उद्देश्य के तहत लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार और बाधाओं को दूर करने के उद्देश्यों के साथ, योजना आयोग द्वारा वर्ष 2004 में एक विशेष कार्यक्रम शुरू किया गया था। संतुलित क्षेत्रीय विकास, राष्ट्रीय विकास योजना के तीन घटक थे, जिनके नाम (ए) बैकवर्ड डिस्ट्रिक्ट्स इनिशिएटिव घटक थे; (बी) बिहार के लिए विशेष योजना; और (ग) उड़ीसा के अविभाजित कालाहांडी-बोलनगीर-कोरापुट जिलों के लिए विशेष योजना। बैकवर्ड डिस्ट्रिक्ट्स इनिशिएटिव को कार्यक्रमों और नीतियों में लगाने के मुख्य उद्देश्य के साथ लिया गया था, जो देश के 27 राज्यों में फैले इन जिलों के पिछड़े जिलों को चुनने वाले लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाएगा। क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए, भारत सरकार ने 5 जनवरी 2018 को, नीति आयोग के तत्वावधान में देश के 117 जिलों को एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट के रूप में चिन्हित किया जो प्रत्येक क्षेत्र में सीमांत / उन्नत जिलों से पीछे हैं। नीति आयोग वर्तमान में केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों के सहयोग से कार्यक्रम की शुरुआत कर रहा है ताकि सबसे पहले एक ही राज्य के भीतर सबसे अच्छे जिले को पकड़ने के लिए और बाद में, देश में सर्वश्रेष्ठ बनने की ख्वाहिश को पूरा करने में मदद मिल सके।


इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट भारत के पिछड़े जिलों में विकास की किरण लहर को बढ़ावा देने के लिए नितियोग द्वारा चलाए जा रहे एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स प्रोग्राम  के महत्वपूर्ण घटकों में से एक है। चूंकि एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स प्रोग्राम अस्तित्व में आया, इसलिए विभिन्न संकेतकों में उनकी प्रगति के संबंध में जिलों की नियमित रूप से निगरानी की जा रही है। अमेरिका स्थित सोशल प्रोग्रेसिव इंपीटिव  और इंस्टीट्यूट फॉर कॉम्पिटिटिवनेस  द्वारा एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स प्रोग्राम  के प्रभाव पर किए गए अध्ययनों से भारत में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। स्वास्थ्य और पोषण, शिक्षा, और बुनियादी ढांचा सबसे बेहतर क्षेत्र थे और स्वास्थ्य आधारभूत संरचना के निर्माण से संबंधित कई मध्यम अवधि के संकेतकों में महत्वपूर्ण जमीन को कवर किया गया था। अध्ययन में यह भी पाया गया है कि बुनियादी ढांचे में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने, प्राप्त करने या लगभग प्राप्त करने वाले जिलों के प्रमुख कारणों में से एक संभव हो गया है, क्योंकि कुछ संकेतक - जैसे कि व्यक्तिगत घरेलू लैट्रीन और घरेलू विद्युतीकरण - मिशन मोड से संचालित होते हैं एवं स्वच्छ भारत और प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना जैसी योजनाएं इस में पूर्ण सहभागिता निभा रही हैं।


भारत में ग्रामीण क्षेत्र आज भारतीय अर्थव्यवस्था के चालक बन रहे हैं। सरकार की पहल अधिक ग्रामीण आबादी को प्रेरित कर रही है विशेषकर महिलाओं को उद्यमिता लेने के लिए आगे आने के लिए। स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के संचालन के दौरान, महिलाओं को धीरे-धीरे अपने स्वयं के रोजगार के लिए छोटे उद्यम स्थापित करने और दूसरों के लिए अवसर पैदा करने के लिए प्रेरित किया जाता है। सरकार देश में पिछड़े जिलों के विकास के लिए जोर दे रही है। इसमें सुविधा हो सकती है:

• गरीबी और बेरोजगारी को कम करना
• शहरी क्षेत्रों में ग्रामीण प्रवास की जाँच करना
• संतुलन क्षेत्रीय विकास
• स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा देना
• जीवन स्तर में सुधार
• ग्रामीण युवाओं को उनके इलाके में उद्यमशीलता की गतिविधियों को प्रोत्साहित करना
• स्थानीय संसाधनों का इष्टतम उपयोग


