साहित्य चक्र

24 March 2019

आस्था,भक्ति एवं विस्वास का संगम -खाटू श्याम


ईश्वरीय आस्था के कई केंद्र हैं। लेकिन इनमें कुछ केंद्र ऐसे हैं। जिन पर करोड़ों भक्तों की भीड़ उमड़ती है। श्रद्धा का ज्वार जहां हिलोरे लेता है और भक्ति जहां कण कण में नजर आती है। ऐसा ही   विश्व प्रसिद्ध जन -जन की आस्था का केंद्र है खाटू में शीश के दानी खाटू श्याम बाबा। लोगों का विश्वास है कि बाबा के दर से कोई खाली हाथ नहीं जाता । जिसके फलस्वरूप हर वर्ष श्याम भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ती ही जा रही है ।
राजस्थान में शेखावाटी के सीकर जिले के रींगस कस्बे से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक छोटा सा गांव खाटू ।खाटू में श्याम बाबा का भव्य विशाल मंदिर है। खाटू धाम उत्तरी भारत का ऐसा धार्मिक स्थल है  जहाँ फाल्गुन मास के शुक्ल द्वादशी पर लगने वाले मेले में महाराष्ट्र ,गुजरात ,दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश, बंगाल, बिहार ,यूपी ,आंध्र प्रदेश सहित अन्य प्रदेश से एवं विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा के दरबार पर आते हैं, पूजा करते हैं एवं मंनोतिया मांगते  हैं ।पूरी होने पर बाबा के दरबार पर पूजा अर्चना करते है चढ़ावा चढ़ाते है।

*जाने श्याम स्वरूप को-* 
      
श्याम बाबा के जीवन परिचय से अवगत होने के लिए महाभारत की ओर जाना होगा।द्वापर युग के अंतिम चरण में पांडवों के वनवास काल में पांडव पुत्र भीम का विवाह हिडिम्बा से हुआ। उसके पुत्र हुआ, घटोत्कच ।घटोत्कच का विवाह सुर नामक दैत्य राज की पुत्री कामकण्टकटा के साथ हुआ ।   कामकण्टकटा ने एक सुंदर पराक्रमी बालक को जन्म दिया। जिसका नाम बर्बरीक रखा गया ।बर्बरीक ने 3 वर्ष तक सच्ची निष्ठा व श्रद्धा से नव दुर्गा की कठिन आराधना की ।मां दुर्गा ने प्रसन्न होकर तीन बाण और कई शक्तियां प्रदान की। जिससे 3 लोको पर विजय प्राप्त की जा सकती है। तब मां दुर्गा ने उन्हें चंडील नाम दिया।

 *बर्बरीक से श्याम बाबा बने*
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अब आपको अवगत कराता हूं उस पौराणिक कथा से जिसने बर्बरीक को श्याम बना दिया । कहानी कुरुक्षेत्र के मैदान से शुरू होती है। जब कुरुक्षेत्र के मैदान में महाभारत युद्ध की रणभेरी बजी। कौरव और  पांडवों की सेना युद्ध करने के लिए उन्मादित हो रही थी ।उस समय बर्बरीक ने युद्ध भूमि में उपस्थित होकर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। रास्ते में विप्र के रूप में भगवान श्री कृष्ण  ने बर्बरीक से परिचय जानना चाहा तो बर्बरीक ने अपने आप को एक योद्धा  व दानी बताया।और अपनी योग्यता का परिचय देते हुए पेड़ के प्रत्येक पत्ते को एक ही बाण से बींध दिया, इतना ही नही श्रीकृष्ण के पैर के नीचे दबे पत्ते को बींधते वह बाण वापस तरकश में आ गया।
   श्री कृष्ण के पूछने पर बर्बरीक ने कहा मैं हारने वाले के पक्ष में लडूंगा। श्री कृष्ण ने कहा यदि तुम महादानी हो तो अपना शीश युद्ध भूमि की बलि के लिए दान में दे दो। बर्बरीक ने तत्काल अपना शीश काटकर श्री कृष्ण के चरणों में समर्पित कर दिया। श्री कृष्ण बर्बरीक की दानवीरता एवं असीम श्रद्धा से अभिभूत हो गए।शीश काटने के बाद  बर्बरीक ने श्री कृष्ण से युद्ध देखने की इच्छा प्रकट की, श्री कृष्ण ने पर्वत की चोटी से युद्ध देखने को कहा। तब भगवान श्रीकृष्ण ने कहा जब तक पृथ्वी, सूर्य, चंद्रमा है तब तक तुम देवताओं के स्थान पर देवों के समान पूजा जाओगे । कलयुग में तुम मेरे ही रूप में पूजे जावोगे। जो भी मनुष्य तुम्हे सच्ची श्रद्धा और निष्ठा से पूजेगा,उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होगी।और पर्वत की चोटी से युद्ध देखने को कहा।
और बर्बरीक को वरदान दिया कि कलयुग में तुम मेरे के रूप में पूजे जाओगे जो भी मनुष्य तुम्हें सच्ची श्रद्धा व निष्ठा से पूजेगा उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होगी।
कलयुग में भगवान श्री कृष्ण के वरदान स्वरुप बर्बरीक यानी श्याम बाबा का शिव मस्तक खाटू की भूमि प्रकट हुआ। खाटू में स्थापित श्याम बाबा की मूर्ति के बारे में किदवंती है कि  श्याम बाबा की मूर्ति श्याम कुंड में ही  निकली थी और श्याम बाबा महाभारत कालीन बर्बरीक के शीश के रूप में खाटू की भूमि में समाए रहे। वे कुंड के पास खड़ी गाय का दूध देव कला से खींच कर पीने लगे। रोज-रोज तंग आकर एक दिन मालिक पीछा करते कुंड तक पहुंच ,उसने देखा कि दूध की धार जमीन पर पड़ रही थी।जब  इस स्थान की  खुदाई की तो वहां से कुंड एवं एक मस्तक की मूर्ति निकली। तभी से इस मूर्ति की पूजा की जा रही है ।इस पवित्र कुंड का नाम श्याम कुंड रखा गया।

