साहित्य चक्र

21 July 2019

बड़ी दूर से चलकर आये

नव निर्माण 
--------------

आसमान पर ड़ाला ड़ेरा 
गाँव-शहर सबको आ घेरा 
बड़ी दूर से चलकर आये 
जाने कहाँ-कहाँ से आये 
तरह-तरह के रुप बनाकर 
बरसाते हैं मस्त फुहार 
आ गये बादल लेके उपहार 
समीर गा रही मीठी मल्हार 
सौंधी-सौंधी खुशबू आती 
कृषक मायूसी छटती जाती 
करे प्रतीक्षा सजनी चिट्ठी की 
भूले सजन सुध मिट्टी की 
मेघ बरसते-मन तरसते 
नयनों से नित झरने झरते 
कौन सुने प्यासी पुकार 
तपती धरती करे मनुहार 
रे बादल मनभर बरसना 
गरज-गरज कर बरसना 
रह न जाये अधूरी आस 
उढाये न कोई उपहास 
तेरा अंश-अंश धरती के अंग 
धरती के यौवन में उठे तरंग 
तेरा बरसना, बरस कर जाना 
श्रृष्टि का नव निर्माण करना 

                                    - मुकेश कुमार ऋषि वर्मा 



कण-कण इस माटी का...


 " निकिता "

सारी दुनिया जिस में समाई 
उस निकिता को प्रणाम हैं

कण-कण इस माटी का
अनुपम और ललाम है 

इश्क मोहब्बत में तेरे खातिर 
कितना ही लहूलुहान हुआ है 

हे-निकिता !तुम्हारे खातिर
महा भीषण -महासंग्राम हुआ

भारत की पावनतम माटी 
शत-शत तुझे प्रणाम है

गंगा -सिंधु चरण पखारे
जग मे ऊंचा नाम रहे 

कश्मीर हिमालय भी तुम्हारे 
छदम सौंदर्य का परिधान है 

हे-निकिता !तुझमें समाया 
ये अक्षरश :हिंदुस्तान है

सारा जहान तुझमें पलता 
तुझसे ही सजता और सवॅरता

तुमसे ही जीवन सबका 
तुमसे ही उद्धार है

कर्म- कर्तव्य भी तुझमें 
तुझसे ही इंसान है

ऐसी निकिता तुझको हम
करते है बारंबार प्रणाम
...................................

                                                      कुमार गिरीश 



जस्बात

कौन करता है तुझको भुला रखा है
मैंने दिल की किताब में
कुछ पन्नों के बीच
आज भी उस सूखे गुलाब के रूप में
तुम्हारी यादों को सजाए रखा है....

तुम देख ना पाओगे
कितनी भी कोशिश कर लो
देखोगे तो सिर्फ और सिर्फ
उन सूखे गुलाब की पंखुड़ियों को
क्योंकि तुमने मुझे भुला रखा है.....

महसूस ना कर पाओगे उस खुशबू को
जिसे जज्बात के इत्र में भिगोकर मैंने
आज भी संभाल रखा है...

तुम्हारे जाने के बाद
जिंदगी के हर तजुर्बे से
सीखने का सिलसिला
मैंने बनाए रखा है
खामोश निगाहों में
जो सपने सजाए थे कभी
आज भी संभाल रखा है....

दर्द की कंदराओं से
बह गया विषाद लेकिन
दिल की जमीन पर
नमी बनाए रखा है...

बातें कुछ रह गई अधूरी
संग गुजारी शामें भी रह गई अधूरी
एक आस है हो जाएंगी पूरी
शायद तुम लौट आओगे मेरे पास
इस उम्मीद से मैंने
निस्वार्थ प्रेम का दिया जलाए रखा है....

अब तो सांसे भी बोझल हो गई हैं
खुद को अनजान बनाए रखा है
खुश हो जाती हूं इस बात से
 मैंने आज भी झूठी उम्मीद से
खुद को बहला रखा....


                                          दीपमाला पांडेय

15 July 2019

क्रिकेट का नया "चैंपियन"

विश्व क्रिकेट को इंग्लैंड के रूप में एक नया विजेता मिला है। जी हां..। जिस देश ने क्रिकेट का ईजाद किया, वह देश 14 जुलाई 2019 को पहली बार विश्व विजेता बना है। 


विजेता और उपविजेता दोनों टीमों को बधाई। इस बार का क्रिकेट विश्वकप फाइनल बेहद ही दिलचस्प और रोमांचक भरा रहा। पहले खेलते हुए न्यूजीलैंड 241 रन बनाए, तो वहीं इंग्लैंड भी 241 रनों पर रुक गया। जिसके बाद सुपर ओवर किया गया। सुपर ओवर भी टाई हो गया। यानि इंग्लैंड ने सुपर ओवर में 15 रन बनाए और न्यूजीलैंड भी 15 रन ही बना सकी। जिसके बाद आईसीसी नियमों के अनुसार अधिक बाउंड्री लगाने वाली टीम को विश्व विजेता घोषित किया गया। आईसीसी नियमों के अनुसार इंग्लैंड 2019 क्रिकेट विश्व कप का विजेता घोषित हुआ।

