साहित्य चक्र

07 May 2021

रोहित सरदाना याद बहुत आएगा




यह कैसी महामारी है आई
चारों तरफ तबाही है लाई
अच्छे अच्छे लोग भी चले गए
दे न सके जिनको अंतिम विदाई

आखिर एक दिन सबको ही है जाना
विदा हो गया अब रोहित सरदाना
लोगों के दुख को अपना समझता था
नाम था एक जाना पहचाना

न जाने मन में क्या क्या सपने थे
दो छोटी छोटी बेटियां हैं घर में
दहशत में है मेरे वतन के लोग
क्या होगा जी रहे इसी डर में

कैसे झेल पाएंगी वो दुख को
सबकी आंखें आज नम है
क्यों चला गया रोहित इतनी जल्दी
सबको इस बात का गम है

तुझे और तेरे सहयोग को यह देश
नहीं कभी भूल पायेगा
चला तो गया तू सरदाना
पर तेरा "दंगल"बहुत याद आएगा

                                        रवींद्र कुमार शर्मा


शिक्षा की बात




शिक्षा एक ऐसा अस्त्र है,
जो आपको सफल जीवन प्रदान करती है! 
शिक्षा से सामाजिक और आर्थिक बदलाव में भारी वृद्धि हुई है!

शिक्षा पर सभी का समान अधिकार होना चाहिए, 
मगर शिक्षा का निजीकरण देखकर बेहद दुख और अफसोस होता है! 

आज प्राइवेट स्कूल में कोई गरीब बच्चा शिक्षा 
ग्रहण नहीं कर सकता क्योंकि उनके हाई-फाई फीस और 
अन्य सुविधाओं के लिए मोटी रकम देने में गरीब असमर्थ है!

ग्रामीण इलाकों में कई ऐसे हिंदी मीडियम शिक्षण संस्थान हैं, 
जहां पर टिनशेड और झोपड़ी में विद्यालय चल रहे हैं! 

वहां पर अध्यापकों की दशा बेहद खराब है, 
एक मजदूरी करने वालों से भी बुरा दशा है,
मजदूर की दिहाड़ी 300 रुपये है और शिक्षकों को
1500 से 3000 तक की तनख्वाह में गुजारा करना बेहद दर्दनाक है! 

फिलहाल जिस तरह से कोरोना  के चलते लॉक डाउन की वजह से विद्यालय बंद है उन शिक्षकों का हालत कैसे होगी! 

सरकार को इस विषय पर सोचना चाहिए, 
और कोई ना कोई रास्ता निकालना चाहिए 
जो हिंदी मीडियम के शिक्षकों के हित में हो! 

एक विधायक के खास से बात हुआ
वो बातो बात मे बताया कि अगर सांसद,
विधायक चाहे उसके प्रतिनिधि क्षेत्र में हर हिंदी मीडियम का 
विद्यालय पक्का हो और अन्य सुविधाओं से लैस हो.

विधायक की विकास निधि में इतने पैसे आते हैं 
मगर  पैसे उनको मिलते हैं जो निधि के पैसे से 
पहले 20 से 25 पर्सेंट कमीशन उनकी जेब में डाल दें!

 दुखद चाहे जिस की सरकार रही हो शिक्षा 
स्तर निचले पायदान पर ही रहता है निष्क्रिय 
लोग शिक्षा मंत्री बनाए जाते हैं,

 ताकि शिक्षित होकर जनता इनकी रोजी रोटी ना छीन ले... 

                                             अभिषेक राज शर्मा


मशोबरा मंथन- 2019

श्री राम नाथ कोविन्द- भारत के राष्ट्रपति





1. आज सुबह जल्दी उठकर मैं अपने पोते और पोती के साथ सुबह की सैर के लिए 5:00 बजे शिमला जल संग्रहण क्षेत्र तथा वन्‍यजीव अभयारण्य के लिए निकल पड़ा। मैं पिछले दिन से मशोबरा में ठहरा हुआ हूं और यह अभयारण्य मशोबरा से बाहर निकलते ही सामने है। शिमला पक्षी विहार शहर से बहुत नजदीक है लेकिन शहर के शोरगुल से बहुत दूर भी है। इसकी परिकल्‍पना एक वन के रूप में की गई थी। सोचा गया था कि यहां पर फूल-पौधे होंगे और शिमला के लिए एक बड़ा जल- स्रोत तैयार हो सकेगा।