                                                                                                  सलिल सरोज


हिमाचल का लाहौल स्पीति




लाहौल-स्पीति हिमाचल के सभी टूरिस्ट डेस्टिनेशन में से अभी सबसे ऊपर है या यूँ कहें अभी क्रेजी डेस्टिनेशन बना हुआ है। स्पीति भारत और तिब्बत के बीच स्थित है। वही लाहौल को लैंड विद मैनी पासेस भी कहा जाता है क्योंकि लाहुल से दुनिया का सबसे ऊंचा हाईवे गुजरता है। जिससे लाहुल को दुनिया भर में अलग पहचान मिलता है।

हिमाचल के दामन में फैली लाहुल स्पीति की वादिया एक बार यहाँ आने के लिए जरूर आकर्षित करेगी यहाँ की खासियत बस यही है कि जहाँ नज़र उठाओ वहां प्रकृति की अदुभुत सुंदरता देखने को मिलेगी। जहां एक तरफ इन घाटियों की प्राकृतिक सुंदरता को देखकर आंखों को सुकून मिलता है वहीं दूसरी तरफ हिंदू और बौद्ध परंपराओं का बेमिसाल संगम आश्चर्यचकित कर देगा। लाहुल स्पीति को एक उपाधि दी गई है "ठंड के रेगिस्तान होने का" कारण ये है की यहाँ बारिश बहुत कम होती है। यहाँ के पहाड़ और पर्वत पूरी तरह से निर्जन है इसकी वजह ये है की यहाँ हर मौसम में बर्फ़बारी देखने को मिलेगी।लाहौल-स्पीति एडवेंचर प्रेमी, बाइकर्स और ट्रेकर्स के लिए जन्नत से कम नहीं है। यहां पहाड़ों से नीचे उतरती नदियां जिस रफ़्तार के साथ बहती है उसकी खूबसूरती देखते बनती है।

यहां के आसमां का रंग.. रंग.. तो कुछ अलग ही नीला है जो बाकी जगहों से बिलकुल ही अलग देखने को मिलता है। यहाँ पर ठंडी हवाओं के बीच जगह-जगह बुद्धिस्ट प्रेयर फ्लैग्स उड़ते नजर आता है। इस जगह आ कर यहाँ के संस्कृति और शांति को महसुस कर सकते हैं। शहर के भीड़ भाड़ दे दूर सुकून है यहाँ। ट्रैकिंग में भी अगर दिलचस्पी है तो भी स्पीति वैली बेहतरीन जगह है। यहां के खूबसूरत गांव में सबसे ऊपर किब्बर का नाम आता है जो काज़ा शहर से 10 से 15 किलोमीटर की दूरी पर है। यह दुनिया के सबसे ऊंचाई पर बसा हुआ गांव है।

उसके बाद बारी आती है यहाँ की "की मोनैस्ट्री" जो की स्पीति नदी के किनारे पर स्थित है मोनैस्ट्री को देख कर ऐसा लगता है जैसे इसे पहाड़ के आखिरी में टाँग दिया गया हो। यहाँ आने पर बोध भिक्षु चारो तरफ दिखेंगे। इसके बाद बारी आती है कुंजुम पास की जिसे स्पीति वैली का गेटअवे कहा जाता हैा वैसे तो यह इलाका जून महीने के आखिरी में खुलता है कुछ दिनों के लिए। इस जगह पर आने के लिए इंतज़ार करना होता है कि कब बर्फ पिघले और वहां से गुजर सके। यहाँ से हिमालय की पहाड़ियों को देखने का एहसास ही अलग होता है.इससे अलग यहाँ और भी बहुत कुछ है जिसमे यहाँ की एक झील आती है।

वैसे तो कई झील देखा होगा सबने पर यहाँ जो झील है वो चाँद के आकर का झील है जिसे चंद्र ताल झील के नाम से जाना जाता है और इस झील की खासियत यह है इसका पानी दिन के अलग-अलग समय में अपना रंग बदलता रहता है। वैसे तो चंद्रताल झील तक पहुंचने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है क्योंकि सड़क से यहाँ पहुँचने में समय ज्यादा लगता है। नही तो कुंजुम पास से पैदल ही जा सकते हैं। आखिरी में बारी आती है यहाँ के खुबसूरती में चार चाँद लगाने वाली स्पीति नदी की जो लाहौल-स्पीति की खूबसूरत घाटी को एक बच्चें की तरह पालने पोसने का काम करती है। यह लाहौल और स्पीति को दो हिस्सों में बांटती है।

शालिनी ठाकुर