*श्याम कुण्ड आस्था का केंद्र**
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श्याम भक्तों के लिए खाटू धाम में श्याम कुण्ड एवं श्याम बगीची आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है।श्याम कुण्ड के बारे में मान्यता है कि यह कुण्ड में स्नान करने से सारे पाप धुल जाते है।
महिलाओं और पुरुषों के लिए दो अलग अलग कुण्ड बनाये गए है। जो भी श्रद्धालु श्याम के दरबार आता है वो श्याम कुण्ड में जरूर स्नान करना चाहता है। तथा श्याम बगीची में हरियाली और शुद्ध ,प्राकृतिक वातावरण से भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गए है।

 *खाटू मंदिर के शिखरबन्ध  पर चढ़ता है सूरजगढ़ का प्राचीन निशान*

खाटू श्याम मंदिर में निशान चढ़ाने को लेकर भी एक रोचक चमत्कारी घटना जुड़ी हुई है। उसी घटना के बाद से सूरजगढ़ का प्राचीन निशान इस मंदिर के शिखर पर फहराया जाने लगा।  वयोवृद्ध श्रद्धालुओं ने बताया कि  मानना है कि वर्ष 1920 विक्रम संवत 1975 फागुन शुक्ला द्वादशी  को खाटू धाम में विभिन्न स्थानों से निशान लेकर आए भक्तों में  पहले अपना -अपना निशान चढ़ाने को लेकर जिद बहस होने लगी। तत्पश्चात सर्वसम्मति से यह तय हुआ कि जो भक्त खाटू मंदिर धाम के  लगे ताले को बिना चाबी के अपनी श्रद्धा भक्ति के बल पर मोर पंख से खोलेगा,वो हीअपना निशान सबसे पहले शिखर पर चढ़ाएगा। काफी भक्तजनों ने प्रयास किया लेकिन मोर छड़ी (मोर पंख )से कोई ताला नहीं खोल पाया। आखिर में भक्त गोवर्धन दास ने अपने शिष्य मंगलाराम अहीर को मोर छड़ी से ताला खोलने का आदेश दिया ।और मंगलाराम ने अपने गुरु के आदेश पर मंदिर गेट पर लगे ताले को मोर छड़ी से छुआ तो ताला खुल गया। जो श्याम भक्ति की सच्ची श्रद्धा व निष्ठा का जीवंत उदाहरण है। इसके बाद से ही परम्परानुसार सूरजगढ़ का निशान मंदिर के शिखर पर बिना किसी रुकावट के सीधे चढ़ाया जाता है।वैसे  प्रदेश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु पैदल व डाक निशान लेकर आते हैं जो बाबा को कई नाम से जैसे हारे का सहारा ,शीश के दानी ,नीले घोड़े वाले, तीन बाण धारी, श्याम सरकार के जयकारे लगाते,नाचते गाते झूमते ढोल नगाड़ों के साथ बाबा के दरबार  पर पहुंचते हैं ।
श्याम बाबा के खाटू धाम में फाल्गुन  शुक्ल की (द्वादशी)बारस  को विशाल मेला लगता है जिसमें लाखों श्रद्धालु भक्त देश के कोने-कोने से आते हैं और बाबा के दरबार पर हाजरी लगाते है।राज्य सरकार व जिला प्रशासन मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की व्यवस्था के लिए  तैयारियां विशाल स्तर पर कर रही है।प्रशासनिक अमला व हजारों पुलिसकर्मी व अधिकारी जुटे हुवे है।सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं की टीम द्वारा  रींगस से लेकर मंदिर तक जगह जगह  श्रद्धालुओं के  लिए चाय, पानी ,व खाने पीने,फल,व चिकित्सा सुविधा आदि की समुचित व्यवस्था  की जाती है ।खाटू में भक्तों के रुकने के लिए आलीशान सैकड़ों धर्मशाला बनी हुई है।
 बाबा के मेले के अवसर पर खाटू धाम में एक ऐसा मनोरम, भक्ति, श्रद्धा, विश्वास और आस्था के जनसैलाब का  अद्भुत संगम  देख कर अंतरात्मा अभिभूत हो जाती है।यहां न कोई जाति का भेद ओर न अमीर गरीब का भेद। सभी केवल एक नाम जय श्री श्याम  जय सही श्याम।एक बार जब कोई इस आस्था के सैलाब में बाबा के दर पर शीश नवाता है, वह बार-बार आने को यहां तत्पर रहता है। बाबा के दरबार से यहां कभी कोई खाली हाथ नही जाता है। जरूरत है सच्ची आस्था ओर विश्वास की। जिसका विश्वास श्याम पर है ,उसका बेड़ा पार है।