2. यहां आकर मैं प्रकृति की शोभा देखकर मंत्रमुग्ध रह गया। मैंने यहां छिप कर चिड़ियों को देखा, उनकी जादुई आवाज सुनीछोटे-छोटे लुभावने जीव-जन्‍तुओं की प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली देखी। सीधे तनकर खड़े देवदार और ओक के वृक्ष देखेछोटे बच्चों की खिल-खिलाहट सुनी और महसूस किया कि मशोबरा का अपना अलग ही स्वर्ग है। मैंने प्रकृति को उसके भव्‍यतम रूप में देखा। मैंने यह भी अनुभव किया कि यहां प्रकृति किस तरह से मनुष्य की चिंता करती है, यह वन किस तरह से शिमला और इसकी जनता का पोषण करता है। यह वन बिल्कुल उसी तरह हमारी देख-भाल करता है जैसे कोई मां अपनी संतान की भरण-पोषण करती है। प्रकृति हमें प्यार करती है और हम उसे प्यार करते हैं।

3. कभी कभी ऐसा भी होता है कि किसी साधारण सी यात्रा में भी कोई बड़ा विचार पनप जाता है। यहां आकर अनेकों विचार मेरे मन में आए। मैंने सोचा कि यह धरती मां कितनी अच्‍छी तरह से हमारा पोषण करती है। लेकिन हम इसके पोषण के लिए क्या करते हैं? हम इसके लिए क्‍या कर सकते हैं? अगर हमें यह सुनिश्चित करना है कि यह प्रकृति एक संसाधन के रूप मेंस्रोत के रूप मेंमित्र के रुप में हमारी आने वाली पीढ़ियों को उपलब्ध रहे, तो इसके लिए हमें क्या करना चाहिएक्या आने वाली पीढ़ियों के प्रतिअपनी संतति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास है या नहीं?

4. आगामी अक्टूबर के दिन हम सब महात्मा गांधी जी की 150वीं जयंती मनाने जा रहे हैं।यह एक राष्ट्रीय पर्व है। 2022 में हमारी आजादी की 75वीं वर्षगांठ भी एक राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाई जाएगी। इसमें कोई संदेह नहीं कि इन महत्वपूर्ण अवसरों पर देश में अनेक सार्थक योजनाएँ आरंभ की जाएंगी। 2047 में जब भारत की आजादी के 100 वर्ष पूरे होंगे, उस समय का भारत कैसा होगा?जब 2069 में हम गांधी जी की 200वीं जयंती मना रहे होंगेउस समय का भारत कैसा होगा?

5. हमारे पास आज इन प्रश्नों के बहुत स्पष्ट उत्तरनहीं है। लेकिन सामाजिक, बौद्धिकनैतिक और प्रकृति एवं पर्यावरण के क्षेत्रोंमें जो कुछ भी निवेश आज की पीढ़ी कर रही है, उसी पर हमारे इन सवालों का जवाब निर्भर है। हम लोग ही यह तय करेंगे कि अगले 25 से 50 वर्षों में इस भारत का निर्माण करने वाले लोगों के पास कैसी ताकत होगी, कैसी क्षमता होगी। हम लोग ही यह तय करेंगे कि हजारों हजार वर्षों से जो नदियां, जो पहाड़ और जो जंगल हमें इस प्रकृति ने अपनी पूरी भव्‍यता में उपलब्ध कराएं हैं, वही नदियां, वही पहाड़ और जंगल क्या हमारी आने वाली पीढ़ियों को इसी भव्य रूप में उपलब्ध रह पाएंगे?

6. हमने बहुत तरक्की की है। अनेक उपलब्धियां प्राप्त की हैं। लेकिन अभी बहुत कुछ ऐसा है जो प्राप्‍त किया जाना बाकी है, किया जाना बाकी है। जैसे-जैसे कोई समाज विकसित होता है वैसे-वैसे उसके लक्ष्य भी सटीक और संक्षिप्त होते जाते हैंनिश्चित होते जाते हैं। हिमाचल प्रदेश में यह गौरव का भाव मौजूद है कि यहाँ के स्कूलों में बेटे और बेटियों की शिक्षा के लिए, उनको स्कूल तक पहुंचाने के संदर्भ में महत्वपूर्ण प्रगति की गयी है। दूसरे राज्‍य भी हैं जिन्होंने स्कूलों में बच्चों के दाखिले के मामले में सराहनीय प्रगति की है। लेकिन हमारा अगला लक्ष्य स्कूलों के नामांकन से आगे शिक्षा के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों पर होना चाहिए।

