साहित्य चक्र

03 February 2019

मन का मौन



वाणी को शांत करने से पहले मन को शांत करना हमारे लिए जरूर है। क्योंकि जब तक हमारा मन शांत नहीं होता। तब तक  मन का मौन नहीं होता। यहीं मौन हमारेे एकाग्रता को बढ़ाता है। जिससे हमारी सोचने की शक्ति बढ़ती है। मौन का अर्थ ही मन की शांति है। अगर आपको मन का मौन करना है। तो सबसे पहलेे आप अपने मन को शांत करिए। तभी आपका मौन होगा। आप स्वस्थ होंगेे। हमारा आपसे निवेदन है आप अपने मन को शांत रखिए। सोचना कम कीजिए। हमारा मन जीतना शांत रहेगा।हम उतने ही स्वस्थ रहेंगेे। अपने मन को शांत रखिए। आपकी प्रगति आपने आप होने लगेंगी। आप बीमारियों से दूर होने लग जाओगे। आप सुख-शांत के दाता बन जाओगे। आपका परिवार सुख से जीने लग जाएगा।
तो आज ही से शुरू करें। आपने मन को शांत रखनेे की कोशिश..। 

                                                 धन्यवाद


                                                                 दीपक कोहली

आधुनिक युग में शिक्षा की भाषा




मुद्दा राजनीति का हो या फिर शिक्षा का। सब मुद्दे एक बराबर क्यों नहीं..? हमारा देश अपनी संस्कृति से साथ-साथ अपनी भाषा को भी खोता जा रहा है। इससे भी दुखद घटना यह है कि हमारे यहां के नेता-अभिनेता इन मुद्दों पर मौन धारण किए हुए है। अगर ऐसा ही रहा तो हमारी संस्कृति के साथ-साथ हमारी शिक्षा व्यवस्था भी बहुत जल्द चौपट होने के कगार पर रह जाएगी। जिस तरीके से आजकल की शिक्षा व्यवस्था हो गई है। उसे देख कर यह लगता है कि आजकल के बच्चे सिर्फ पढ़ाई की एक मशीन के अलावा कुछ नहीं है। आजकल के बच्चे तो अपनी संस्कृति-सभ्यता को भी नहीं पहचान पाते है। आजकल की इस शिक्षा को अगर आधुनिक शिक्षा या फिर डिजिटल एजुकेशन कहे तो गलत नहीं होगा। आज की शिक्षा से बच्चा सिर्फ नौकरी पाने तक की ही शिक्षा प्राप्त करता है। आखिर ऐसा क्यों क्या इस पर हमें सोचना चाहिए।

              
                                               
               संपादक- दीपक कोहली      

आज केे विचार





दीपक कोहली


1-  हमारी मन की शांति ही सच्ची शांति है।

2-   मन की शांति ही आत्मा की शांति है।

3-  मैं चेतन-शक्ति आत्मा हूं।

4-  आत्मा ही जीवात्मा है।

5-  मन-बुद्धि-संस्कार आत्मा शक्ति है।

6-  आत्मा ज्योति स्वरूप चेतन शक्ति है।

7-  हमारी संकल्प शक्ति व चेतन शक्ति हमारा मन है।

8-  सागरों का लहरों की भांति मेरा मन मुझसे सवाल करता है।

9-  धोखा हमेशा हमारी आंखें खोलती है।

10-                  हमारी आत्मा संस्कारों का पुंज है।

11-                  हमारा जीवन प्रयत्न है।

12-                  मन सबसे तेज है।

13-                  मन का कोई मोल नहीं है।

14-                  मन तो अनमोल है।

15-                  मेरा मन मेरा सच्चा साथी है।

16-                  हमारी सोच हमारा परिचय देती है।

17-                  हम मन के साथी है।

18-                  हम-आप-तुम ही मैं है।

19-                  हमारा ह्दय सबसे अनमोल है।

20-                  मन शांति सबसे बड़ी है।

                           
                                दीपक कोहली

02 February 2019

घूंघट की शान...हरियाणा..?

     
                               



जब हरियाणा की बात होती है...! तो घूंघट का जिक्र जरूर होता है..। जहां हरियाणा पूरे देश में एक अव्वल राज्य के रूप में पहचाना जाता है। तो वहीं हरियाणा अपनी संस्कृति को लेकर भी काफी चर्चाओं में बना रहता है।फिर चाहे वो घूंघट की आन-बान म्हारे हरियाणा की पहचान ही क्यों ना हो..? हमारा देश आज विकास की उस पट्टरी पर है...। जहां से वापस आना मुश्किल है...। देश दिन-प्रति-दिन एक नया इतिहास बनाता जा रहा है...। जो हमारे आने वाले भविष्य के लिए बेहतर होगा..। लिहाजा इस बात पर मुझे हरियाणा की वो संस्कृति याद आती है...। जो हरियाणा की शान कही जाती है...। यानि 'हमारो घूंघट हमारी शान' की..। हरियाणा अपनी संस्कृति के लिए पूरे भारत में एक अलग पहचान रखता है..। यहां आज भी महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकाला जाता है...। यानि नहीं निकलने दिया जाता है..। हरियाणा इससे पहले भी काफी सुर्खियों में रहा है...। वहीं कुछ समय पहले हरियाणा सरकार ने अपनी पत्रिका 'हरियाणा संवाद' में घूंघट को हरियाणा की शान बताया था..। तब हरियाणा सरकार की जमकर किर-किरी हुई..। आखिर होने भी क्यों नहीं चाहिए..। एक तरफ देश विकाश की खोज कर रहा है..। वहीं दूसरी तरफ हम अपनी संस्कृति को पीछे की ओर खींच रहे हैं...। अगर दिल्ली की महिला जींस में घूम सकती है..तो हरियाणा की क्यों नहीं घूम सकती...। हमें आधुनिक भारत का निर्माण करना है..। तो सभी की भूमिका सामना होनी चाहिए..। तभी आधुनिक भारत का निर्माण हो सकता है...। हरियाणा को अगर अपनी संस्कृति बनाए रखनी है...। तो उसे संस्कृति के प्रति खुद खड़ा होना चाहिए..। तभी यह संभव लगता है...। हरियाणा में आज भी लड़की और लड़के में काफी भेद किया जाता हैं...। जो कि एक गलत धारणा है..। हमें सामाज में सभी को एक मत देना होगा..। और लड़की व लड़के का भेद खत्म करना होगा..। 




                                       संपादकः- दीपक कोहली 





आओ हमारे पहाड़ आओ।





आओ हमारे पहाड़ आओ।
सौन्दर्य का आनंद ले जाओ।।

आत्मा को शांति दो।
मन को मान दो।।
तन को आराम दो।
धन को दान दो।।

आओ हमारे पहाड़ आओ।
सौन्दर्य का आनंद ले जाओ।।

                    कवि- दीपक कोहली