साहित्य चक्र

21 January 2019

महिलाओं को लेकर बवाल

हमारे देश में कभी जाति, कभी रंग, कभी धर्म को लेकर बवाल होता रहा है..। हमें भी इनकी आदत सी हो गई है..। हर महीने कोई ना कोई केस सुनने को मिलता है...। हमारी मीडिया आज जहां एक ओर राजनीति करने को उतारू है..। तो वहीं हमारे राजनेता मीडिया को चला रहे है..। जिसे हमारे देश का दुर्भाग्य कहा जा सकता है..।



 यहां जाति, धर्म, रंग पर लोगों से भेदभाव किया जाता है। वैसे हमारा देश संस्कृति से भरा राष्ट्र है..। यहां महिलाओं पर कई बवाल होते आए है..। कभी महिलाओं के कपड़ों को लेकर, तो कभी उनके गीत गाने को लेकर...। यह तो हमारे देश का दुर्भाग्य है, कि यहां की नारी सब सहती आई है। हमारे देश के कुछ धर्म गुरु और राजनेता इन्हीं मुद्दों पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकते आए है। हमारे देश की जनता को इस बात का कोई असर नहीं पड़ता हैं। कि देश की नारी क्या-क्या सह रही है। एक तरफ हमारे राजनेता डिजिटल इंडिया की बात करते है। तो दूसरी ओर हम पुरानी संस्कृति को बचाने में करोड़ों रूपये खर्च कर रहे है। ऐसे में कई सवाल हमारे मन में पैदा होते हैं..। आखिर हमारा राष्ट्र किसी दिशा की ओर जा रहा है। इस बात का हमें कोई भी अंदाजा नहीं है..। क्या हम डिजिटल दुनिया की ओर जा रहे हैं या फिर पुराने भारत की खोज की राह में..। चाहे जो भी हो एक बात साफ है। देेश में जब तक गंदी राजनीति खत्म नहीं होगी तब तक देश साफ-सुथरा और विकसित नहीं हो पाएगा। हमारे देश को हमारे यहां की राजनीति दिन पे दिन खोखला करती जा रही है। जो देश के लिए बेहद खतरनाक है। देश में आज भी महिलाओं को उनका पूरा अधिकार नहीं दिया जाता है। चाहे वह राजनीति हो या फिर अन्य कार्य क्षेत्र..। जबकि हर राजनीति पार्टी महिलाओं के अधिकारों की बात करती नजर आती है। .यहीं राजनीति पार्टियां महिलाओं को सीट देने के मामले में पीछे हटते नजर आते है। जो हमारे  देश की राजनीति में सबसे बड़ा कलंक है।


                                                 ।। दीपक कोहली।।  




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