7. हमारे बच्चे कक्षाओं तक पहुंच तो रहे हैं लेकिन वहां जाकर वे कितना कुछ सीख पा रहे हैं?कितना ज्ञान अर्जित कर पा रहे हैं? आने वाले चौथे औद्योगिक युग के लिए हम उन्हें किस प्रकार तैयार कर पा रहे हैं? कितना तैयार कर पा रहे हैं? ये सवाल ऐसे हैं जो हर मां बाप को परेशान कर रहे हैं। इसी प्रकार से अगर सोचें तो जिस प्रकार से स्कूलों का प्रसार स्थान स्थान पर हो गया हैक्या हैल्‍थ केयर भी इसी प्रकार से आधारभूत सुविधा के रूप में अपनी जनता को उपलब्ध नहीं कराई जानी चाहिए?ये मुद्दे समाधान चाहते हैंहर भारतीय के लिए हमें इन मुद्दों से जूझना होगा और ऐसा करते हुए क्षेत्र के आधार परधर्म के आधार पर, किसी प्रकार के भेदभाव को पास फटकने नहीं देना है। ये सुविधाएं सब को देनी होंगी चाहे हमारे किसान भाई बहिन हों या फिर औद्योगिक नगर हों। सब को हैल्‍थ केयर उपलब्‍ध करानी होगी।

8. यहां पर भी प्रकृति हमें एक संदेश देती है। जिस प्राकृतिक क्षेत्र में मैं आज गया था, वहां एक दूसरे के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाता। यहां पर जल सभी के लिए उपलब्ध है, यहां के पेड़ सभी को छाया देते हैं, यहां की साफ हवा सभी को पोषण देती हैभाईचारा और करुणा तो मानो प्रकृति के स्वभाव में है। जो कुछ भी हम एक समाज के रूप में करते हैं, वह सब करते हुए हमें उसी करुणा को, भाईचारे कोमानवीयता को और परस्पर गरिमा को, सम्मान के भाव को अपनी आशाओं में और भारत के प्रति अपने सपनों में शामिल करना होगा।

9. इस सब के मूल में मेल मिलाप की भावना हैसब को एक सूत्र में पिरोने वाली भावना है। प्रकृति हमें एक दूसरे पर निर्भरता सिखाती है, मधुमक्खी को पोषण फूल से मिलता है, जल सभी जीवों की प्यास बुझाता है,और वृक्ष पक्षियों और जीव-जंतुओं का स्वागत बांह पसार कर करते हैं। मेलजोल में एकात्मकता में एक प्रकार का संगीत महसूस होता है। ऐसा लगता है कि जैसेकोई ईश्‍वरीय बंधन हैइन सबके बीच। जीवधारी चाहे छोटा हो या बड़ा, शांत हो या शोर मचाने वालासभी को मिलजुल कर साथ-साथ पुष्पित-पल्लवित होने देती है हमारी प्रकृति। आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करती है। मानव जाति को भी प्रकृति से यह गुण सीखना चाहिए।

10. भारत को प्रकृति से अनुपम वरदान मिला है। इसलिए आइए हम सब मिलकर उस एकात्मकता को और हर एक व्यक्ति को अपनी यह आकांक्षा पूरी करनेअपने सपनों और अपने भाग्य के लिखे को पूरा कर पाने में सहायक बनें। इसे हमें एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप देना होगा। भारत का ऋण है हमारे ऊपर। हमें अपने वर्तमान का यह ऋण चुकाना है। आइए धरती मां काप्रकृति का यह ऋण हम उतार कर जाएं।


समाप्त


02 May 2021

कोविड-19 टीकाकरण हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी



संक्रमण के मौजूदा दौर में हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि केंद्र व राज्य शासन के मापदंडों का गंभीरता के साथ पालन करें। स्वजनों के साथ पास के केंद्र में पहुंचें व टीकाकरण कराएं। टीका आपका सुरक्षा घेरा है। बिना संशय के यह काम अवश्य करें। ताकि हम और हमारा समाज सुरक्षित रह सके। व्यर्थ की अफवाहों पर ध्यान देने के बजाए अपने चिकित्सक और विज्ञानियों पर भरोसा कर मनोबल बढ़ाएं।




देश में 30 करोड़ लोगों को कोरोना का टीका दिया जाना है। हर दिन 30 लाख लोगों को वैक्सीन लगाए जाने का लक्ष्य है, लेकिन यह लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। इसका कारण लोगों में जागरुकता का कम होना ।और टीकाकरण से भयभीत होना ,किन्तु यकीन मानिए ये हमारी और हमारे अपनो के लिए सुरक्षित है।आइए जानते है कि कोविड वैक्सीन हमारे लिए क्यों आवश्यक है।

1- क्या कोविड वैक्सीन लेना जरूरी है ?

