साहित्य चक्र

16 February 2019

।।सिंहनाद।।




हर घाव से बढ़कर है ये घाव हमारे सीने का
जिनकी करनी ये उनको अधिकार नहीं है जीने का
भारत माता के वीरों का खून मिला है माटी में
अब श्वेत कबूतर नहीं हमें सिंहनाद चाहिए घाटी में
जड़ें हिलानी हैं हमको पाक चीन के पापों की
फन कुचलना है पहले आस्तीन के सापों की
यही होगा सच्चा न्याय शहीदों के परिवारों का
पहले चुन चुन कर काटा जाए सर अपने गद्दारों का
फिर उडा़नी है धज्जी आतंक के फरमान की
जडे़ काटनी हैं इस बार पाखंडी पाकिस्तान की
गद्दारों को कड़ी सजा दशहतगर्दों का कड़ा दमन
यही होगा सच्चे वीरों को देश का सच्चा नमन
ऋणि रहेगा सदा वतन यह विश्वास दिलाता हूं
सभी वीरों के चरणों में मैं श्रद्धा के फूल चढा़ता हूं
सभी वीरों के चरणों में मैं श्रद्धा के फूल चढा़ता हूं

जय हिंद जय भारत 

                                                विक्रम कुमार


वीर शहीदों को श्रंद्धाजलि

पुलवामा में शहीद हुए , 
           हर वीर को नमन करता हूँ ,
भारत की सरकार सुनो , 
            मैं हाथ जोड़कर कहता हूँ ।
कायरता के पुतले पाक को , 
                     नक्शे से मिटा डालो  ,
हर एक हिंदुस्तानी के , 
             दिल की बात मैं कहता हूँ  ।।

पीठ पीछे वार करके , 
              औकात पाक ने बता डाली ,
भारत माँ की रक्षा खातिर ,  
                 वीरों ने जान गवाँ डाली ।
बदला तो लेना ही होगा , 
             सर्जिकल स्ट्राइक कर डालो ,
आंतक को जड़ से मिटा कर , 
                  पाक को कर दो खाली ।।

वीरांगना का सिंदूर मिटा है ,
                     माँ बापू की टूटी लाठी ,
उठा साया बेटे के सर से , 
                     बहना की रूठी राखी ।
भारत माँ की माटी का , 
               कर्ज चुका कर वो चले गये ,
भारत माँ के वीर शहीदों को ,
                  इंसाफ दिलाना है बाकी ।।

दिन-रात सीमा पर सैनिक , 
                    देश के खातिर लड़ते है ,
चैन से सो सके हम सब , 
                   सैनिक रातभर जगते है ।
लेकिन जब-जब पाक , 
                 कायराना हरकत करता है ,
तब जाके भारत के सैनिक ,
                   मौत का तांडव करते है ।।

बहुत हो गया भाईचारा ,
              अब औकात उन्हें दिखाते है ,
पाक को इस भारी गलती का , 
                     सबक आज सिखाते है ।
निकाल कर अपने हथियार , 
                     नया इतिहास बना डालो ,
दुश्मन को धूल चटा कर , 
               कारगिल की याद दिलाते है ।।

सुनो सरकार करो तैयारी , 
               "जसवंत" हाथजोड़ कहता है ,
पुलवामा में शहीद वीरों के ,
                    इंसाफ की मांग करता है ।
कायरता के पुतले पाक को ,
                           नक्शे से मिटा डालो ,
हर एक हिंदुस्तानी के ,
                   दिल की बात ये कहता है ।।
             शत शत नमन ! 
                                                         जय हिन्द ! जय भारत !


पुलवामा शहीदों को नमन


आज हमारे दामन पर फिर
दुखों के चिन्ह दिए गए हैं
नमन हमारा उन वीरों को 
जो हमसे छीन लिए गए हैं
पिता की लाठी टूट गई है
मां की गोद पडी़ खाली
बहना से राखी रूठ गई है
बच्चों की लुट गई खुशहाली
पत्नी भी मूर्छित सी है
और भाई है बदहवास
बालसखा भी गम में है
मातम पसरा है आसपास
अब पूछो डरने वालों से
कहां गया वो उनका डर
क्यों निर्दोषों को मारा
क्यों काटा है उनका सर
जो पुरष्कार लौटाते थे
झूठी ख्याति के नाम पर
वे चुप क्यों बैठे हैं अब
आतंक के गंदे काम पर
अब सुन ले सियासत कान खोलकर
इस भारत के दिल की पुकार
तीस के बदले साठ चाहिए
पहले बदला फिर सरकार