आपको बता दें,  विश्व में जितने भी देश क्रिकेट खेलते हैं, वो सभी देश आईसीसी के क्रिकेट नियमों का पालन करते है। इसी लिए 2019 विश्व कप के फाइनल में भी आईसीसी नियमों का पालन करना पड़ा। नहीं तो विश्व कप 2019 के फाइनल मैच में दोनों टीमें अच्छा क्रिकेट खेली है।

क्रिकेट का इतिहास बेहद पुराना है। यह खेल 1550 से भी पहले से खेला जा रहा है। जो शुरूआती दौर में लकड़ी की गेंद व कपड़े से बनी गेंद से खेला जाता था। क्रिकेट का जन्म दाता इंग्लैंड को कहां जाता है। क्रिकेट पहले अमीर लोगों का शौकिया खेल होता था। धीरे-धीरे इसका विस्तार होता गया। अंग्रेजों ने जहां-जहां राज किया वहां क्रिकेट का विस्तार तेजी से हुआ। क्रिकेट को जेंटलमैन खेल कहा जाता है। यह खेल दो टीमों के 11-11 खिलाड़ियों के बीच खेला जाता है। आज इस खेल की दिवानगी पूरी दुनिया में सबसे अधिक है। इस खेल को पूरे दुनिया में जाना जाता है। 

क्रिकेट का बेहद लंबा इतिहास रहा है। अभी तक के विश्व विजेता देशों की बात करें तो सबसे ज्यादा बार विश्व कप ऑस्ट्रेलिया- 5, वेस्ट इंडीज- 2 बार, भारत-2 , पाकिस्तान-1, श्रीलंका-1, इंग्लैंड-1 बार क्रिकेट विश्वकप जीता है। 2019 का विश्व कप भले ही इंग्लैंड की क्रिकेट टीम जीत गई हो। मगर पूरी दुनिया का दिल अगर किसी टीम ने जीता है तो वह टीम सिर्फ न्यूजीलैंड की क्रिकेट टीम है।




भारतीय क्रिकेट टीम ने सेमीफाइन में बेहद खराब प्रदर्शन किया, जबकि इस टीम में दुनिया की सबसे बड़ी टीम को हराने का दम-खम है। कहते है ना कभी-कभी पूरा दिन खराब चला जाता है। ठीक ऐसे ही भारतीय क्रिकेट टीम के साथ भी हुआ। जिसके बाद से भारतीय क्रिकेट टीम की सोशल मीडिया से लेकर मीडिया तक में खूब बदनीमी और आरोप लगे। हमें खेल को खेल की तरह देखने की जरूरत है। तभी खेल की सीमा व मर्यादा बनी रहेंगी। 

आपको बताते चलूं...! भारत में क्रिकेट अंग्रेज यानि इंग्लैंड लेकर आया। इस खेल को लेकर भी भारतीय इतिहास में कई घटनाए छिपी है। जैसे हिंदू धर्म में जातिवाद है, ठीक अंग्रेजों के राज में भी छुआ-छूत थी व रंगभेद व नस्लभेद था। अंंग्रेज भारतीयों पर जानवरों से भी बत्थर रवैया अपनाते थे और कुत्तों जैसा व्यवहार करते थे। इस खेल का नाता भारतीय इतिहास से भलीभांति है, जो शायद ही खत्म हो सकें। इस  खेल की भारतीय इतिहास में कई कहानियां हैं, जो भारतीय स्वतंत्रता की लड़ाई को जिंदा करती है।  






14 July 2019

मेरी मासूम भावनाएं

भावनाएं

मेरी मासूम भावनाएं तो तुम
पल में समझ जाया करती थी
हर बात को प्यार से समझाया करती थी
आज अचानक मेरे बड़े होने से
ऐसा क्या अनर्थ हुआ?



आंसुओं का समंदर उमड़ पड़ा
शब्द और शक्ति दोनों बेबस हो गई
तुम्हारी भावनाएं मेरे प्रति बदल गई...
यह शब्द गूंजने लगे मेरे कानों में
तुम तो मां कुछ और ही
समझाने लग गई मुझे बातों बातों में...
बेटी जोर से मत हंस
धीरे धीरे बोल
हंसना जब तू अपने घर जाएगी
बोलना उससे जिसके संग बयाहेगी....
मैं समझ गई
कुछ कहा नहीं तुमसे
क्योंकि मैं जानती हूं
मेरे शब्द कर्कश लगेंगे
और तुम्हारी भावनाओं को ठेस पहुंचाएंगे..
कुछ सपने संजोकर मैं भी चली गई
सोचा ना समझा तुम्हारी बातें बस याद कर गई
भावनाओं का समंदर उमड़ने लगा
सपनों का नया घरौंदा बसने लगा....
सोचा अब खिल खिलाऊंगी
जो गीत लबों तक आ कर रुक जाते थे
उनको फिर से गुनगुनाऊगी....
पर यह क्या?

यहां भी वही शब्द गूंजते हैं
और मुझसे कहते हैं
तू तो पराई है
अपने घर से क्या लाई है
मां यह प्रश्न बार-बार उठता है
और मेरे मन को कसोटता है...
मेरा घर कहां ?

दीपमाला पांडेय