कोविड-19 वैक्सीनेशन पूरी तरह से इच्छित है यह लेना जरूरी नहीं हैं। वैक्सीनेशन कोरोना वायरस की चेन को तोड़ने में काफी हद तक मदद करेगा। वैक्सीनेशन आपके और आपके चाहने वालों जैसे फैमिली, फ्रैन्डस, रिलेटिव्स, को-वर्कस और जिनके भी साथ आप फिजिकली कनेक्ट होते हैं उनकी हेल्थ के लिए बहुत ही जरूरी है। हां, पर कुछ बातें हैं जिनका आपको कोविड वैक्सीन लगवाने से पहले ध्यान रखने की जरूरत है।

क्या करें ?

1- जल्दी भोजन करें और वैक्सीनेशन से पहले भरपूर आराम करें- अपनी वैक्सीनेशन की तारीख से पहले वाली रात भरपूर नींद लें। इससे आपकी इम्यूनिटी पूरी तरह से काम करने में सक्षम होगी। अगर आपका अपॉइंटमेंट भोजन के समय का है तो भोजन समय से पहले कर लें और भरपूर पानी पिएं।

2- वैक्सीनेशन से पहले हाइड्रेटेड रहें।

3- ढीले कपड़े पहनें। वैक्सीनेशन कांधे पर मौजूद बड़ी मसल यानि डेल्टॉएड मसल पर लगाई जाती है, ढीले कपड़े पहनने से वैक्सिनेटर आसानी से आपकी बांह पर वैक्सीन लगा सकेगा। संभव हो तो छोटी बांह की टीशर्ट पहनें।

क्या न करें ?

1- शराब पीने से बचें- हालांकि इस पर कोई आधिकारिक दिशा-निर्देश नहीं दिए गए हैं, फिर भी बेहतर होगा कि आप वैक्सीनेशन से पहले वाली रात को शराब पीने से बचें।

2- पेन-किलर से बचें- अगर किसी मेडिकल कंडीशन के चलते आप रोजाना पेनकिलर नहीं खाते हैं तो वैक्सीनेशन के दौरान पेन-किलर लेने से बचें। साइड-इफेक्ट के डर से वैक्सीनेशन से पहले पेन-किलर खाने से लोगों को बचना चाहिए।

वैक्सीनेशन से पहले इन बातों का ध्यान रखें-

1- हाथ धोना बहुत जरूरी है। बार-बार सैनिटाइजर या साबुन से हाथ धोते रहें।

2- मुंह और नाक को मास्क से ढक कर रखें।

3- वैक्सीन लगने तक अपने और दूसरों के बीच 6 फीट की दूरी रखें।

4- रेस्पिरेटरी हाइजीन और कफ एटिकेट्स का ध्यान रखें।

ख़ुद को कोरोना वायरस से कैसे बचाएं ?

कोरोना वायरस यानी 'कोविड 19' से बचने के लिए आप नियमित रूप से अपने हाथ साबुन और पानी से अच्छे से धोएं। जब कोरोना वायरस से संक्रमित कोई व्यक्ति खांसता या छींकता है तो उसके थूक के बेहद बारीक कण हवा में फैलते हैं. इन कणों में कोरोना वायरस के विषाणु होते हैं।

संक्रमित व्यक्ति के नज़दीक जाने पर ये विषाणुयुक्त कण सांस के रास्ते आपके शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। अगर आप किसी ऐसी जगह को छूते हैं, जहां ये कण गिरे हैं और फिर उसके बाद उसी हाथ से अपनी आंख, नाक या मुंह को छूते हैं तो ये कण आपके शरीर में पहुंचते हैं।

ऐसे में खांसते और छींकते वक्त टिश्यू का इस्तेमाल करना, बिना हाथ धोए अपने चेहरे को न छूना और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचना इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

*विशेष टिप्पणी:- यह आलेख नागरिकों को कोविड वैक्सीन लेने के प्रति सकारात्मक का भाव प्रदान करता है।*



"देश को कोरोना से मुक्त करना है, तो वैक्सीन अवश्य लगाना है।"


                                              डॉ.सारिका ठाकुर "जागृति"


समय




इतना भय 

इतना डर

क्यूँ मगर?

इतनी चिंता 

इतनी फ़िकर

क्यूँ मगर?

बुरा वक़्त है

टल जाएगा 

अच्छा समय 

कल ज़रूर आएगा

समय का पहिया 

कभी रुकता नहीं 

अच्छा या बुरा 

कभी टिकता नहीं 

तू कोशिश तो कर 

बन निर्भय बन निडर 

समय को फेर बदल 

हो अभय हो मुखर 

रात कितनी भी 

गहरी हो अंधेरी हो 

भोर का उजाला 

तो निश्चित है


                             रेखा ड्रोलिया