                                  विक्रम कुमार

हौसला अभी बाकी है

हौसला अभी बाकी है
----------------------------


हिमालय सा हौसला 
गंगा सी पवित्रता है
भारत के बच्चे-बच्चे
के जहन में भारत माता है।

ये दर्द नहीं चिंगारी है
गुजर रहा एक-एक पल 
हर हिन्दुस्तानी पर भारी है
नम आंखे को यकी है
आने वाला तूफान अभी बाकी है।

नजर टिकती नही
हर जुबा खामोश है
दिल को उम्मीद है
दुश्मनो के शहर को
अभी तबाह होना बाकी है।
                               

कोई अड़चने हिला नहीं सकती
चंद मुश्किले डिगा नहीं सकती
बूरी नजर रखने वाले 
हमारा कुछ बिगाड़ नहीं सकती।

याद करो 71 को जब 
औकात तुम्हें दिखाई थी
कई लाख सैनिकों को
अपने पैरों पर झुकायी थी।


याद करो कारगिल को
जब सैनिकों को मरता 
छोड़कर भागा था
भारत के वीर सपूतो ने
ही जिनको धूल चटाया था।

छप्पर भी नहीं था सर पर
गर याद करोगे हमारे
दिए गए एहसानो को
भली भाँति जानता हूँ
तेरी मक्कारी भरी अरमानो को।


याद करो भूल गए वो
किए गए सर्जिकल स्टाइक
तब भी तो मूकर गया था
सबूतो के कारण तू नही
सारी दुनिया हिल गया था।

                    विनम्र श्रद्धांजली
                        "आशुतोष"

08 February 2019

शीत लहर ने जकड़ा उत्तर भारत





सर्दी का मौसम हो और उत्तर भारत में शीत लहर ना हो। क्या यह संभव है ? बिल्कुल नहीं...! हर साल की तरह सर्दी अपने मुकाम पर है। सर्द हवाएं, बर्फबारी, बारिश से जनजीवन जहां अस्त-व्यस्त है। तो वहीं उत्तर भारत शीत लहर से पूरा जकड़ा हुआ है। मौसम विभाग लगातार उत्तर भारत के हालातों पर नजर बनाया हुआ है। हर दिन लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रोजमर्रा के काम में कठिनाइयों का दौर लगातार बढ़ रहा है। प्रकृति की इस मार में गरीब जनता पर खूब असर पड़ा है। उत्तराखंड, हिमाचल, यूपी सहित जम्मू-कश्मीर ठंड की चपेट में है। जिससे मैदानी इलाकों में पारा शून्य से नीचे चल रहा है। जबकि पहाड़ी इलाकों में पश्चिमी हवाओं की शीतलहर जारी है। पहाड़ियां बर्फ की चादर से लिपटी हुई है। कोहरे के चलते यातायात सुविधा भी प्रभावित चल रही है। परिवहन विभाग को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। अस्पतालों में लगातार मरीजों की भीड़ बढ़ रही है। जो एक चिंता का विषय बना हुआ है। वैसे आपको बता दें, इस बार सर्दी ने कई सालों का रिकॉर्ड तोड़ा है। माना जा रहा है, सर्दी का कहर होली तक बना रहेंगा। ऐसा लग रहा है। मौसम सब कुछ बदल रहा है। जहां अक्टूबर-नंवबर में पंखे चलते है। तो वहीं दिसंबर में हांड़ कंपा ठंड पड़ती है।  पहाड़ें में बर्फ गिरने का समय बदल चुका है। मौसम के बदलते इस चक्र में भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है। जो मानुष प्रजाति के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जा रहा है। सर्दी तो हर साल आएगी और अपना असर भी दिखाएगीं। ऐसे में सवाल पैदा होते है। आखिर सर्दियों की समस्याओं से कैसे पार पाया जा सकता है। जिसका हम हर साल सामना करते है। वैसे सर्दी के इस मौसम को सही माना जाता है। क्योंकि इस मौसम में बीमारियां बहुत ही कम फैलती है। सर्दी के इस प्रकोप से लड़ने के लिए हमें पर्यावरण व प्रकृति के मापदंडों को समझना होगा। क्योंकि लगातार प्रकृति से छेड़छाड़ की जा रही है। अब इंसान को समझना होगा आखिर मौसम क्यों लगातार अपना मिजाज बदल रहा है। क्या यह हमारे लिए कोई संकेत तो नहीं है..? 

                           संपादन- दीपक कोहली