                                                               ।।शम्भू पंवार।।


*लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मीडिया का दायित्व*


*लोकतंत्र का रखें मान*
*जाये सब करने मतदान*



लोकतंत्र को मजबूती व आवाज की प्रेरणाधार है तो वह है मीडिया जिसके कारण हमें लोकतंत्र की शक्ति को तरोताजा करती है। मीडिया का दायित्व होता है दूध का दूध पानी का पानी करना।लोकतंत्र का सामना करनें वाला यह विभाग अपने वर्चस्व के कारण उजाला करता है,मीडिया अपनी आवाज में न सिर्फ प्रश्न ही नहीं उछालता है बल्कि संका का त्वरित समाधान करता है।
इसमें मीडिया द्वारा किसी विशेष मुद्दा सामनें रख पक्ष,विपक्ष,समाजसेवी आदि लोगों को एकत्र कर आमना सामना करती है,कौन कितना पानी में है,हर एक गहराई को गर्मा गर्मी भरे सवालों के जबाब मिलते है,*मीडिया समाज का दर्पण होता है* इसका काम है सच को सामने लाना,सिर्फ बहस बाजी करनें का तालुक्य से भला नहीं होने वाला लोकतंत्र की ताकत व कमियों में सुधार लाना भी मीडिया का काम है।विश्वास को लोकतंत्र में जगाना है तो मीडिया में कड़ाई व इसकी अहमियत को समझना होगा तब जाकर लोकतंत्र में एक आशा की किरण दिखाई देगी।आज के परिचर्चा का विषय यही है की *लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया की क्या अहमियत है,रोचक विषय है आज का निश्चित ही निखार आयेगा, बहस बाजी से मात्र हल होनें वाला नहीं हैं,मैं तो समझता हूँ गर मीडिया न हो तो लोकतंत्र द्रोही जो हित की जगह हमेशा अहित सोचते रहते है वो निश्चित ही देश बेच खायेंगे,मीडिया निश्चित ही अपनी ईमानदारी व तप साधना से ऊँची इमारत हासिल कर लेता है।
निश्चित ही कामयाबी की मिसाल मीडिया की आवाज जन जन तक पहुंचे व लोक तंत्र को मजबूती प्रदान करनें के लिए-

*नजदीकी मत केंद्र में जाये*
*ये लोकतंत्र मजबूत बनाये*

मीडिया लोकतंत्र मजबूती के लिये शिक्षित, योग्य, ईमानदार को ही इसका  प्रतिनिधित्व करवाये तभी ही सार्थक बना रहेगा *अडिग लोकतंत्र का अडिग मीडिया*
मीडिया का काम है स्वतंत्र जन की स्वतंत्र मत सिर्फ शक्तिशाली लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करे न कि चंद रूपयों के खातिर *मत* को बेंच दे,मीडिया को चाहिए कि लोगों में इसके खातिर जागृति अभियान के द्वारा इसकी अहमियत को जन के सामनें लायें।

*जागो भैया जागो माता*
*लोकतंत्र के हक के दाता*

*मत* देना मत लेना नोट।
खा जाओगे वरना चोट।।

नजदीक मतकेंद्र में जाये।
खुद बचें व देश बचाये।।

लोक तंत्र के ये हकदार।
शिक्षा,सुख-दुख ईमानदार।।

लोकतंत्र की यही पुकार।
नेता चुनिये सोच विचार।।


                                       *जय लोकतंत्र  जय मीडिया*

                                                                                                                         नवीन कुमार भट्ट




23 March 2019

बापू अगर जिंदा होते

निगरानी के हत्थे चढ़कर
नेता और अफसर जाते
बापू अगर जिंदा होते तो 
ये देखकर मर जाते
सपना देखा था बापू ने 
अपना भारत हो सुंदर
नेता अफसर जन सेवा को
चौबीस घंटे हों तत्पर
काम करें कर्मठता से सब
सबका एक सम्मान बने
सत्य ईमान की हो पूजा
और भारत देश महान बने
पर बापू का सुंदर सपना
तोडा़ इन भ्रष्टाचारियों ने
कुछ गंदे नेताओं ने और
चंद भ्रष्ट अधिकारियों ने
नेताजी घोटाला करते
और अफसर जी रिश्वत लेते
आम आदमी थक गय है
कदम कदम पर देते देते
बापू के सोने की चिडि़या 
अपने पथ से भटक गई 
रिश्वत की खातिर न जाने
कितनों की नौकरी अटक गई 
हालात बड़े संगीन हुए
कोई ऐसे वैसे न थे
उनके पास में मेधा थी
पर जेब में पैसे न थे
उन मेधावी बच्चों के
जब सपने चकनाचूर हुए
तब हारकर रिश्वत के हाथों
वे दिहाडी़ मजदूर हुए
ये नौजवान अब मजदूरी को
सऊदी और कतर जाते
बापू अगर जिंदा होते तो
ये देखकर मर जाते

विक्रम कुमार 

होरी आयी ,होरी आयी


होरी आयी ,होरी आयी
 बूढे ,बच्चे सब पर मस्ती छायी।
रंगों की हो रही बौछार।
आया आज खुशियों का त्यौहार।
गुजिया,मठरी बहुत बनाये।
ठाकुर जी को भोग लगाये।।

आज घर पर बनेगी ठंडाई।
जम के चले आज पुरवाई।
उस पर चढ़ा भांग का रंग।
मस्ती करेंगे सब के संग।

ब्रज की होरी वर्णन करी ना जाये। 
या ब्रज में सर्व सुख मिल जाये।
धूम मचाये नर और नारी,
होरी  खेले बहुत विस्तारी।
एक महीना का ये त्यौहार,
लड्डू और लठमार का प्रचार।
अमीर गुलाल उड़े बहुरंगा ।
ब्रज में हुल्लड़ खूब अतरंगा।।

निकली मुर्खन की बारात,
जामे काऊ के सर पर काउ की लात।
कोउ छेड़े अपने अलाप,कोउ ठाडो मुस्कात।
काऊ की दांडी लम्बी मूँछ।
काउ के लग रही पूँछ।।

काउ के गाल लाल गुलाबी।
काउ ने पहनी है साड़ी।
काउ ने गौरी के मल दिये गाल।
काउ ने चली टेडी मेढी चाल।
होरी को हुल्लड़ मच रो आज।
ब्रज सुंदर सज रो आज।।

फिर सुनेगे कवि सम्मेलन।
सुंदर सुंदर सब को वर्णन।
ऐसे ब्रज में आनंद आये।
या ब्रज में तीन लोक समाये।।

राजाधिराज यहाँ के राजा।
बिहारी जी पर बजे बैंड बाजा।
होरी की मस्ती में संध्या मगन हो जाये।
आँंख मूंद ब्रज की होरी में खो जाये।।

                                 संध्या चतुर्वेदी


होली का त्यौहार



गुलाल की बौछार 
पिचकारी की धार ।
गुझिया की मिठास
रिश्तों में भरे  प्यार ।।

होलिका  का  संहार
जीते प्रहलाद कुमार ।
बुराई का होता अंत
कहें होली का त्यौहार ।।

छाया रंगों का शुमार
लाया प्रेम की फुहार ।
बसंती टेशू - पलाश 
रंग का  चढा खुमार ।।

ढोल-मांदल बजे द्वार
देने  खुशियां   अपार ।
सदा  मुस्करातें   रहों
कहें होली का त्यौहार ।।

बहें भाईचारे की बयार
मिसाल दे सारा संसार ।
बस यहीं शुभकामनाएं
गोपाल की करों स्वीकार ।।

                                            ✍गोपाल कौशल